Headlines

Restaurants

Fashion

अश्रुपूरित विदाई....धीरज नहीं रख सका धीरज

सिरसा(दिनेश कौशिक)। दुबला पतला शरीर, चेहरे पर मुस्कराहट, पत्रकारिता क्षेत्र में रहकर समाजहित के लिए बहुत कुछ करने की आक्षाकाएं लिए हुए वह युवा धीरज बजाज शायद अब फिर कभी शारीरिक तौर पर नजर नहीं आएगा, मगर कम समय में अपने कार्यों के चलते अन्यों के लिए प्ररेणापुंज बन चुका धीरज अपनी सोच को अन्य लोगों के जहन में उतारने में सफल रहा। बेशक इस जिदंगी में भरपूर जीने की लालसा पर धीरज धीरज नहीं रख सका, मगर उसके चले जाने की स्थितियां अन्य करे अधीर जरूर कर गई कि आखिर अन्य को बेहतर जीवन जीने के लिए प्रेरित करने वाला खुद जिंदगी से रूसवा हुआ? पत्रकारिता जैसे कठिन राहों पर चलकर अन्य के लिए मार्ग सुगम बनाने के लिए निकला यह युवक वहीं था जिसने अपनी ताकतवर कलम से प्रशासनिक तंत्र को शर्म करो या श्रम करो जैसी पंक्तियां लिखकर जनहित में काम करने के लिए मजबूर किया था। जिंदगी से थका हूं, हारा नहीं हूं, के वाक्य दोहराने वाले धीरज बजाज का धैर्य किन परिस्थितियों में जवाब दे गया, ये प्रश्र समूचे शहरवासियों के लिए ऐसी रिक्ति है, जिसकी भरपाई संभवत: कभी हो सके। समाज के लिए समग्र विकास, नई दिशाएं, युवाओं के लिए रोजगारपरक राहों का ख्वाब देखने वाला धीरज ने स्वयं के लिए ऐसी दिशा चुनी जिस दिशा में मिलती है निराशा, पीड़ा, दर्द, आहें। दोस्त, तुम कहीं भी रहो मगर आपका हौंसला, जज्बा और अन्य को प्रेरित करने की भावना सदैव तुम्हें हमारे बीच जिंदा रखेगी।
जीवन में कुछ कर गुजरने की चाहत से चल रही थी जिदंगी...
पर पता हीं नहीं चला कब रूसवा हो गए जिंदगी से...

Share this:

Post a Comment

 
Copyright © The Pressvarta Trust. Blog Templates Designed by OddThemes