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ट्रेजिडी किंग हो सकते है एक और ट्रेजिडी का शिकार

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणवी राजनीति में 'ट्रेजिडी किंगÓ के नाम  से प्रसिद्ध केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र सिंह डूमरखां निकट भविष्य में एक ओर ट्रेजडी का शिकार हो सकते है, ऐसी चर्चा राजनीतिक गलियारों में शुरू हो गई है। हरियाणा के मुख्यमंत्री पद की कुर्सी पर बैठने के लिए चार दशक से प्रयासरत् वीरेंद्र डूमरखां निरंतर राजनीतिक दुर्घटनाओं का शिकार होते रहे है। राजनीतिक झटकों से परेशान होकर वीरेंद्र डूमरखां ने कांग्रेस छोड़कर भगवा ध्वज उठा लिया और राज्यसभा सदस्य बनकर केंद्र में मंत्री बन गए है। वीरेंद्र सिंह का राज्यसभा कार्यकाल जुलाई मास में खत्म हो रहा है और वीरेंद्र सिंह को पुन: राज्यसभा में भिजवाना भाजपा के लिए आसान नहीं है, क्योंकि आरएसएस वीरेंद्र सिंह से खफा है। हरियाणा में कोई भी संसदीय उपचुनाव की संभावना नहीं है। बगैर लोकसभा या राज्यसभा सदस्य डूमरखां का मंत्री पद पर रहना मुश्किल हो जाएगा। अपने राजनीतिक भविष्य को देखते हुए वीरेंद्र सिंह का हरियाणवी राजनीति में वापिस आने के आसार बन गए है, क्योंकि उन्हें भाजपा रास नहीं आ रही है और न ही वीरेंद्र सिंह भाजपा व आरएसएस में विश्वास बनाने में कामयाब हो सके। भाजपा की सोच थी कि वह वीरेंद्र सिंह के माध्यम से जाट वोट बैंक में सेंधमारी कर सकेगी, मगर भाजपा की यह सोच सही नहीं निकली और उसने वीरेंद्र सिंह को दर किनार करने का फैसला ले लिया। इस संभावित फैसले की भनक ने डूमरखां की बैचेनी बढ़ा दी है। इसी के साथ वीरेंद्र डूमरखां के राजनीतिक भविष्य पर खतरे के बादल मंडराने लगे है। अपने चार दशक के राजनीतिक जीवन में डूमरखां ने बहुत उतार चढ़ाव देखे। इसलिए उन्हें ट्रेजिडी किंग कहा जाता है। वीरेंद्र सिंह का हरियाणा में जनाधार किसी ने छुपा नहीं हुआ है और वह अपने निजी विधानसभा क्षेत्र उचाना से हार चुके है। हरियाणवी राजनीति के जाट चेहरों में किसी के साथ भी वीरेंद्र सिंह के मधुर संबंध नहीं है, भले ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा हो या रणदीप सुरजेवाला, जयप्रकाश हो या रामपाल माजरा,चौटाला परिवार हो या सुभाष बराला, रघुवीर कादियान हो या आनंद सिंह डांगी, ओपी धनखड हो या सुरेंद्र बरवाला, कैप्टन अभिमन्यु हो या रण सिंह मान, सतबीर कादियान या रणजीत सिंह सभी वीरेंद्र सिंह के खिलाफ है। चालीस वर्ष तक कांग्रेसी डुगडुगी बजाने वाला भाजपा व आरएसएस की विचारधारा और सिद्धांतों पर खरा नहीं उतर सकता, यह एक कटु सत्य है। हरियाणा का मानचित्र जाट आरक्षण आंदोलन ने बिगाड़ दिया है और जाट बनाम गैर जाट का जहर पूरे प्रदेश में फैल चुका है। हरियाणा में गैर जाटों की सरकार को 'चौधरÓ जाट वर्ग का एक घडा बर्दाश्त नहीं कर रहा। जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर भी डूमरखां की बयानबाजी और संदिग्ध भूमिका से कई सवाल उठ रहे है। कांग्रेस के चार दशक तक डूमरखां को कोई तव्वजों नहीं दी, मगर डूमरखां भाजपा सरकार में केंद्रीय मंत्री बनेे है। यह केंद्रीय मंत्री पद पर भी ग्रहण लगता दिखाई दे रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार भाजपा डूमरखां को ऐसे राजनीतिक मोड़ पर लाकर छोड देगी, जहां आगे कुआं, पीछे खाई होगी। इसी के साथ ट्रेजिडी किंग हरियाणवी राजनीति के हाशिए पर चले जाएंगे, ऐसा राजनीतिक पंडि़तों का मानना है।

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