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सीडीएलयू में हुआ दो दिवसीय सेमिनार

सिरसा (मनमोहित ग्रोवर)। जननायक चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के अंग्रेजी विभाग द्वारा विश्वविद्यालय सभागार में  मेजर पैराडिगमस इन इंग्लिश लिट्रेचर विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें 112 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और 88 लोगों ने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इस दो दिवसीय सेमिनार के समापन अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय की विजिटींग प्रो0 मार्गिट कोव् ने कहा कि साहित्य के माध्यम से मानवीय मूल्यों को विकसित करके बेहतर समाज का निर्माण किया जा सकता है। साहित्य संस्कृति का भी प्रचार प्रसार होता है एक अच्छा साहित्यकार प्रकृति व समाज से जुड़ा हुआ होता है। उन्होंने कहा कि लेखनी के अन्दर वो शक्ति होती है जो कि मुर्दे के अन्दर भी जान भरने की क्षमता होती है। साहित्यकार की कल्पना शक्ति भी इतनी जबरदस्त होती है कि भविष्य में समाज में हो रही विभिन्न प्रकार की घटनाओं व विकासात्मक गतिविधियों का पूर्वानुमान व पहले से ही लगा लेता है। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों के सामने वर्तमान में अनेक प्रकार की चुनौतियां हैं। उनकी सोच का दायरा अत्यंत विस्तृत होना चाहिए और इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उन द्वारा लिखा गया साहित्य समाजहित में किस प्रकार प्रयुक्त हो सकता है।  भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे समृद्ध संस्कृति है व अनेक राष्ट्रों द्वारा इसका अनुकरण किया जा रहा हैं। साहित्य की वजह से भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था भी सुदृढ हुई है और अनेेक प्रकार के राजनैतिक सिद्धांतों का उल्लेख भारतीय साहित्य में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। इस प्रकार के साहित्य को पढऩे के उपरान्त पाठ्क अपनी स्वयं की विचारधारा विकसित करके सही गलत का अन्दाजा अपने विवेक के आधार पर ले सकता है। इस प्रकार साहित्य के माध्यम से बुद्धीजीवियों का विकास होता है और समाज के अन्दर जागरूकता फैलने के साथ-साथ किसी भी राष्ट्र का विकास सुनिश्चित होता है। सेमीनार के दूसरे दिन कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रो0 रामनिवास ने तकनीकी सत्र की अध्यक्षता की ओर दिनबंद्धु छोटुराम विश्वविद्यालय की प्रो0 रेखा बेनिवाल ने आधुनिक साहित्य के ऊपर विस्तार पूर्वक शोधपत्र प्रस्तुत किया। इसी सेशन में हरियाणा के केन्द्रीय विश्वविद्यालय के प्रो0 बीरसिंह यादव ने भी अपने शोधपत्र के माध्यम से बताया कि किस प्रकार साहित्य की मदद से युवा पीढ़ी को अपनी प्रतिभा धरोवर की जानकारी मिलती है। इसके उपरान्त पंजाब विश्वविद्यालय के प्रो0 अनिल रेना ने साहित्य और सिनेमा के बारे में प्रतिभागियों को अवगत करवाया और बताया कि किस प्रकार अनेक फिल्म निदेशकों द्वारा अच्छी कहानियों को पर्दे पर दिखाकर दर्शकों को मंत्र मुग्ध किया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक फिल्म की कहानी का संबंध कहीं न कहीं साहित्य से होता है। इस सेमिनार की गतिविधियों की विस्तृत जानकारी देते हुए विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापिका डा0 दीप्ति धर्माणी ने बताया कि दो दिवसीय सेमीनार के मुख्य उद्देश्यों की जानकारी प्रो0 अनुशुक्ला ने दी। इसके उपरान्त उद्घाटन स्तर में मुख्यवक्ता के रूप में बोलते हुए कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रो0 भीमसिंह दहिया ने द्धितीय विश्व युद्ध के उपरान्त अग्रेजी साहित्य के विकास पर प्रकाश डाला। विश्वविद्यालय के कुलपति डा0 राधेश्याम शर्मा ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की थी। इस अवसर पर मंच का संचालन डा0 पंकज शर्मा ने किया और विभाग की प्रो0 अन्नु शुक्ला व डा0 उमेद सिंह नेे मेहमानों का धन्यवाद किया।(प्रैसवार्ता) 

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