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जिन्हें अपनी दुकान बंद होने का डर है, वे ही कर रहे है एमएसजी का विरोध : बाबा राम रहीम

सिरसा(प्रैसवार्ता)। डेरा सच्चा सौदा में आयोजित जनकल्याण परमार्थी शिविर के दौरान डेरामुखी बाबा राम रहीम पत्रकारों से रूबरू हुए और कहा कि उनके द्वारा बनाई गई पहली फिल्म एमएसजी द मैसेंजर ऑफ गॉड फिल्म में जादू या पाखंड जैसा कुछ नहीं है। फिल्म रियल स्टोरी पर आधारित है लेकिन इसमें कुछ चीजें काल्पनिक भी हैं। पाखंड, ढोंग इत्यादि से तो वे स्वयं लोगों को रोकते हैं। बाबा राम रहीम ने कहा कि ट्रिब्युनल द्वारा एक लाईन व एक शब्द म्यूट किया गया है तथा इसके बाद फिल्म को रिलीज करने के आदेश दे दिए हैं। हालांकि अभी सर्टीफिकेट मिलने में देरी है। जिनकी दुकानें बंद हो रही हैं ड्रग माफिया या जो ऐसा मानते हैं कि इस फिल्म के द्वारा गुरु जी जो सच्चाई लेकर आ रहे हैं वो न लेकर आएं। उन्हें डर है कि कहीं लोग उनकी झूठी चीजें देखना ही न पसंद कर दें। गंदगी व नग्नता के द्वारा फिल्में सफल हों यह जरूरी नहीं है। बाबा राम रहीम ने कहा कि उनकी द्वारा बनाई गई फिल्म एमएसजी द मैसेंजर ऑफ गॉड ऐसी है जिसे एक पिता-पुत्री और पूरा परिवारएक साथ मिलकर देख सकता है। फिल्म का मुख्य संदेश है कि ड्रग या नशे को कैसे रोका जाए जो युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रहा है। फिल्म में नशे को बंद करने, वेश्यावृत्ति बंद करने, ब्लॅड डोनेशन, पेड़-पौधे लगाने जैसे 15 संदेश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि फिल्म में उन्होंने कर्मयोगी बनकर संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि फिल्म के प्रमोशन के दौरान वे जहां-जहां भी गए युवाओं में फिल्म को लेकर खासा जोश व उत्साह देखा गया। युवा उनके साथ फोटो खिंचवाते हैं तथा उन्हें सैल्यूट करते हैं और 'जियेंगे-मरेंगे देश के लिए' गीत गाते हैं। पूज्य गुरु जी ने बताया कि उनके प्रयास सार्थक हो रहे हैं तथा फिल्म को युवा पसंद कर रहे हैं। पूज्य गुरु जी ने बताया कि फिल्म का सबसे भावुक कर देने वाला दृश्य बेटी की विदाई का दृश्य है। 

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