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निजी चिकित्सकों पर स्वास्थ्य विभाग मेहरबान

डबवाली(प्रैसवार्ता)। स्थानीय सिविल अस्पताल में पिछले डेढ़ वर्ष से बाल रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त होने के चलते स्वास्थय विभाग द्वारा शहर के तीन निजी चिकित्सकों से गठजोड़ किया गया है, जिन्हें डिलीवरी होने उपरांत बच्चे की जांच के लिए सिविल अस्पताल में बुलाकर एक हजार रूपये दिये जाने का प्रावधान है।  अगर बच्चा गंभीर हो और सिविल अस्पताल मेें इलाज संभव न हो, तो निजी चिकित्सक बच्चे को अपने अस्पताल में ले जाते है, जिसका खर्च बच्चे के परिवारजनों को भुगतना पड़ता है। ''प्रैसवार्ता" को मिली जानकारी के अनुसार स्वास्थय विभाग प्रतिमास इन चिकित्सकों पर 50 से 60 हजार रूपये प्रतिमास खर्च करता है, जबकि हरियाणा में बाल रोग विशेषज्ञ का वेतन प्रतिमास लगभग चालीस हजार रूपये है। केवल इतना ही नहीं, यदि बच्चे के परिवारजन निजी चिकित्सक की सेवाएं लेने में असमर्थ हो या न लेना चाहें, तो सिविल अस्पताल से बच्चे को 60 किलोमीटर दूर सिरसा के सामान्य अस्पताल में बने न्यू बोर्न केयर यूनिट के लिए रैफर कर दिया जाता है। सिविल अस्पताल में प्रति मास सौ से ज्यादा डिलीवरी होती है, मगर अस्पताल में डिलीवरी के बाद बच्चों को होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए कोई प्रबंध नहीं है। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व सिविल अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ ने नौकरी छोड़कर प्राईवेट प्रैक्टिस शुरू कर दी है, मगर स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक रिक्त पद को नहीं भरा। प्रदेश के तत्कालीन सरकार ने स्थानीय सिविल अस्पताल में डिलीवरी का अच्छा आंकड़ा देखते हुए वार्मर, फोटो थरेपी जैसे सामान उपलब्ध करवाया, ताकि जन्म के बाद बच्चों को होने वाली विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाया जा सके, मगर बाल रोग विशेषज्ञ न होने के कारण जरूरी सामान अस्पताल के स्टोर रूम में धूल फांक रहा है। 

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