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राहुल की ताजपोशी से दोहराया जा सकता है - कांग्रेसी इतिहास

 सिरसा ( प्रैसवार्ता )। पंडित जवाहर लाल नेहरू  के समय से शुरू हुए कांग्रेसी इतिहास को मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा भी दोहराये जाने की संभावना नजर आने लगी है । कांग्रेसी इतिहास के अनुसार पार्टी के मुखिया बदलने के साथ ही उसकी टीम को अलविदाई प्रमाण पत्र थमा दिया जाता रहा है। राहुल गांधी को लेकर भी क्यास लगाये जाने लगे हैं कि वह भी कांग्रेसी  इतिहास की पुरानी पंरपरा को बरकरार रखते  हुए अपनी टीम में नये चेहरों को तव्वजो देंगे । वर्तमान में राहुल के करीबी और विश्वासपात्रों में सिरसा से पूर्व सासंद अशोक तंवर, हरियाणा से कांग्रेस के इकलौते सासंद दीपेंदर हुड्डा, हरियाणा से कांग्रेसी विधायक रणदीप सुरजेवाला, पंजाब से कांग्रेसी विधायक अमरिंदर सिंह, राजस्थान से भंवर जितेद्र ,सचिन पा्यलट तथा हरीश चौधरी, महाराष्ट्र से राजीव सातव व मिलिंद देवडा, दिल्ली से अजय माकन, मध्य प्रदेश से ज्योतिरादित्य सिंधिंया व मीनाक्षी नटराजन, तामिलनाडू से माणिक टैगोर यू०पी से आर.पी.एन.सिह, जितेंद्र प्रसाद, असम से गौरव गोगाई के अतिरिक्त सोशल मीडिया हैड दिव्या स्पंदन, सुष्मिता देव तथा प्रियंका चतुर्वेदी इत्यादि राजनीतिक चेहरे हैं, जिन्हें राहुल गांधी के आतंरिक सर्कल का सदस्य कहा जा सकता है। कांग्रेसी इतिहास साक्षी है कि इंदिरा गांधी की टीम को राजीव गांधी के प्रधानमंत्री कार्याकाल में कोई तव्वजो नहीं मिली थी । धीरेंद्र ब्रहमचारी, आर.के.धवन, फखरूद्दीन अली अहमद, सतीश शर्मा, उमा शंकर दीक्षित जैसे राजसी दिग्गज हैं, जिनमें से कुछ का निधन हो चुका है, जबकि अन्य कांग्रेसी मानचित्र से गायब हैं। राहुल की टीम में हरियाणवी चौधर तो बन सकती है,मगर आपसी कलह से जूझ रही हरियाणवी कांग्रेस का चौधरी कौन बनेगा को लेकर क्यासों का दौर शुरु हो गया है ।

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