सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा की मौजूदा सरकार से खफा किसान सरकार द्वारा स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू न करने को लेकर आंदोलन छेडऩे की तैयारी में जुट रहे है। संभव है कि 15 अगस्त से शुरू होने वाला किसान आंदोलन भाजपा के गले की फांस बन सकता है। किसन संगठन तथा भारतीय किसान यूनियन प्रदेशस्तर पर अपनी गतिविधियां बढ़ाकर सरकार पर दवाब बनाना शुरू कर दिया है। भाजपा ने सत्ता प्राप्त करने के लिए किसानों के हित के बड़े बडे वायदे किए थे, जिसमें स्वामीनाथन आयोग रिपोर्ट भी शामिल थी। भाजपा के इन वायदों के चलते किसानों का रूझान अपनी तरफ कर लिया था। भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में स्वामीनाथन आयोग लागू करना शामिल था। चुनावी समर में भाजपा ने किसानों को विश्वास दिलाया था कि इसे घोषणा पत्र नहीं, संकल्प पत्र समझा जाए। कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने कांग्रेसी शासन में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करवाने के लिए साईकिल रैलियां निकालकर सभाएं की थी, जिससे प्रदेश के किसान भाजपा की तरफ आकर्षित हुए और उन्होंने भाजपा पर विश्वास करके सत्ता सौंप दी। भाजपाई शासन के दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने उपरांत भी स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू न करने से किसान स्वयं को ठगा हुआ महसूस करने लगा है और रिपोर्ट लागू करवाने के लिए आंदोलन की तैयारी में जुट गया है। किसानों की मांग की अनदेखी के चलते सरकारी रवैया जानने के लिए एक किसान ने आरटीआई का सहारा लिया, जिस पर केंद्र व राज्य सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने में बाजार की व्यवस्था बिगडऩे का हवाला करने में विवश्ता जाहिर की। भाजपाई शासन की स्पष्टता से किसानों में रोष की चिंगारी भड़कने लगी और वह भाजपा पर वादा खिलाफी का आरोप लगाकर संघर्ष करने की तैयारी करने लगे है। किसान भाजपा पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाकर सबक सिखाने के लिए एकजुट हो रहे है, जो भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है। कांग्रेस, इनैलो ने भी किसानों के साथ अपनी अपनी डुगडुगी बजानी शुरू कर दी है।
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स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट बढ़ा सकती है भाजपा की मुश्किलें
By Pressvarta • 4:30:00 PM • LatestNews NationalNews • Comments : 0
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