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हरियाणा में थम नहीं रहा कांग्रेसी बिखराव

सिरसा(प्रैसवार्ता)। लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव परिणाम कांग्रेस को आपसी कलह का प्रमाण दे चुके है, मगर कांग्रेस ने अभी तक इससे सबक नहीं सीखा है, जिस कारण कांग्रेस में बिखराव थमने का नाम नहीं ले रहा। कांग्रेस प्रधान अशोक तंवर और कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी की प्रदेशस्तरीय बैठकों में भारी हंगामे कुनबे को मजबूत करने की बजाए बिखराव की राह दिखा रहे है। राज्य में आज भी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थकों का आंकड़ा ज्यादा है, जिस हुड्डा कांग्रेस के नाम से जाना जाता है। हरियाणा में कांग्रेस के 15 विधायकों में से विधायक दल की नेता को छोड़कर 14 हुड्डा के साथ दिखाई दे रहे है। कांग्रेस की आपसी आंख मिचौली मनोहर लाल सरकार के लिए एक वरदान कही जा सकती है, क्योंकि कांग्रेसी विधायक जनता की आवाज बुलंद करने की बजाए टांग-खिंचाई को प्राथमिकता दे रहे है। कांग्रेसी बैठकों से कांग्रेसी दिग्गजों की दूरी संकेत देती है कि कांग्रेस बिखराव की तरफ बढ़ रही है। तंवर और किरण के निशान पर हुड्डा समर्थक है। राज्य में यूरिया खाद को लेकर किसान सड़कों पर है, कर्मचारी अपने हितों की अनदेखी के चलते विपक्ष की तरफ टकटकी लगाए हुए है। बिजली के दाम बढ़े या फिर डीजल पर वैट लगे, विपक्ष मतदाताओं द्वारा दिखाए गए राजनीतिक घाव पर मरहम लगा रहा है और प्रदेशवासी मजबूत विपक्ष होने के बावजूद भी स्वयं को विपक्षहीन मानकर चल रहे है। प्रमुख विपक्षी दल इनैलो को किसान हितैषी पार्टी माना जाता है, मगर संकट से जूझ रहे किसानों को लेकर इनैलो चुप्पी साधे हुए है, जबकि कांग्रेस को भीतरी कलह से फूर्सत नहीं है। कांग्रेस हाईकमान शायद अपने राजनीतिक मानचित्र से हरियाणा प्रदेश  को भूल चुका है, जिस कारण कांग्रेसी जन भी कांग्रेस को भूलने लग गए है। विधायक दल की नेता के साथ एक भी विधायक का न होना, हुड्डा समर्थकों को किनारे करने की तंवर व किरण चौधरी से कांग्रेस किस प्रकार संगठित होगी, राजनीतिक विशेषज्ञों की सोच  से परे है, मगर ऐसी जरूर संभावना है कि यदि आपसी कलह और बिखराव का सिलसिला यूं ही जारी रहा, तो प्रदेश में कांग्रेस के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा सकते है।

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