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हरियाणा में राज्यसभा की एक सीट को लेकर मचा हुआ है घमासान

सिरसा(प्रैसवार्ता )। 11 जून को होने जा रहे हरियाणा की दो राज्यसभा सदस्यों के चुनाव को लेकर  राजनीतिक जोड़-घटा शुरू हो गया है। इसी के साथ क्यासों की बाढ़ आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने गेंद इनैलो के पक्ष में डालते हुए पेशकश की है कि यदि इनैलो किसी स्वतंत्र व्यक्ति पर सहमति बनाती है, तो कांग्रेस मदद करने को तैयार है। दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर इनैलो से किसी भी तरह के तालमेल का विरोध करते है। तंवर कहते है कि राज्यसभा की एक सीट के लिए कांग्रेस इनैलो का साथ नहीं देगी, बल्कि 2019 में होने वाले विधानसभा चुनाव को फोक्स बनाकर काम करेगी। भूपेंद्र हुड्डा की दलील है कि दोनो राज्यसभा सीटें भाजपा को नहीं मिलनी चाहिए, क्योंकि यदि ऐसा होता है तो कांग्रेस को नुकसान होगा। कांग्रेस के इस आपसी कलह को लेकर इनैलो ने अभी तक पत्ते नहीं खोले है। प्रदेश में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है कि भूपेंद्र हुड्डा का यह कार्ड इनैलो के तीखे तेवरों में बदलाव लाने के साथ साथ यह संकेत देता है कि हरियाणा के 14 विधायकों को साथ लेकर अलग अलग राजनीतिक दुकान खोल सकते है। दूसरी तरफ इनैलो किसी भी परिस्थिति में कांग्रेस की मदद से गुहार नहीं लगाएगी, क्योंकि इनैलो को पता है कि भूपेंद्र हुड्डा को कांग्रेस हाईकमान कितनी तव्वजों देता है। इनैलो शायद यहीं भी नहीं भूली होगी कि इनैलो सुप्रीमों ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला को जेल की सीखंचो के पीछे पहुंचाने में पर्दे के पीछे भूपेंद्र हुड्डा की क्या भूमिका रही होगी। हरियाणा में रेल मंत्री सुरेश प्रभु और ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंद्र सिंह का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो रहा है और विधायकों का गणित भाजपा को एक सीट यकीनी देता है जबकि दूसरी सीट के लिए भाजपा को इनैलो से मदद की जरूरत होगी। कांग्रेस व इनैलो यदि एक मंच पर आते है, जिसकी संभावना बहुत कम है, तो भाजपा से एक सीट छीन सकती है। यदि दोनो अलग-अलग उम्मीदवार उतारते है या चुनावी मैदान छोड़ते है, तो भाजपा फायदे में रहेगी।

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