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थैलीबंद दूध शुद्धता की गारंटी नहीं, मिलावट का गोरखधंधा किसी भी स्तर पर हो सकता है...

जोधपुर। शहर में बिकने वाले मिलावटी दूध से उपभोक्ताओ को बचाने के लिए सरस डेयरी ने 'दूध का दूध पानी का पानी' अभियान शुरू किया है। इसके तहत पहले ही दिन 21 में से 15 सैंपल फेल हो गए। यानी दूध मिलावटी मिला। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि सरस डेयरी अपने दूध की बिक्री बढ़ाने के लिए यह स्टंटबाजी कर रही है। गौरतलब है कि पिछले एक सप्ताह में सरस डेयरी के दूध और अन्य प्राडक्ट में 10 से 18 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।
दिसंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को मिलावटी दूध के गोरखधंधे पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। तब जज ने तल्ख टिप्पणी की-क्या साइनाइड मिला दूध पीने से मौतें होने के बाद मिलावटी दूध पर रोक लगाई जाएगी। तब जज ने मिलावटी दूध के लिए उम्र कैद की सजा देने की मांग की थी।

पानी मिले दूध में सजा का प्रावधान नहीं, केवल जुर्माना
गौरतलब है कि पानी की मिलावट किया दूध अगर कोई बेच रहा है तो इस तरह के मामलों में 5 हजार रुपए तक के जुर्माने का ही प्रावधान है, सजा नहीं दी जा सकती। स्वास्थ्य के प्रति घातक रसायन यदि दूध में मिलावट किए जाए तो सजा का प्रावधान है, लेकिन इसमें भी कानून की गलियों से निकलते हुए अपराधी छूट जाते हैं। 

थैली बंद दूध का मतलब यह नहीं कि शत प्रतिशत शुद्ध
सरस भलेही अपने दूध को शुद्ध बता रहा हो, मगर थैलीबंद दूध का मतलब यह नहीं कि वो शत प्रतिशत शुद्ध है। क्योंकि असामाजिक तत्व और स्वार्थी लोग इंजेक्शन लगाकर भी इसमें मिलावट कर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर सकते हैं। तीन साल पहले खुफिया एजेंसियों ने थैलीबंद दूध में सफेद आयल पेंट, फिनाइल, नशीले पदार्थ और स्वास्थ्य की दृष्टि से घातक रसायन मिलाने की चेतावनी दी थी।

चौहटे के दूध पर भी उठने लगी अंगुलियां
शहर की संस्कृति यह है कि चौहटे के दूध पर आंख मूंदकर लोग विश्वास करते हैं। यह शुद्धता की गारंटी मानी जाती है, लेकिन अब इस दूध पर भी सवालिया निशान लग गए हैं। जानकार बताते हैं कि शहर में दो दर्जन स्थान पर चौहटे का दूध बिकता है, लेकिन कई जगह दूध में मिलावट है। 

तो क्या अपने प्राडक्ट की बिक्री बढ़ाने की साजिश है?
सरस डेयरी ने 'दूध का दूध पानी का पानी' अभियान चालू कर यह बताने की कोशिश की है कि उसका दूध और प्राडक्ट शुद्ध है, लेकिन इसके पीछे का खेल अभी लोग समझ नहीं पा रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो पाएंगे कि यह सब सरस डेयरी की अपना दूध और प्राडक्ट बेचने की साजिश है। यह नहीं कहा जा सकता कि बाजार में बिक रहा दूध शत-प्रतिशत शुद्ध है, लेकिन सरस अपने प्राडक्ट की विश्वसनियता बढ़ाने के बहाने शहरवासियों को गुमराह कर रहा है। पिछले एक सप्ताह में सरस के प्राडक्ट में 10 से 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके पीछे भी सरस के अभियान को एक फेक्टर माना जा रहा है। 
  

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