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बीयर व शराब की विदेशी टॉफियाँ अब बाजार में

जोधपुर(प्रैसवार्ता)। शराब की विदेशी टॉफियाँ अब जोधपुर में भी आप खरीद सकते हैं। चोरी-छिपे ऐसी टॉफियाँ बेची जा रही हैं। जोधपुर के कई लोग आस्ट्रेलिया, सिंगापुर, कनाडा, नेपाल व अन्य देशों में बिजनेस या नौकरी के सिलसिले में जाकर बस गए हैं। वे जब यदा-कदा जोधपुर अपने रिश्तेदारों से मिलने आते हैं तो अपने साथ बीयर व शराब की टॉफियाँ लाते हैं। इस तरह लोगों को इन टॉफियाँ को बाजार मिलने की संभावना दिखी और अब तो बाकायदा जोधपुर में भी मिल जाती है विदेशी नशीली टॉफियाँ। कनाडा में एक कंपनी में काम करने वाली शिल्पी ने बताया कि उसके भाई को इस प्रकार की टॉफियाँ खूब पसंद है। वह जब भी जोधपुर आती है, अपने साथ इस तरह की टॉफियाँ लाती है। ..यह अकेले शिल्पी की बात नहीं हैं, कई लोग इस तरह की टॉफियाँ अपने साथ लाते हैं। ऐसा वर्षों से चल रहा है और अब तो यह जोधपुर के बाजार में भी बड़े दाम में मिल जाती है।

एक टॉफी 40 रुपए तक में मिलती है
               बीयर व शराब की एक टॉफी कम से कम 40 रुपए में मिलती है। युवाओं को यह खूब पसंद आती है। जोधपुर में ऐसी टॉफियाँ चोरी-छिपे बिकती हैं। ऐसी टॉफियाँ खाने से पता भी नहीं चलता कि लोग नशा कर रहे हैं। टॉफियाँ के रूप में युवा नशा करने के आदी हो रहे हैं। घर में भी युवा टॉफी चूस सकते हैं और पता भी नहीं चलता कि नशा कर रहे हैं।

आबकारी विभाग कार्रवाई नहीं करता
           इस प्रकार की टॉफियाँ चोरी छिपे बेची जा रही है। आबकारी विभाग को इसकी जानकारी होते हुए भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। बीयर व शराब की टॉफियाँ बेचने के लिए लाइसेंस लेना पड़ता है। मगर इस तरह की टॉफियाँ बिना लाइसेंस ही बिक रही है। आबकारी विभाग का मानना है कि इस प्रकार की टॉफियाँ जब्त कैसे करें? पता ही नहीं चलता कि कौनसी टॉफी नशीली है। टॉफियाँ तो सब एक जैसी होती है। इतने ब्रांड बाजार में उपलब्ध है कि यह पता नहीं चलता कि कोई टॉफी शराब-बीयर से बनी है।

एक-दो टॉफी खाने से नशा नहीं चढ़ता
           बताया जाता है कि एक-दो टॉफी खाने से नशा नहीं चढ़ता। यदि दिन में 10 से 15 टॉफियाँ खाई जाए तो नशा चढ़ सकता है। जो इस प्रकार की टॉफी के आदी हो गए हैं, वे तो दिन भर टॉफी चूसते रहते हैं। ऑफिस में भी टॉफी खाई जा सकती है और किसी को पता भी नहीं चलता।

हाई स्टेटस के लिए भी होता है उपयोग
            बीयर व शराब की टॉफियाँ लोग अपने स्टेटस को मैंटेंन करने के लिए भी खाते हैं। विभिन्न समुदायों में इसका चलन बढ़ रहा है। जोधपुर की कई युवतियां विदेशों में काम करती हैं। जब वे अपने साथ टॉफियाँ लाती है तो घर के सदस्य इसका उपयोग करते हैं। इसके पीछे वे अपना स्टेटस मैंटेंन करने का तर्क देते हैं। शास्त्री नगर की एक युवती जो कनाडा में काम करती है, जब पिछले दिनों छुट्टियों में जोधपुर आई तो अपने साथ बीयर व शराब की टॉफियाँ खूब लाई। उसका कहना है कि हमारे यहां इस प्रकार की टॉफियाँ खाना आम बात है। उसने बताया कि वह यह टॉफियाँ अपने भाई के लिए लाई है। गौरतलब है कि कुछ वर्षों से इस प्रकार की टॉफियाँ जोधपुर में भी बेची जा रही है।

विदेशी सैलानी लाते हैं अपने साथ
           विदेशी सैलानी भी इस प्रकार की टॉफियाँ अपने साथ लाते हैं। एक गाइड ने बताया विदेशी सैलानी इस प्रकार की टॉफियाँ के आदी हो गए हैं। उन्हें अब इस प्रकार की टॉफियाँ जोधपुर में भी सुलभ हो जाती है। गाइड इस प्रकार की टॉफियाँ उपलब्ध करवा देते हैं।

युवतियां भी टॉफियाँ की शौकिन 
            विदेशी युवतियां तो इस प्रकार की टॉफियाँ की शौकिन होती ही है, साथ में जोधपुर की युवतियों को भी बीयर व शराब की टॉफियाँ खूब भाती है। पॉश कॉलोनियों में रहने वाली युवतियों में इसका चलन आम बात है।

लाइसेंस जरूरी
          विशेषज्ञों का कहना है कि बीयर व शराब की टॉफियाँ बेचना गैरकानूनी नहीं हैं, हां, इसके लिए लाइसेंस जरूरी है। साथ ही टॉफियाँ पर लिखना होगा-केवल वयस्कों के लिए। जोधपुर में इस तरह की टॉफियाँ बेचने का लाइसेंस अभी किसी के पास नहीं है। ऐसी टॉफियाँ चोरी-छिपे ही बेचा जा सकता है।

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