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कीचड के बीच से चल रही है किसानों को जिंदगी

जींद(प्रैसवार्ता)। कभी मौसम की मार, कभी गर्मी का सितम आखिर किसान क्या करें जिससे उनकी तकलीफ कुछ कम हो सके। हर बार किसान ही परेशानियों के बीच अपने को घिरे पाते है। हम बात कर रहे है घिमाना गांव के उन किसानों की जिनको अपने खेतों में काम करने के लिए हर रोज ऐसी परिस्थितियों के बीच से गुजरना पडता है। बारिश के कारण खेतों में जाने वाले किसान हर रोज कीचड के बीच से खेतों का सफर तय करते है। इस बीच कभी उनके बैलों की गाडी कीचड के बीच फंस जाती है तो कभी भैंसो का चारा। इतना सब होने के कारण भी उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकल पा रहा है। 
वर्षो पुरानी है रास्ते की समस्या, प्रशासन भी नहीं कर रहा है समाधान
गांव के राजन सैनी, बजे सिंह, गिरदाला, करतार सिंह, बादल, सुनहरा, रामफल, सतीश, मेहर सिंह, जगबीर, अनिल, रमलू, किताबो, सुनहरी, बीरो देवी, मीना, संतोष आदि ने बताया कि यह समस्या कोई नहीं है। काफी सालों से खेतों में जाने वाला रास्ता कच्चा होने के कारण उनकी समस्या बढा रहा है। थोडी की बारिश होने के बाद उनको कीचड के बीच से ही अपने काम के लिए खेतों में जाना पड रहा है। गांव के लोगों ने कहा कि इस समस्या को लेकर जिला प्रशासन और सरकार को इस बारे कई बार अवगत करवाया जा चुका है लेकिन कोई भी समाधान निकालना नहीं चाहता है।
पानी निकासी सबसे बडी समस्या
गांव में सबसे बडी समस्या पानी निकासी की है। निकासी नहीं होने के कारण पूरा गांव पानी से भरा हुआ है। पानी नहीं निकलने के कारण गांव में कई लोगों के घर हर वर्ष पानी में डूब जाते है।
नेताओं द्वारा सिर्फ अब तक मिले सिर्फ  आश्वासन
जब भी गांव में किसी पार्टी का नेता आता है तो वह इस रास्ते समाधान के लिए आश्वासन देकर चले जाते है। इस रास्ते को पक्का करने संबंधी कोई भी पहल अभी तक किसी भी सरकार द्वारा नहीं की गई है। 
गांव के विकास कार्यों को लेकर जिला प्रशासन को भेजा गया है एस्टीमेट
इस बारे जब गांव के सरपंच से बात की गई तो उनका कहना है कि उन्होंने गांव के चहुुमुखी विकास के लिए विभाग को एस्टीमेट भेजा गया है जिसमे गांव के जो भी कच्चे रास्ते खेतों की ओर जाते है उसमें उनका नाम शामिल है।

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