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गैर जाटों में विशेष पहचान बना रहे है- डा. अशोक तंवर

6:54:00 PM

सिरसा ( प्रैसवार्ता ) जाट, गैरजाट की राजनीति की चपेट में आ चुकी हरियाणवी राजनीति में राज्य के ज्यादातर जाट मतदाताओं का रूझान इनैलो पक्षीय देखा जा रहा है, वहीं गैरजाटों में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डा. अशोक तंवर ने मजबूत पकड बना ली है। पंजाबी मुख्यमंत्री होने के बावजूद प्रदेश के पंजाबी समुदाय का रूझान तंवर पक्षीय देखा जा रहा है। इस समुदाय का एक बडा वर्ग कांग्रेस के शासनकाल में भूपेंद्र हुड्डा  के कारण कांग्रेस को छोडकर भाजपा का भगवा ध्वज उठाने पर मजबूर हो गया था, मगर भाजपाई शासन में जाट आरक्षण अंदोलन में पंजाबियों को मिले जख्मों ने इस समुदाय को कांग्रेस में अपना मान-सम्मान और सुरक्षा नजर आने लगी है, क्योंकि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने हुड्डा को तव्वजो न देकर डा. तंवर को कमान सौंपी। हुड्डा के मुख्यमंत्री कार्यकाल में एक भी पंजाबी मंत्री नहीं था और न ही इस समुदाय का कोई प्रशासनिक अधिकारी महत्वपूर्ण पद पर तैनात था। हुड्डा की पंजाबी विरोधी सोच से खफा पंजाबियों ने भाजपा की तरफ ध्यान बढाया और प्रदेश में पहली बार भाजपा की अपनी सरकार बनी। पंजाबी समुदाय की मदद से सत्ता में पहुंची भाजपा ने पंजाबी मुख्यमंत्री बनाकर इस वर्ग को चौधर दी, मगर चौधरी पंजाबियों पर खरा नहीं उतर पाये। पंजाबी समुदाय की भाजपाई शासन से नाराजगी का लाभ तंवर को मिलने लगा, क्योंकि इनैलो जाट समुदाय की वकालत करती है और हुड्डा का इस समुदाय से प्रेम जगजाहिर है। तंवर न सिर्फ दलित समाज के नेता रहे बल्कि गैरजाटों में भी भारी पकड के साथ उभरे हैं। राज्य के गैरजाट भी तंवर के नेतृत्व को स्वीकार कर रहे है, ऐसी राजनीतिक तस्वीर हरियाणवी राजनीति में देखने में मिल रही है।

शोले फिल्म के जय और वीरू साबित हो रहे है अमन चौपड़ा व सुनील बामनिया

6:28:00 PM
सिरसा(प्रैसवार्ता)। सिरसा की राजनीति में अमन चौपड़ा व सुनील बामनिया की राजनीतिक जोड़ी शोले फिल्म के जय और वीरू साबित हो रहे है और भाजपा हाईकमान की हर परीक्षा में खरे उतर रहे है। बात चाहें किसी रैली की कामयाबी को लेकर हो, चाहे संगठन को लेकर हो, हर मोर्चे पर यह राजनीतिक जोड़ी सिरसा के इतिहास में अपनी विशेष पहचान बना चुकी है। इस बात का प्रमाण यह भी है कि इनकी राजनीतिक काबलियत को देखकर भाजपा संगठन ने इन्हें भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेेश उपाध्यक्ष व जिलाध्यक्ष के महत्त्वपूर्ण दायित्व सौंपे हुए है। अगर बात भाजपा राष्ट्रीयाध्यक्ष अमित शाह की 15 फरवरी को जींद में होने वाली युवा हुंकार रैली की करें, तो इसे कामयाब बनाने के लिए इस जोड़ी ने अपनी कार्यकुशलता का बेहतर उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस युवा जोड़ी ने जिला के सभी कस्बों व गांवों में जाकर युवाओं को इस रैली के लिए प्रेरित किया और 'युवाओं की हुंकार प्रदेश में फिर पुन: भाजपा सरकार' नारे को भी पूरी तरह से बुलंद किया है।
राजनीतिक पंडि़तों के क्यासों पर भी भारी पड़ी यह जोड़ी
राजनीतिक पंडि़तों की मानें, तो यह क्यास लगाए जा रहे थे कि जिला में भाजपा का कोई भी विधायक नहीं है। इसलिए इस रैली में शायद जाने वालों की संख्या कम होगी, परंतु इस युवा जोड़ी के प्रचार-प्रसार ने राजनीतिक पंडि़तों की भविष्यवाणी को भी गलत साबित कर दिया है, क्योंकि जिस जोश-उत्साह के साथ जिला के युवा इस रैली में जाने के लिए आतुर दिखाई दिए, इससे यह बात स्पष्ट हो जातही है कि इस राजनीतिक जोड़ी ने निश्चित तौर पर जिला में भाजपा के वोट बैंक व ग्राफ को बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।

सर्वेक्षणः कैसा विधायक चाहते हैं- सिरसा के मतदाता

1:28:00 PM

(नवीन,गोपाल,अमन, कृष्ण गुबंर है दावेदार)
सिरसा ( प्रैसवार्ता ) हरियाणा विधानसभाई चुनाव अभी दूर है, मगर राज्य के अन्य क्षेत्रों की तरह सिरसा क्षेत्र से चुनाव लडने के इच्छुकों की राजनीतिक सरगर्मियां बढी हुई है। क्षेत्र सिरसा के मतदाता कैसा विधायक चाहते हैं,को लेकर "प्रैसवार्ता' द्वारा करवाये गये एक सर्वेक्षण में कांग्रेस के नवीन केडिया, हलोपा के गोपाल कांडा, भाजपा के अमन चोपडा तथा इनैलो के कृष्ण गुंबर को फोक्स बनाकर मतदाताओं की राये एकत्रित की गई है। सिरसा क्षेत्र में शहर के 31 वार्डो तथा 31 ग्रामों में 31 प्रतिशत ही युवा मतदाता है।"प्रैसवार्ता" ने सभी वर्गो से संबधित युवाओं,महिलाओं तथा पुरूषों से संपर्क करके "सिरसा को कैसा विधायक चाहिये" पर चर्चा की है। सिरसा क्षेत्र को इनैलो का गढ कहा जाता है और वर्तमान में इनैलो का ही प्रतिनिधी विधायक है। इस क्षेत्र में अग्रवाल वैश्य समाज, पंजाबी समुदाय के मतदाताओं का आंकडा ज्यादा है, जबकि ब्राहमण, जाट, कु्म्हार, दलित तथा पिछडा वर्ग की भी अच्छी उपस्थिती है। क्षेत्र के कांग्रेस पक्षीय सोच वाले मतदाता कांग्रेस के मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष डा. अशोक तंवर के विश्वास पात्र नवीन केडिया को उचित मानते है, जो पहले भी इस क्षेत्र से चुनाव  बतौर कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव लड चुके हैं। केडिया पक्षीयों की सोच है कि वह युवा, पूर्णतया पार्टी को ईमानदारी के साथ समर्पित, हर व्यक्ति के दुख-सुख में भागीदारी रखने के साथ-साथ क्षेत्र की समस्या से न केवल परिचित हैं, बल्कि समाधान करवाने में भी सक्षम हैंं। हलोपा सुप्रीमो गोपाल काँडा इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और पिछले विधानसभा चुनाव में भी इनैलो प्रत्याशी को कडी चुनावी टक्कर दे चुके हैं। केडिया और काँडा अग्रवाल वैश्य समाज से ताल्लुक रखते है। भाजपा की और से युवा चेहरे अमन चोपडा को उम्मीदवार बनाये जाने की संभावना है, जबकि इनैलो की तरफ से पूर्व पार्षद कृष्ण गुंबर अपनी दावेदारी रखते हैं। चोपडा तथा गुंबर का सबंध पंजाबी समुदाय से है। सिरसा क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास के अनुसार इस क्षेत्र से हरियाणा गठन  के बाद दो बार को छोडकर अग्रवाल या पंजाबी समुदाय की ही चौधर रही है। कांग्रेस, हलोपा को छोडकर भाजपा व इनैलो में अभी भी प्रत्याशी चयन को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जबकि भाजपा टिकट के लिये यतिंद्र सिंह एडवोकेट, सुनीता सेतिया तथा इनैलो प्रत्याशी बनने के लिये मक्खन सिंगला भी प्रयासरत देखे जा रहे हैं। चर्चा तो यह भी है कि एक भाजपाई दिग्गज " चश्मा" भी पहन सकता है। यदि ऐसा होता है, तो चुनावी समींकरणों में बदलाव भी आ सकता है।

शाह की वापसी के बाद राहुल को हरियाणा लाने की तैयारी

1:26:00 PM
सिरसा(प्रैसवार्ता) हरियाणा में डगमगाते भाजपाई शासन को संजीवनी देने के लिये हरियाणा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 15 फरवरी को आ रहे हैं, जो बाईक यात्रा के माध्यम से राज्य का दौरा करने के साथ ही सरकार व संगठन के कामकाज की समीक्षा भी करेंगे। हरियाणवी राजनीति वर्तमान में यात्राओं की चपेट में है। कांग्रेस के मौजूदा प्रधान अशोक तंवर राज्य में साईकिल पर घूम रहे है, तो इनैलो के भी प्रदेशव्यापी कार्यक्रम पहलै से ही चल रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा  भूपेंद्र हुड्डा की रथयात्रा तथा अमित शाह की बाईक यात्रा भी हरियाणा वासियों को अगले महीने देखने को मिलेगी। शाह की हरियाणा यात्रा उपरांत कांग्रेस ने भी राहुल गांधी को हरियाणा में लाने की तैयारी शुरू कर दी है।  हरियाणा में बिगड रही कानून व्यवस्था व बढते अपराधों पर सरकार विरोधी दलों के निशाने पर है। कांग्रेस के प्रांतीय प्रवक्ता  सुभाष बत्रा के अनुसार तंवर और किरण चौधरी ने राहुल गांधी से मिलने का समय मांगा है, जिसमें मंथन शिविर की रिपोर्ट के अतिरिक्त  राज्य के राजनीतिक मुद्दो पर विचार किया जायेगा। कांग्रेस के नेतागण प्रयास करेगें कि राहुल गांधी हरियाणा कांग्रेस की राज्य स्तरीय रैली मेंं शामिल होने की स्वीकृति दें। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की संभावित राज्यस्तरीय रैली रोहतक में की जा सकती है। यदि कांग्रेस रोहतक में राज्यस्तरीय रैली करने और उसमें राहुल गांधी की उपस्थिती दर्ज करवाने मे सफल हो जाती है, तो हरियाणवी कांग्रेस का मानचित्र  में बदलाव आ सकता है, ऐसी राजनीतिक पंडितों की सोच है।

तंवर के मंथन शिविरों ने बढाई हुड्डा समर्थको की बेचैनी

3:20:00 PM
सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणवी कांग्रेस में मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर द्वारा शुरू किये गये मंथन शिविरों ने राज्य में समांतर कांग्रेस चला रहे पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र हुड्डा के समर्थकों की बेचैनी बढा दी है और उन्हें अपना राजनीतिक भविष्य डगमगाता नजर आने लगा है। चर्चा है कि तंवर संगठन में अपने पसंदीदा चेहरों का आंकडा बढाने के साथ ही संभावित प्रत्याशियों.का चयन भी कर रहे हैं, ताकि भविष्य में होने वाले लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों में टिकट वितरण दौरान अपने ज्यादा समर्थकों को प्रत्याशी घोषित करवा सकें। तंवर के संसदीय क्षेत्र सिरसा के विधानसभा क्षेत्र टोहाना से दवेंद्र बबली,फतेहाबाद से नरेश सरदाना, सिरसा से नवीन केडिया, कालांवाली से शीशपाल केहरवाला ,डबवाली से जग्गा सिंह बराड़ को मजबूत कांग्रेस प्रत्याशी माना जा रहा है, जबकि रानियां से रंजीत सिंह की संभावना है। संसदीय क्षेत्र सिरसा के विधानसभा क्षेत्र नरवाना, ऐलनाबाद तथा रतिया से नये चेहरों को चुनावी समर में उतारा जा सकता है। इस संसदीय क्षेत्र में तंवर की मजबूत पकड है। इसी प्रकार राज्य के अन्य संसदीय क्षेत्रों में प्रत्याशी चयन के लिये मंथन शिविर आयोजित किये जा रहें जा रहे है। पडौसी राज्य राजस्थान के उपचुनावों से मिली कांग्रेस को संजीवनी ने हरियाणवी कांग्रेस काफी उत्साहित है,क्योंकि इस उपचुनाव का असर हरियाणवी राजनीति पर भी होगा? प्रदेश की मौजूदा स्थिति को देखते हुए कांग्रेसी नेताओं ने मुंगेरीलाल के हसीन स्वपन लेने शुरू कर दिये है, मगर हुड्डा समर्थकों की उम्मीदोंं पर तंवर का राजनीतिक भय मंडराने लगा है।

राहुल की ताजपोशी से दोहराया जा सकता है - कांग्रेसी इतिहास

3:45:00 PM
 सिरसा ( प्रैसवार्ता )। पंडित जवाहर लाल नेहरू  के समय से शुरू हुए कांग्रेसी इतिहास को मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा भी दोहराये जाने की संभावना नजर आने लगी है । कांग्रेसी इतिहास के अनुसार पार्टी के मुखिया बदलने के साथ ही उसकी टीम को अलविदाई प्रमाण पत्र थमा दिया जाता रहा है। राहुल गांधी को लेकर भी क्यास लगाये जाने लगे हैं कि वह भी कांग्रेसी  इतिहास की पुरानी पंरपरा को बरकरार रखते  हुए अपनी टीम में नये चेहरों को तव्वजो देंगे । वर्तमान में राहुल के करीबी और विश्वासपात्रों में सिरसा से पूर्व सासंद अशोक तंवर, हरियाणा से कांग्रेस के इकलौते सासंद दीपेंदर हुड्डा, हरियाणा से कांग्रेसी विधायक रणदीप सुरजेवाला, पंजाब से कांग्रेसी विधायक अमरिंदर सिंह, राजस्थान से भंवर जितेद्र ,सचिन पा्यलट तथा हरीश चौधरी, महाराष्ट्र से राजीव सातव व मिलिंद देवडा, दिल्ली से अजय माकन, मध्य प्रदेश से ज्योतिरादित्य सिंधिंया व मीनाक्षी नटराजन, तामिलनाडू से माणिक टैगोर यू०पी से आर.पी.एन.सिह, जितेंद्र प्रसाद, असम से गौरव गोगाई के अतिरिक्त सोशल मीडिया हैड दिव्या स्पंदन, सुष्मिता देव तथा प्रियंका चतुर्वेदी इत्यादि राजनीतिक चेहरे हैं, जिन्हें राहुल गांधी के आतंरिक सर्कल का सदस्य कहा जा सकता है। कांग्रेसी इतिहास साक्षी है कि इंदिरा गांधी की टीम को राजीव गांधी के प्रधानमंत्री कार्याकाल में कोई तव्वजो नहीं मिली थी । धीरेंद्र ब्रहमचारी, आर.के.धवन, फखरूद्दीन अली अहमद, सतीश शर्मा, उमा शंकर दीक्षित जैसे राजसी दिग्गज हैं, जिनमें से कुछ का निधन हो चुका है, जबकि अन्य कांग्रेसी मानचित्र से गायब हैं। राहुल की टीम में हरियाणवी चौधर तो बन सकती है,मगर आपसी कलह से जूझ रही हरियाणवी कांग्रेस का चौधरी कौन बनेगा को लेकर क्यासों का दौर शुरु हो गया है ।

भाजपा के गुजरात छक्के ने छुडवाये भाजपा के छक्के

5:22:00 PM
सिरसा (प्रैसवार्ता)। गुजरात विधानसभा के चुनाव में मतदाताओं ने छठी बार जीत तो भाजपा को दिलवा दी, मगर इस जीत ने भाजपा के छक्के छुड़वा दिये। भाजपा को कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल मणीशंकर अय्यर का शुक्रगुजार होना चाहिए, जिनकी बदौलत बहुसंख्यकों को भाजपा पर ही विश्वास को तव्वजों देनी पडी। भाजपा के इस दुर्ग में सेंंधमारी के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने युवा त्रिवेणी हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर तथा जिग्नेश मेवानी को साथ लेकर गुजरात में जो राजनीतिक बैटिंग की, उससे राजनीतिक पंडित भी दंग रह गये। भाजपा सरकार बनाने में तो कामयाब हो गई है, मगर गुजरात के मतदाताओं ने भाजपा को जोर का झटका धीरे से देते हुए आईना दिखा दिया।  गुजरात में कांग्रेसी संगठन मजबत नहीं था ,क्योंकि वहां लंबे समय से भाजपाई शासन है। इससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि नाराजगी के बावजूद गुजरात ने मोदी पर विश्वास जताया है। गुजरात चुनाव परिणाम ने कांग्रेस को विकल्प के रूप में स्वीकार न करते हुए भाजपा को चेतावनी दी है। गुजरात में एक दर्जन से ज्यादा ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं,जहां हार-जीत का आंकडा कम रहा है। गुजरात में कांग्रेस की पराजय भी नहीं कही जा सकती, क्योंकि गुजरात को राहुल गांधी के रूप में एक आत्मविश्वासी नेता मिल गया है,जो 2019 के आम चुनाव में भाजपा की बेचैनी बढा सकता है। वर्तमान में भाजपा  मोदी लहर का फायदा उठा  रही है क्योंकि भाजपा किसी अन्य चेहरे को आगे लाने से परहेज बनाये हुए है।    

खट्टर का फार्मूला फाईव -सी :अफसरशाही के लिये नववर्ष का उपहार

3:16:00 PM
सिरसा (प्रैसवार्ता ) हिमाचल के परवाणु में हरियाणा सरकार के चिंतन शिविर का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का अफसरशाही को दिया गये फार्मूले को नव वर्ष का उपहार माना जा रहा है। फार्मूला  सी नामक इस फार्मूले में मुख्यमंत्री ने अफसरशाही को सी.बी.आई, कोर्ट, विजीलैंस,कैग तथा सूचना आयोग से न डरने का संकेत दिया है।खट्टर के इस फार्मूले से अफसरशाही को मनमानी की छूट रहेगी, जबकि इससे पहले सत्तारूढ भाजपा के अनेक दिग्गज शीर्ष नेतृत्व के समक्ष अफसरशाही द्वारा उन्हे तव्वजो न देने की गुहार लगा चुके है। हरियाणा प्रदेश में अफसरशाही पहले ही सूचना आयोग को ठेंगा दिखा चुकी है। तथ्य साक्षी है कि सूचना आयोग हरियाणा द्वारा वर्ष 2008 में 63, वर्ष 2009 में 76, वर्ष 2010 में 108, वर्ष 2011 में 49, वर्ष 2012 में 77, वर्ष 2013 में 202 , वर्ष 2014  में 395, वर्ष 2015 में 625 , वर्ष 2016 में 44 तथा  नवंबर 2017  तक 235 राज्य जन सूचना अधिकारियों पर जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना की चपेट में आये 2238  दोषी राज्य जन सूचना अधिकारियों में से 1482 ने जुर्माना नहीं भरा है। सूत्रों के मुताबिक आयोग में धारा 18 (2) के तहत अब तक 3889 ,धारा 19 (3 ) में 48907 तथा धारा 20 (1) में 13993  पिछले एक दशक में आये हैं, जिनमें से 2641 मामलों में धारा 19(8) के तहत 6292837 रूपये आवेदकों को हर्जाने के आदेश दिये गये हैं। इन आदेशों के चलते ज्यादा आवेदकों को  हर्जाना राशी अभी तक नहीं मिली है। सूचना आयोग ने 838  मामलों में सूचना अधिकार कानून की धारा 20(2) के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही के आदेश दिए जा चुके हैं । केवल इतना ही नहीं सूचना आयोग  द्वारा कई राज्य जन सूचना अधिकारियों के खिलाफ वारंट भी  जारी किये गये हैं, मगर संबधित तंत्र ने इसकी कोई  परवाह नहीं की। मुख्यमंत्री के फार्मूला सी फाईव से सूचना आयोग में दस्तक देने वालों को निराशा हाथ  ही लगेगी और सूचना आयोग सरकार पर एक आर्थिक बोझ बन कर रह जायेगा ।इसी प्रकार अफसरशाही सी, बी. आई, विजीलैस व कैग के भय से मुक्त होकर सरकारी खिलौना  बन कर रह जायेगी और सरकार अफसरशाही पर निर्भर हो कर रह  जायेगी।

अकाली दल की हरियाणा में डुगडुगी से कांग्रेस उत्साहित

11:08:00 AM
सिरसा(प्रैसवार्ता)। शिरोमणी अकाली दल द्वारा हरियाणा में दो संसदीय क्षेत्र तथा तीस विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लडने की डुगडुगी से  हरियाणवीं कांग्रेस काफी उत्साहित नजर आ रही है, क्योंकि हरियाणा में कांग्रेस और इनैलो में ही चुनावी जंग मानी जा रही है, जबकि सत्तारूढ भाजपा से अपने ही खफा है। राजनीतिक पंडित अकाली डुगडुगी को भाजपाई कार्ड मानते है। अकाली दल के चुनावी समर में उतरने का सबसे ज्यादा नुकसान इनैलो को होगा। इनैलो और अकाली दल लंबे समय से मिलकर हरियाणा में राजनीति करते आ रहे है। पिछले चुनाव में अकाली दल ने भाजपा से तालमेल के बावजूद इनैलो प्रत्याशियों के लिए जमकर प्रचार भी किया था, जिससे अकाली दल और भाजपा पंजाब में खट्टास पैदा हुई । इसी खट्टास का खमियाजा अकाली दल को पंजाब के विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ा। अकाली दल और इनैलो में एसवाईएल के पानी को लेकर मतभेद हैं। इन मतभेदों का लाभ उठाने के लिए भाजपा ने राजनीतिक कार्ड खेला है,जो इन मतभेदों का राजनीतिक फायदा उठाने की फिराक में है। राजनीतिक  पंडितों का मानना है कि अकाली दल की सेंधमारी से इनैलो को  जो नुकसान होगा,उसका फायदा कांग्रेस को होगा। इनैलो की दलील रहेगी कि प्रदेश हित को तव्वजो देते हुए उसने अकाली दल से राजनीतिक रिश्ते समाप्त किये हैं,जबकि अकाली दल के पास कोई मुद्दा नहीं होगा ,बल्कि हरियाणा को एस वाई एल के पानी के विरोध का सामना करना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री खट्टर के दौरे से फतेहाबाद में ठंड के बावजूद बढी सियासी गर्मी

3:56:00 PM
सिरसा(प्रैसवार्ता)। मुख्यमंत्री  हरियाणा मनोहर लाल खट्टर के दो दिवसीय  फतेहाबाद दौरे से कई भाजपाई  दिग्गजों की धडकने बढ़ गई है, क्योंकि क्यास लगाये जाने है कि खट्टर फतेहाबाद विधानसभा से चुनाव लड़ सकते है। खुफिया सर्वे अनुसार इनैलो के गढ़ कहे जाने वाले संसदीय क्षेत्र सिरसा में सेंधमारी के लिए भाजपा ने फोक्स बनाकर योजना पर अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। फतेहाबाद से वर्तमान में इनैलो के बलवान दौलतपुरिया विधायक हैं, जो जाट समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। इस  क्षेत्र से दौलतपुरिया के अतिरिक्त वेद फूलां जिलाध्यक्ष भाजपा, हुड्डा कांग्रेस के प्रहलाद गिल्लांखेडा भी जाट समुदाय से संबधित चुनावी समर में उतरने की तैयारी में है। जाट बनाम गैरजाट की राजनीति की चपेट में आ चुकी हरियाणवी  राजनीति में इन जाट  दिग्गजों में वोट बंटने की संभावना को देखते हुए  भाजपा गैर जाट को चुनावी समर में उतारने का कार्ड खेल सकती है। वैसे  तो भाजपा के पास कई ऐसे चेहरे हैं,जो चुनाव लडऩे के इच्छुक है, मगर इनैलो के इस गढ़ में सेंधमारी के लिये खट्टर जैसा हैवीवेट उम्मीदवार ही भगवा ध्वज फहरा  सकता है। खट्टर के चुनाव फतेहाबाद से लडऩे की चर्चा से क्षेत्र में ठंड के बावजूद सियासी गर्मी बढ गई है और इसी के साथ ही चुनाव लडने के इच्छुकों में हलचल मच गई हैं। भाजपा के संभावित प्रत्याशियों को अपनी राजनीतिक उम्मीदों पर ग्रहण लगता दिखाई देने लगा है।

विधायकों की शैक्षणिक योग्यता ने बढाई कई विधायकों की धडकने

1:00:00 PM
सिरसा (प्रैसवार्ता)। मुख्यमंत्री हरियाणा मनोहरलाल खट्टर की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सांसदो व विधायकों की शैक्षणिक योग्यता बी.ए तय करने की सिफारिश ने कई सांसदो व विधायकों की बेचैनी बढ़ा दी है। निकट भविष्य में यदि सांसदो व विधायकों की शैक्षणिक की शर्त चुनाव लडने के लिए लगाई जाती है, तो कई सांसद व विधायक चुनाव नहीं लड पाएंगे। प्रदेश के 90 विधायकों मे से एक तिहाई विधायक बी.ए पास नहीं है, जिनमें से कृष्ण लाल पंवार परिवहन मंत्री, मनीष ग्रोवर सहकारिता मंत्री, बक्शीश सिंह विर्क, बलकौर सिह, बिमला चौधरी, हरीचंद मिड्ढा, जयवीर वाल्मीकी, जसविन्द्र संधू, कुलवंत बाजीगर, शकुतंला खटक, सिरी कृष्ण हुड्डा, मक्खन सिंगला, पृथ्वी सिंह, राजदीप, रणवीर गंगवा, रविन्द्र मछरौली, तेजपाल तंवर के अतिरिक्त सांसद चरणजीत रोड़ी शामिल हैं। मुख्यमंत्री के सुझाव पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इनैलो सांसद दुष्यंत चौटाला का कहना है कि इस विषय पर जनता का फीड बैक लेने के बाद लोकसभा में प्रस्ताव रखना उचित रहेगा, न कि जबरदस्ती थोंपा जाना, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इसका विरोध जताते हुए कहा है कि जनता की अगुवाई कोई भी कर सकता है। उनकी दलील है कि देश को आजाद करवाने में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानी  कम पढ़े लिखे थे। मुख्यमंत्री का सुझाव क्या रंग लायेगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, मगर इस सुझाव ने हरियाणवी राजनीति में हलचल मचा दी है।

भाजपाई मिशन 2019: हरियाणा में महिलाओं और युवा वर्ग पर भाजपाई फोक्स

11:32:00 AM
सिरसा(प्रैसवार्ता)। भाजपा हरियाणा ने उत्तरप्रदेश की तर्ज पर चलते हुए मिशन 2019 पर अमलीजामा पहनाने के लिए युवाओं व महिलाओं पर अपना फोक्स बनाना शुरू कर दिया है। भाजपा युवा वर्ग व महिलाओं की ऐसी टीमें बनाने जा रही है, जो अपने क्षेत्र से लेकर देशभर में भाजपा व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुणगान करेगी। भाजपा के हाईकमान ने हरियाणा के सभी सासंदो, विधायको के अलावा लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव  मे पराजित सभी उम्मीदवारों से ऐसे युवा चेहरे और महिलाओं की जानकारी मांगी है, जो सामाजिक, आर्थिक, विज्ञान,समाज सेवा, पत्रकारिता अथवा किसी ओर क्षेत्र में विशेषता रखते है। भाजपा के राष्ट्रीयाध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही देशभर में ऐसे निर्देश दे चुके हैं। हरियाणा की भाजपाई राजनीति में गुटबंदी, अपनों की ही नाराजगी के चलते इस निर्देश का पालन धीमी गति से चल रहा है। मिशन 2019 को लेकर भाजपा हाईकमान  की कडी फटकार के बाद  भाजपा हरियाणा ने तेजी पकडी है। सूत्रों के मुताबिक चयनित चेहरों की गंभीरता से छानबीन उपरांत भाजपा हाईकमान तक पहंचाई जाएगी, जिस पर हाईकमान चयनित चेहरो को प्रशिक्षण देगा। प्रशिक्षण के बाद इन चेहरो को ऐसे विधानक्षेत्रो में भेजा जाएगा, जहां भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी। हरियाणा के 90  विधानसभा क्षेत्रों के लिए पहले चरण में करीब एक हजार युवा तथा महिलाओं को आधुनिक सुविधाओं के साथ तैनात किया जाएगा, जोकि वेतनभोगी होंगे। इस योजना की शुरूआत पत्रकारिता से जुडे लोगो से हो चुकी है।

राहुल की ताजपोशी उपरांत बदलेगी हरियाणवी कांग्रेस की तस्वीर

4:50:00 PM
सिरसा(प्रैसवार्ता)। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा तथा विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी को अर्श से फर्श पर लाने वाले कांग्रेसी विधायकों को हाईकमान की ओर से कोई तवज्जो न देने से उनकी विश्वसनीयता संदेह के घेरे में आ गई है। इससे उन्हें उम्मीद भी दिखाई नहीं देती कि राहुल गांधी की दिसंबर माह में होने वाली ताजपोशी से उन्हें कोई राजनीतिक फायदा होगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में लिए गए निर्णयानुसार कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी को किसी भी समय राष्ट्रीयाध्यक्ष बनाया जा सकता है और क्यास लगाए जा रहे है कि राहुल गांधी की ओर से पार्टी की कमान संभालते ही कई राज्यों में कांग्रेस संगठन में बदलाव किया जा सकता है, जिसमें हरियाणा प्रदेश भी शामिल है। संभावित फेरबदल को देखते हुए हरियाणवी कांग्रेस में हलचल शुरू हो गए हैं। वर्तमान में हरियाणा प्रदेश में कांग्रेस के साथ साथ समांतर कांग्रेस चल रही है। डॉ. अशोक तंवर हरियाणा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा समांतर कांग्रेस की कमान संभाले हुए है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा व डॉ. अशोक तंवर के राजनीतिक मतभेद जगजाहिर है। तंवर की प्रधानगी से हरियाणा में कांग्रेस को काफी मजबूती मिली है, दूसरी तरफ भूपेंद्र हुड्डा समर्थक कांग्रेस दिग्गज डॉ. तंवर की प्रधानगी को लेकर एक मुहिम चलाए हुए हैं और निरंतर तंवर की ओर से आयोजित जनसभाएं तथा बैठकों से दूरी बनानी जारी रखे हुए हैं। तंवर के नेतृत्व से खफा हुड्डा समर्थक हरसंभव प्रयास कर चुके हैं कि हरियाणवी कांग्रेस को तंवर मुक्त बनाया जाए, जबकि तंवर की कांग्रेस को समर्पित कार्यशैली से हरियाणा कांग्रेस फर्श से ऊपर उठ रही है। हुड्डा समर्थकों की ओर से तंवर को बदलने के लिए किए गए शक्ति प्रदर्शन और दवाब की राजनीति के चलते शीर्ष नेतृत्व ने तीन प्रभारी नियुक्त कर हरियाणवी कांग्रेस संबंधी जानकारी प्राप्त कर रिपोर्ट हासिल की, जिसमें तंवर की प्रधानगी को सही ठहराया गया। राहुल की ताजपोशी के बाद हरियाणवी कांग्रेस की तस्वीर कैसी रहेगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, मगर यदि समांतर कांग्रेस अपने मिशन में कामयाब हो जाती है, तो कांग्रेस की स्थिति वर्ष 2014 जैसी हो सकती है, ऐसा राजनीतिक पंडि़तों का मानना है।

हरियाणा में आधा दर्जन से ज्यादा चेयरमैन हो सकते हैं पदमुक्त

6:52:00 PM
सिरसा(प्रैसवार्ता)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा खुफिया सर्वे उपरांत हरियाणा में दूसरी पारी खेलने के लिए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने स्वच्छ एवं स्वस्थ व ईमानदार छवि को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को ही विजय परचम फहराने की हरी झंडी देते हुए मंत्री मंडल तथा संगठन में बदलाव की सिफारिश को कहा है, क्योंकि गुजरात चुनाव परिणाम उपरांत हरियाणा की भाजपा की राजनीति में एक बड़ा फेरबदल हो सकता है। फेरबदल में कई बोर्ड तथा निगमों के चेयरमैन पद मुक्त किए जा सकते है, जिन पर संगठन, सरकार तथा जन भावनाओं पर खरा न उतरने का आरोप है। पांच विधानसभा क्षेत्रों के सिरसा जिला से कोई भी भाजपा विधायक नहीं है, मगर मौजूदा भाजपा सरकार ने पांच चेहरों को बोर्ड व निगमों का चेयरमैन बनाया हुआ है, जिनमें से जगदीश चौपड़ा को हरियाणा पर्यटन विभाग, गुरुदेव सिंह राही को हरियाणा माटी कला बोर्ड, पवन बेनीवाल को हरियाणा बीज विकास निगम, रेणू शर्मा को हरियाणा महिला बाल विकास तथा डॉ. कुमुद बांसल को हरियाणा साहित्य अकादमी की कमान सौंपी हुई है। पवन बैनीवाल को छोड़कर तीनों चेयरमैनों को यह चौधर मौजूदा पर्यटन निगम के चेयरमैन जगदीश चौपडा की बदौलत मिली है, जब चौपडा मुख्यमंत्री हरियाणा के राजनीतिक सलाहकार थे। प्रो. गणेशी लाल व जगदीश चौपड़ा की राजनीतिक आँख मिचौली से जिला की भाजपा का जनाधार तेजी से कम होता देखकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने मोर्चा संभालते हुए शीर्ष नेतृत्व को जिला भाजपा की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया है, जिस पर शीर्ष नेतृत्व ने कड़ा संज्ञान लेते हुए माटी कला बोर्ड के परिवारिक विवादित चेयरमैन गुरदेव सिंह राही, हरियाणवी कवियों व साहित्यकारों की अनदेखी कर दिल्ली तथा यूपी  की प्रतिमाओं पर बजट खर्च करने के मामले में चर्चित हरियाणा साहित्य अकादमी की निर्देशिका डॉ. कुमुद बांसल तथा महिला बाल विकास निगम की चेयरपर्सन रेणु शर्मा पर फोक्स बना लिया है और क्यास लगाया जा रहा है कि फेरबदल के प्रथम चरण में इन तीनों को पदमुक्त किया जा सकता है।  संघ के सुझाव पर भाजपा जिला सिरसा में निष्क्रिय हो चुके भाजपाई दिग्गजों को पुन: सक्रिय करने तथा राजनीति में रूचि रखने वाले युवा वर्ग तथा महिलाओं को भाजपा के साथ जोडने के लिए एक विशेष मुहिम शुरू किए जा रही है, जिसके लिए बकायदा भाजपा के जिलाध्यक्ष यतिन्द्र सिंह एडवोकेट के नेतृत्व में कमेटी गठित की जाने की कवायद शुरू हो चुकी है।

हरियाणा में भाजपा की दूसरी पारी की तैयारी, कांग्रेस आपसी कलह की चपेट में

3:32:00 PM
सिरसा(प्रैसवार्ता)। खुफिया एजेंसीज से करवाए गए अनौपचारिक सर्वे से हरियाणा भाजपा सतर्क हो गई है और उसने दूसरी पारी खेलने की तैयारी शुरू कर दी है। भाजपाई दिग्गजों के प्रति मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की राजनीतिक सोच में बदलाव और अफसरशाही पर लगाम कसने की कवायद से हरियाणा भाजपा का राजनीतिक मानचित्र तेजी से करवट लेने लगा है। हरियाणा में भाजपा की दूसरी पारी की कमान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने संभाल ली है और मौजूदा भाजपाई विधायकों का फीड बैक एकत्रित किया जाने लगा है। संघ प्रदेश के कुछ विधानसभा क्षेत्रों के लिए नए चेहरे पर फोक्स बनाए हुए है, जो संगठन के प्रति पूर्णतया समर्पित करने तथा स्वच्छ छवि के स्वामी है। भाजपा के राष्ट्रीयाध्यक्ष अमित शाह संकेत दे चुके है कि प्रदेश में भाजपा दूसरी पारी मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में ही खेलेगी। संघ ने संगठन की मौजूदा तस्वीर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को दिखा दी है, जबकि प्रदेश मीडिया प्रभारी राजीव जैन के सुझाव को शीर्ष नेतृत्व ने हरी झंडी दिखाते हुए सरकार को मीडिया के साथ मधुर संबंध बनाने के निर्देश दिए है। हरियाणा सरकार ने मीडिया कर्मियों की पुरानी मांगों के समाधान व अन्य सुविधाओं को उपलब्ध करवाने पर गंभीरता से विचार विमर्श शुरू कर दिया है, जिस पर जल्द ही अमलीजामा पहनाया जा सकता है। इसी प्रकार भाजपा हरियाणा कांग्रेस के आपसी कलह को भी अपने लिए लाभदायक मानकर चल रही है, जबकि प्रमुख विपक्षी इनैलो से कोई राजनीतिक भय नहीं मानती। हरियाणा में संघ ने संगठन को मजबूती देेने के लिए परिश्रमी, समर्पित, निष्क्रिय भाजपाईयों से संपर्क बढाना शुरू कर दिया है। हरियाणा में आगामी विधानसभा चुनाव के रंग, ढंग और तौर-तरीके बदलते हुए दिखाई देंगे, क्योंकि भाजपा ने खंड व तहसील स्तर पर पार्टी कार्यालय बनाने और उनका एक दूसरे कार्यालय से संपर्क बनाने तथा बूथ स्तर से भी नीचे मतदाता सूची के आधार पर पन्ना प्रमुखों को नियुक्ति देने की योजना बनाई है। भाजपा पूरे प्रदेश में आत्याधुनिक सामग्री से मीडिया को रिसर्च सामग्री व इलैक्ट्रोनिक मीडिया को हरसंभव फीड मुहैया करवाने को प्राथमिकता देगी और प्रदेशभर के सभी कार्यालय चौबीस घंटे खुले रखेगी। कार्यालयों से रिपोर्ट प्रतिदिन मुख्यालय तक पहुंचाई जाएगी और फिर उस पर मंथन उपरांत विचार विमर्श भाजपाई दिग्गजों की देखरेख में होगा। हरियाणा में भाजपा ने दूसरी पार खेलते हुए कमर कसते हुए नई रणनीति पर अमलीजामा पहनाये जाने की कवायद शुरू कर दी है।

दलित महापंचायत को लेकर दलित समाज उलझन में

3:55:00 PM
सिरसा(प्रैसवार्ता)। 26 नवंबर को संसदीय क्षेत्र सिरसा के शहर फतेहाबाद में होने वाली दलित महापंचायत को कामयाब बनाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के  समर्थक  मौजूदा, पूर्व सांसद व विधायकों के अतिरिक्त कांग्रेसी दिग्गजों ने मोर्चा संभाल लिया है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के मौजूदा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर से छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है। डॉ. तंवर दलित समुदाय से संबंधित होने के साथ साथ संसदीय क्षेत्र सिरसा का प्रतिनिधित्व भी कर चुके है और संसदीय क्षेत्र में प्रभावी रसूख रखते है। डॉ. तंवर की शीर्ष नेतृत्व कांग्रेस पर मजबूत पकड तथा प्रांतीय स्तर कांग्रेसीजनों की लंबी फौज से बेचैन भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तंवर को उनके क्षेत्र में ही चुनौती देने के लिए फतेहाबाद में दलित महापंचायत का आयोजन रखा है। इससे पूर्व भी भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने रानियां कस्बे में अपनी जनसभा रखी थी, मगर उसे रद्द कर दिया था। दलित दिग्गज डॉ. तंवर का राजनीतिक विरोध कमिश्नरी क्षेत्र हिसार में होने वाली दलित महापंचायत का आयोजन दलित वर्ग को रास नहीं आ रहा, जिस कारण क्षेेत्र के दलित समुदाय में इस दलित महापंचायत को लेकर हुड्डा समर्थकों में विशेष उत्साह नहीं देखा जा  रहा है। हुड्डा समर्थक कई कांग्रेसी दिग्गज भी इस महापंचायत को लेकर चुप्पी साधे हुए है। खुफिया सूत्रों की रिपोर्ट को देखते हुए भूपेंद्र हुड्डा ने प्रदेशभर से अपनी फौज को दलित महापंचायत की सफलता के लिए मोर्चा खोलने का फरमान सुना दिया है। हुड्डा समर्थक मौजूदा दलित विधायकों ने हिसार कमिश्नरी में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है और अपने स्तर पर दलित वर्ग से संपर्क बनाए हुए है। इन दलित नेताओं को उस समय गहरा राजनीतिक झटका लगता है, जब दलित वर्ग का शिक्षित तथा बुद्धिजीवी वर्ग डॉ. अशोक तंवर की अनदेखी के सवाल खडे कर देता है। दलित वर्ग की पंसदीदा बन चुके दलित दिग्गज डॉ. अशोक तंवर का राजनीतिक विरोध तथा भूपेंद्र हुड्डा समर्थकों द्वारा मारपीट का मामला संसदीय क्षेत्र सिरसा तथा हिसार में खूब उछल रहा है। दलित महापंचायत में दलित दिग्गज कांग्रेसी नेता की अनुपस्थिति और जाट वर्ग से संबंधित पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का मुख्यातिथि होने से दलित वर्ग एक उलझन में उलझ कर रह गया है, क्योंकि इस महापंचायत को दलित वर्ग सरकार विरोधी न होकर अशोक तंवर विरोधी मानकर चल रहा है। 26 नवंबर को दलित महापंचायत की कैसी तस्वीर रहेगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, मगर फिलहाल इस महापंचायत को लेकर दलित वर्ग में कोई उत्साह नहीं देखा जा रहा है।

हरियाणवी कांग्रेस के दिग्गजों द्वारा एक दूसरे के गढ़ में सेंधमारी के प्रयास

6:42:00 PM

दलित वोट बैंक के लिए पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा भरेंगे फतेहाबाद में हुंकार

4:15:00 PM
प्रैसवार्ता न्यूज: सिरसा, 04 नवंबर ।  हरियाणा में मौजूदा भाजपाई शासन में दलित वर्ग में बढ़ रहे उत्पीडऩ को राजनीतिक रंग देकर दलित वोट बैंक पर डोरे डालने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा 16 नवंबर को फतेहाबाद में दलित पंचायत के बैनर तले अपनी हुंकार भरेंगे, जिसके लिए कांग्रेसी जाट दिग्गज प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा तथा केवी सिंह ने सक्रियता बढ़ा दी है। राज्य में प्रदेश कांग्रेस की कमान दलित वर्ग से संंबंधित डॉ. अशोक तंवर के हाथ में है और भूपेंद्र सिंह हुड्डा से डॉ. तंवर के राजनीतिक मतभेद जग जाहिर है। भूपेंद्र हुड्डा से तंवर के छत्तीस के आंकड़े के चलते हुड्डा समर्थक तंवर पर आक्रमण करके उन्हें घायल भी कर चुके है। हुड्डा के फतेहाबाद में दर्शाये जाने वाले दलित प्रेम को लेकर तंवर के संसदीय क्षेत्र में होने वाले कार्यक्रम से दलित वर्ग अचम्भे में है। तंवर सिरसा संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भी कर चुके है और फतेहाबाद उनके संसदीय क्षेत्र में आता है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा फतेहाबाद में दलित पंचायत के माध्यम से अपने राजनीतिक विरोधी दलित वर्ग के अशोक तंवर को चुनौती देकर दलित प्रेम की परिभाषा पर सवालिया निशान लगा रहे है। प्रदेश में हुई कांग्रेस दुर्गति से कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व भूपेंद्र सिंह हुड्डा से खफा है, तो दूसरी तरफ हुड्डा का राजनीतिक परिवार भी तेजी से बिखर रहा है। अपने खिसकते जनाधार और आलाकमान की अनदेखी के चलते हुड्डा ने कई जनसभाओं द्वारा शक्ति प्रदर्शन, भाजपाई दिग्गजों से मंत्रणा कर राजनीतिक दवाब बनाने, अपने समर्थक विधायकों द्वारा पार्टी प्रधान बदलने को लेकर इस्तीफा देने की पैतरेंबाजी दिखाई,मगर शीर्ष नेतृत्व पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दिया। हुड्डा की राजनीतिक पैतरेंबाजी तथा तंवर का विरोध हुड्डा पर ही भारी पड़ता नजर आ रहा है, क्योंकि हुड्डा का हर राजनीतिक प्रयास असफल हो रहा है।
     दलित नेता एवं हरियाणवी कांग्रेस के मुखिया अशोक तंवर के संसदीय क्षेत्र सिरसा के फतेहाबाद में हुड्डा द्वारा दर्शाये जाने वाले दलित प्रेम क्या  रंग लाएगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, मगर इस कार्यक्रम की कमान जाट दिग्गज कांग्रेसियों के हाथ में होने से हुड्डा के दलित प्रेम पर प्रश्र चिह्न अंकित कर रही है।

महिला कांग्रेस के आरक्षण को लेकर हरियाणवी कांग्रेस में हडकंप

5:15:00 PM

आसान नहीं है हरियाणा में भाजपा की दूसरी पारी

2:26:00 PM
प्रैसवार्ता न्यूज: सिरसा, 23 अक्टूबर। ज्यों-ज्यों हरियाणा विधानसभा के चुनाव नजदीक आ रहे हैं, त्यों-त्यों कई मौजूदा भाजपाईयों की धड़कने बढ़ रही है। 90 विधानसभा वाली हरियाणा विधानसभा में भाजपा के 47 विधायक हैं, मगर इनमें से ज्यादातर विधायकों को अपने राजनीतिक भविष्य पर संकट के बादल मंडराते दिखाई देने लगे है। राज्य के दस संसदीय क्षेत्रों में से सात पर भाजपा का प्रतिनिधित्व है, जिनमें से फरीदाबाद संसदीय क्षेत्र को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में भाजपाई नाव हिचकोले खा रही है, क्योंकि इन क्षेत्रों के सांसदों को अपनी ही सरकार के प्रति नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कुरुक्षेत्र के सांसद रामकुमार सैनी के बगावती तेवर जगजाहिर है, तो भिवानी महेंद्रगढ़ के भाजपाई सांसद धर्मवीर प्रदेश की भाजपा सरकार से खफा है। करनाल संसदीय क्षेत्र से भाजपाई सांसद अश्विनी चौपड़ा के बागी तेवर तथा अंबाला के सांसद रतनलाल कटारिया की मतदाताओं तथा भाजपाई कार्यकर्ताओं से दूरी को भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता। हरियाणा के लगभग डेढ़ दर्जन भाजपा विधायक भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष अपना राजनीतिक दुखड़ा सुना चुके है। अपनों की नाराजगी से जूझ रहे भाजपाई विधायकों पर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख प्रकरण ने गहरी राजनीतिक चोट दी है। हरियाणा के करीब 20 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां डेरा प्रेमियों की निर्णायक भूमिका कही जा सकती है। पिछले विधानसभा चुनाव में डेरा प्रेमियों ने खुला समर्थन भाजपा को दिया था, मगर वर्तमान की तस्वीर बदली हुई है। डेरा प्रमुख को साध्वी यौन शोषण मामले में 20 वर्ष की सजा हो चुकी है, जबकि डेरा से जुड़े ज्यादातर लोगों पर पुलिसिया तंत्र की कार्रवाई की जा रही है। डेरा प्रेमियों की धरपकड़ का सिलसिला अभी तक थमा नहीं है। भाजपा के विधायकों द्वारा डेरा समर्थकों पर कार्रवाई को लेकर शीर्ष नेतृत्व के समक्ष नाराजगी का इजहार किया जा चुका है। प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक तस्वीर और खुफिया तंत्र के सर्वे से चिंतित भाजपा ने जिलास्तर पर कोर ग्रूप बनाने, पुराने तथा सक्रिय कार्यकर्ताओं को तव्वजों देने की रणनीति तैयार की है। जिलास्तर के कोर ग्रूप अपने जिला के राजनीतिक, सामाजिक, विकास व अन्य मुद्दों पर निर्णय लेने में सक्षम होंगे। मुख्यमंत्री हरियाणा कई बार सार्वजनिक तौर पर संकेत दे चुके है कि विधानसभा के चुनाव लोकसभा के साथ हो सकते है। भाजपा ने राज्य में किस-किस भाजपाई चेहरे के पास स्मार्टफोन है कि जानकारी एकत्रित कर रही है, ताकि सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र तथा प्रदेश सरकार की अधिकतम योजनाओं और विजन को उन तक पहुँचाया जा सके। सरकार की मिशन 2019 को लेकर किए जा रहे प्रयास सफल होते नजर नहीं आते, क्योंकि भाजपा में कांग्रेसी कलह से ज्यादा राजनीतिक कलह है, जिसके चलते हरियाणा में भाजपा की दूसरी पारी को आसान नहीं माना जा सकता।
 
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