सिरसा(प्रैसवार्ता)। लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिले भारी बहुमत से हरियाणवी राजनेताओं में ''हृदय परिवर्तन" की लहर तो चली और वह भाजपाई ध्वज को उठाकर अपने राजनीतिक भविष्य की ख्वाबों की दुनियां में खो गए, मगर हरियाणा में भाजपा की स्पष्ट बहुमत से सरकार बनने पर उनके स्वप्रों पर ''ग्रहण" लग गया है, क्योंकि पुराने भाजपाई दागी, बागी व अवसरवादियों को कोई तव्वजों नहीं दे रहे है। ''प्रैसवार्ता" को मिली जानकारी के अनुसार हरियाणा के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने दो दर्जन से ज्यादा दागी, बागी व अवसरवादियों को चुनावी समर में उतारा था, जिनमें मात्र आधा दर्जन ही विधानसभा तक पहुंच पाए। नौ विधानसभा क्षेत्रों वाले संसदीय क्षेत्र सिरसा में भाजपा ने चार दलबदलुओं पर कार्ड खेला था, मगर जागरूक मतदाताओं ने दलबदलुओं को नकार दिया था। राज्य में भाजपाई सरकार बनने पर दागी, बागी व अवसरवादियों को उम्मीद जगी थी कि सत्ता में उन्हें मान-सम्मान व राजनीतिक उपहार मिलेगा, परंतु ऐसे राजनीतिक दिग्गजों की उम्मीदें डगमगाने लगी है, क्योंकि उन्हें भाजपा में कोई पूछ नहीं रहा है। ऐसी स्थिति के चलते दागी, बागी व अवसरवादी स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे है, जबकि हरियाणवी मतदाता उनकी खिल्ली उड़ा रहे है। भाजपाई ध्वज उठाने वाले दलबदलुओं के वाहनों पर तो भाजपाई इंडिया दिखाई दे रही है, मगर उनके चेहरे बता रहें है कि उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य पर प्रश्र चिन्ह लगा दिया है। भाजपा में मान-सम्मान का दावा देकर भाजपाई बनने वाले भाजपाई दिग्गज मान-सम्मान की बात तो दूर रही, मिलने के लिए भी समय नहीं दे रहे है। विधानसभा चुनाव में भाजपाई बनने वालों की एक लंबी कतार लग गई थी और क्यास लगाया जाने लगा था कि पालिका, परिषद, निगम के चुनाव में भाजपाई आंकड़ा बढ़ेगा, मगर अब नए भगवे रंग में रंगे दिग्गजों की दशा देकर ऐसा लगता है कि भाजपा को स्थानीय निकाय के चुनाव में आंकड़ा बढ़ाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। संसदीय क्षेत्र सिरसा में भाजपाई जनाधार बढ़ाने तथा दूसरे दलां में सेंधमारी के लिए पूर्व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष गणेशीलाल को जिम्मेवारी सौंपी गई थी, जिन्होंने पूर्व मंत्री व कांग्रेसी दिग्गज जगदीश नेहरा, पूर्व मंत्री एवं कांग्रेसी दिग्गज स्व.लछमण दास अरोड़ा की राजनीतिक वारिस सुनीता सेतिया, पूर्व विधायिका एवं इनैलो नेत्री स्वतंत्र बाला चौधरी तथा इनैलो के युवा कमांडर अभय चौटाला के करीबी पवन बैनीवाल को भाजपाई ध्वज थमा कर चुनावी समर में उतारा, मगर एक भी विजयी परचम नहीं लहरा पाया, जिसके चलते भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने गणेशी लाल की अनदेखी शुरू कर दी है। क्षेत्र में चर्चा थी कि गणेशीलाल को राज्यसभा में भेजा जा रहा है, मगर चर्चा राजनीतिक गलियारों से गायब हो गई। गणेशीलाल का दामन थामकर भाजपाई बने राजसी दिग्गज इस उलझन में उलझ कर रह गए है कि वह अब क्या करें, क्योंकि उन्हें गणेशीलाल का राजनीतिक भविष्य धुंधला नजर आ रहा है। इसी प्रकार भाजपाई ध्वज थामने वाले राजसी दिग्गजों की संख्या प्रदेश में बढ़ती देखी जाने लगी है।
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हरियाणा, जहां भाजपा रास नहीं आ रही दलबदलुओं को
By Pressvarta • 5:29:00 PM • LatestNews PoliticalNews • Comments : 0
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