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पत्रकार धीरज बजाज की मौत

सिरसा(प्रैसवार्ता)। सच कहूं समाचार पत्र के ब्यूरों चीफ व थर्ड वे समाचार पत्र के संपादक धीरज बाज ने गत रात्रि अपने एक मित्र के घर पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। शव के पास रखे उनके लैपटॉप में पांच अलग-अलग सुसाइड नोट भी टाईप किए हुए मिले, लेकिन उसमें कहीं न तो आत्महत्या के कारणों का खुलासा किया और न ही किसी को जिम्मेदार ठहराया। सुसाइड नोट में उन्होंने अपने दोस्तों, डेरा सच्चा सौदा, अपने माता-पिता व पुलिस आदि के लिए सामान्य बातें लिखी है। धीरज बजाज के परिवार में उनके बुजुर्ग माता-पिता, बीमार बड़ा भाई, धीरज बजाज की पत्नी व उसकी एक बेटा है। प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार रात को 9 बजे तक धीरज जब अपने घर नहीं पहुंचे तथा बार-बार फोन करने पर भी धीरज ने फोन नहीं उठाया, तो उनके परिजनों ने उनके मित्रों से फोन कर उसके बारे में पूछताछ की। जब यह सूचना गांव गए उनके मित्र की मिली तो उन्होंने अपने पडोसी अजय उप्पल को फोन कर उनके घर जाकर धीरज को देखकर आने को कहा। इस पर अजय उप्पल रात करीब 11 बजे जब वहां गए, तो दरवाजा अंदर से बंद था और बार-बार दरवाजा खटखटाने के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला, तो अजय उप्पल ने छत की तरफ से नीचे गए तो देखा कि छत पर लगे पंख से धीरज का शरीर फंदे पर लटका हुआ था। इस पर उन्होंने तुरंत उसे नीचे उतारा  तो देखा कि धीरज की सांसे चल रही थी। इस पर उसने अपने आस पड़ोस के लोगों, धीरज के मित्रों को वहा बुलाया और डेरा सच्चा सौदा अस्पताल ले गए, वहां चिकित्सकों ने तुरंत उपचार करना शुरू कर दिया, लेकिन उपचार दौरान ही धीरज की मौत हो गई। हंसमुख स्वभाव व सभी से प्रेम से मिलने वाले धीरज बजाज द्वारा इस प्रकार आत्महत्या करने से जिला के पत्रकारों को जहां सदमा लगा है तो वहीं शोक की लहर दौड़ गई है। सुबह सामान्य अस्पताल में पोस्टमार्टम करने के बाद उसके शव का दोपहर को शिवपुरी में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान वहां शहर के सभी पत्रकारों सहित राजनेता, समाजसेवी संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

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