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| प्रैसवार्ता में पत्रकारों से रूबरू हुई अवंतिका तंवर |
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कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की पत्नी अवंतिका तंवर को मिली जान से मारने की धमकी
राहुल की ताजपोशी उपरांत बदलेगी हरियाणवी कांग्रेस की तस्वीर
सिरसा(प्रैसवार्ता)। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा तथा विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी को अर्श से फर्श पर लाने वाले कांग्रेसी विधायकों को हाईकमान की ओर से कोई तवज्जो न देने से उनकी विश्वसनीयता संदेह के घेरे में आ गई है। इससे उन्हें उम्मीद भी दिखाई नहीं देती कि राहुल गांधी की दिसंबर माह में होने वाली ताजपोशी से उन्हें कोई राजनीतिक फायदा होगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में लिए गए निर्णयानुसार कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी को किसी भी समय राष्ट्रीयाध्यक्ष बनाया जा सकता है और क्यास लगाए जा रहे है कि राहुल गांधी की ओर से पार्टी की कमान संभालते ही कई राज्यों में कांग्रेस संगठन में बदलाव किया जा सकता है, जिसमें हरियाणा प्रदेश भी शामिल है। संभावित फेरबदल को देखते हुए हरियाणवी कांग्रेस में हलचल शुरू हो गए हैं। वर्तमान में हरियाणा प्रदेश में कांग्रेस के साथ साथ समांतर कांग्रेस चल रही है। डॉ. अशोक तंवर हरियाणा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा समांतर कांग्रेस की कमान संभाले हुए है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा व डॉ. अशोक तंवर के राजनीतिक मतभेद जगजाहिर है। तंवर की प्रधानगी से हरियाणा में कांग्रेस को काफी मजबूती मिली है, दूसरी तरफ भूपेंद्र हुड्डा समर्थक कांग्रेस दिग्गज डॉ. तंवर की प्रधानगी को लेकर एक मुहिम चलाए हुए हैं और निरंतर तंवर की ओर से आयोजित जनसभाएं तथा बैठकों से दूरी बनानी जारी रखे हुए हैं। तंवर के नेतृत्व से खफा हुड्डा समर्थक हरसंभव प्रयास कर चुके हैं कि हरियाणवी कांग्रेस को तंवर मुक्त बनाया जाए, जबकि तंवर की कांग्रेस को समर्पित कार्यशैली से हरियाणा कांग्रेस फर्श से ऊपर उठ रही है। हुड्डा समर्थकों की ओर से तंवर को बदलने के लिए किए गए शक्ति प्रदर्शन और दवाब की राजनीति के चलते शीर्ष नेतृत्व ने तीन प्रभारी नियुक्त कर हरियाणवी कांग्रेस संबंधी जानकारी प्राप्त कर रिपोर्ट हासिल की, जिसमें तंवर की प्रधानगी को सही ठहराया गया। राहुल की ताजपोशी के बाद हरियाणवी कांग्रेस की तस्वीर कैसी रहेगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, मगर यदि समांतर कांग्रेस अपने मिशन में कामयाब हो जाती है, तो कांग्रेस की स्थिति वर्ष 2014 जैसी हो सकती है, ऐसा राजनीतिक पंडि़तों का मानना है।बाबा गुरमीत राम रहीम का ही कानून चलता था बाबा के साम्राज्य में
सिरसा(प्रैसवार्ता)। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सीबीआई अदालत की ओर से दंडित किए जाने तथा हाईकोर्ट की ओर से सर्च आप्रेशन की अनुमति दिए जाने के बाद नए नए मामले सामने आ रहे है, जिनसे संकेत मिलते है कि बाबा के साम्राज्य में भारतीय संविधान नहीं, बल्कि बाबा का अपना ही कानून चलता था। डेरा सच्चा सौदा के सर्च आपरेशन में पुरानी करंसी तथा बाबा की अपनी करंसी, वन्य प्राणी का मिलना तथा अंगदान सेवा को अंग मानव तस्करी से जोड़कर देखा जाने लगा है। कानूनी विशेषज्ञों की मानें, तो पुरानी करंसी मिलना एक अपराध है, जबकि अपनी करंसी चलाना भी अपराध की श्रेणी में आता है। इसी प्रकार डेरा परिसर में हिरण, मोर व बाध का मिलना भी वन्य प्राणी अधिनियम का उल्लंघन है, जिसमें 7 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। यह हाईकोर्ट पर निर्भर है कि वह कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट पर इन कानूनी उलझनों पर भी संज्ञान लिया जाए या नही। सर्च आप्रेशन के दौरान यह भी पता चला है कि अंगदान सेवा बड़े पैमाने पर होती रही है। डेरा प्रेमियों को यह कहकर अंगदान के लिए प्रेरित किया जाता था कि यदि मृत्यु उपरांत उनका शव जलाया गया, तो पेड़ काटने पड़ेंगे और फिर चिता की आग वायु को प्रदूषित करेगी। अस्थियां नहरों व नदियों में बहाने पर जल प्रदूषित होगा, जबकि अंगदान सेवा से किसी के जीवन को खुशहाली मिल सकती है। इस पर डेरा प्रेमी अंगदान सेवा का प्रोफार्मा भर देते थे और उनके मरणोपरांत अंग दूसरे प्रदेशों में मैडीकल कॉलेजों को भेजने की बात कही जाती थी, जबकि अब इसे मानव तस्करी के साथ जोड़कर देखा जाने लगा है। स्वास्थ्य मंत्री हरियाणा ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए है।हनीप्रीत से मिलने की राम रहीम की इच्छा पर लुकआऊट नोटिस का साया
सिरसा(प्रैसवार्ता)। साध्वी यौन शोषण में 20 वर्ष की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने जेल प्रशासन से हनीप्रीत से मिलने की गुहार लगाई है, जो कानूनी दायरे में उलझ कर रह गई है। जेल के नियमानुसार हनीप्रीत को गुरमीत राम रहीम से मिलने के लिए पंजीकृत गोदनामा व अदालती स्वीकृति दिखानी होगी। यदि हनीप्रीत इस नियम पर खरा उतर जाती है, तो उसके लिए लुकआऊट नोटिस उसे गिरफ्तार करवा सकता है। गिरफ्तारी से बचने के लिए हनीप्रीत राम रहीम की गुहार को तव्वजों नही देगी। इधर हनीप्रीत की गोद प्रक्रिया पर कानूनी सवाल उठ रहे है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार हिंदु एडापटन एंड मेंटेनेस एक्ट के सैक्शन 11 के भाग 3 व 4 स्पष्ट करते है कि गोद लेने वाले से गोद लिया जाने वाले की उम्र के बीच 21 वर्ष का अंतर होना जरूरी है, जबकि गुरमीत और हनीप्रीत की उम्र में 15 साल का ही अंतर हैं। सैक्शन 10 इसकी पुष्टि करता है कि 15 वर्ष तक के बच्चे को ही गोद लिया जा सकता है। आयु सीमा इसलिए निर्धारित की गई है, ताकि रिश्ते की पवित्रता बनी रहे और अभिभावकों द्वारा बच्चे के शारीरिक शोषण की गुजाईंश न रहे। इसी बीच डेरा सच्चा सौदा चेयरपर्सन विपासना इन्सां ने स्पष्ट कर दिया है कि 25 अगस्त के बाद हनीप्रीत का डेरा सच्चा सौदा से कोई तालुक्क नहीं है। सूत्रों की मानें, तो डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्होंने वर्ष 1990 में ही हनीप्रीत को गोद लिया था। हनीप्रीत की शादी डेरा सच्चा सौदा परिसर में डेरा नियमों के अनुसार हुई थी और हनीप्रीत का अपने पति विश्वास गुप्ता से तलाक अदालत बजरिये हुआ था। हनीप्रीत के पति रहे विश्वास गुप्ता ने डेरा प्रमुख व हनीप्रीत के बीच संबंधों पर तीखी टिप्पण्ी की थी। राम रहीम द्वारा हनीप्रीत से मिलने की गुहार पर साया मंडराता नजर आने लगा है, क्योंकि इस मुलाकात में कई कानूनी अड़चने व कानूनी भय आड़े आ रहे है।वोट राजनीति से दूर रहा है डेरा ब्यास
सिरसा(प्रैसवार्ता)। राधा स्वामी सत्संग ब्यास, जिसका एक डेरा सिरसा से करीब पांच किलोमीटर दूर ग्राम सिंकदरपुर में भी है, उत्तरी भारत के सबसे बड़े डेरों मे से एक है और इसका प्रसार विदेशों में भी हो चुका है। प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार राधा स्वामी सत्संग की शुरूआत 1891 में बाबा चरण सिंह के नेतृत्व में हुई थी, जो रुहानी पौधा बड़ा हो गया है। विश्वभर में इसकी शाखाएं फैल गई है। वर्तमान में डेरा प्रबंधन द्वारा पांच अस्पतालों में नि:शुल्क उपचार किया जाता है, जबकि लगभग 70 स्कूलों में शिक्षा दी जा रही है। डेरा ब्यास की एक विशेषता यह भी है कि इससे जुड़े श्रद्धालु जरुरतमंदों की मदद को तव्वजों देते है और किसी से किसी भी प्रकार की ज्यादती नहीं होने देते। केवल इतना ही नहीं, डेरा ब्यास में वोटों की राजनीति भी नहीं की जाती है, जबकि यहां राजसी दिग्गजों का जमावड़ा लगा रहता है। डेरा ब्यास की ओर से चुनावों के दौरान स्पष्ट कर दिया जाता है कि अपनी मर्जी से वोट डाले। हरियाणा तथा पडौसी प्रदेश पंजाब में कई ऐसे डेरे है, जिनमें काफी संख्या में श्रद्धालु है और राजसी दिग्गजों श्रद्धालुओं को प्रभावित करने के लिए डेरा प्रमुखों के समक्ष नतमस्तक भी होते देखे जा सकते है।गुरमीत राम रहीम ही रहेंगे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख: विपासना इन्सां
सिरसा(प्रैसवार्ता)। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बलात्कार जुर्म में 20 वर्ष की हुई कैद के बाद डेरा सच्चा सौदा के चीफ पद को लेकर जताई जा रही उत्तराधिकारी दावेदारी अटकलों पर विराम लग गया है। डेरा सच्चा सौदा की चेयरपर्सन विपासना इन्सां ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में स्पष्ट कर दिया है कि गुरमीत राम रहीम ही डेरा सच्चा सौदा प्रमुख रहेंगे। प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार गुरमीत राम रहीम रोहतक की सुनरिया जेल में बलात्कार जुर्म की सजा काट रहे है। 28 अगस्त को हुई सजा के बाद से ही डेरा सच्चा सौदा मे उत्तराधिकारी के लिए गुरमीत राम रहीम के पुत्र जसमीत इन्सां, डेरा चेयरपर्सन विपासना इन्सां व गुरमीत राम रहीम की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत का नाम चर्चाओं में रहा। चर्चा में तो यह भी आया कि जसमीत इन्सां को डेरा प्रमुख बना दिया गया है, लेकिन डेरा चेयरपर्सन विपासना इन्सां ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में इन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है और स्पष्ट तौर पर कहा है कि गुरमीत राम रहीम ही डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख रहेंगे।जेल में सजा काट रहा बाबा राम रहीम कहीं डुप्लीकेट तो नहीं!
सिरसा। बलात्कार के जुर्म में रोहतक जेल में सजा काट रहा शख्स डेरा सच्चा सौदा प्रमुख नहीं बल्कि उसका कोई डुप्लीकेट है। इसकी चर्चा चरम सीमा तक पहुंच चुकी है। सोशल मीडिया में किए जा रहे दावे पर सिरसा की जनता को भी ये भरोसा होने लगा है कि डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने प्लास्टिक सर्जरी के जरिए अपना डुप्लीकेट तैयार किया था, क्योंकि पूरी सरकार डेरा सच्चा सौदा प्रमुख के आगे नतमस्तक थी। सोशल मीडिया में हो रहे इस दावे को लेकर सिरसा में चर्चा का बाजार काफी गर्म हो चुका है। चाहे पान की दुकान हो या नाई की, गली हो या बाजार, सरकारी दफ्तर हो या गांव की चौपाल सब जगहों पर यही बातें हो रही कि जेल में बंद डेरा प्रमुख नकली है या असली। असली डेरा चीफ सरकार की मदद से कई दिनों पहले ही विदेश भाग गया। लोग 15 से 17 अगस्त तक डेरा में आयोजित कार्यक्रमों में खींची गई फोटो से जेल में बंद डेरा प्रमुख का मिलान करके शर्तें लगा रहे हैं कि जेल में डेरा प्रमुख का डुप्लीकेट सजा काट रहा है। सरकार के मंत्री जिस प्रकार इन कार्यक्रमों में डेरा प्रमुख के पैरों में गिरकर प्रणाम करते मीडिया चैनलों में दिखाए गए हैं। इससे लोगों को डेरा मुखी की पावर का अंदाजा लग गया। लोगों में चर्चा है कि डेरा सच्चा सौदा में डेरा ने मेदांता की तर्ज पर बड़ा अस्पताल खोल रखा था। विदेश से प्लास्टिक सर्जरी स्पेशलिस्ट डॉक्टर को बुलवाया गया हो और उसने डेरा के अस्पताल में ही डेरा प्रमुख के नजदीकी शख्स की प्लास्टिक सर्जरी करके उसे गुरमीत राम रहीम जैसा बना दिया हो। इस प्रकार की सर्जरी में कई महीने लगते हैं और डेरा के अंदर खुफिया तरीके से इस सर्जरी को किया जा सकता है, क्योंकि बिना डेरा प्रमुख के इशारे से डेरा सच्चा सौदा के अंदर परिंदा भी पर नहीं मार सकता था। डेरा प्रमुख को काफी समय पहले ही अपने ऊपर सीबीआई कोर्ट में चल रहे मामलों के संबंध में ये अंदाजा हो चुका था कि एक न एक दिन उसे जेल जाना पड़ सकता है। ऐसे में उसने बचने के लिए हर प्रकार से एडी चोटी का जोर रखा रहा था। ऐसी चर्चा है कि संभवत: इसलिए डेरा प्रमुख ने प्लास्टिक सर्जरी के जरिए अपना डुप्लीकेट तैयार किया हो। बता दें कि किसी भी शख्स को अदालत से सजा होती है तो उसे जेल ले जाने से पहले उसकी मेडिकल जांच करवाई जाती है। सीनियर पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मेडिकल जांच में केवल यह देखा जाता है कि दोषी के शरीर पर कोई चोट तो नहीं लगी हुई। शरीर पर किसी प्रकार का निशान है या नहीं। दोषी के फिंगर प्रिंट लेने के बाद उसे जेल में छोड़ा जाता है। पुलिस जेल प्रशासन को दोषी की मेडिकल रिपोर्ट सौंपती है। इसके बाद जेल प्रशासन मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दोषी चोट व निशान को कागजों में दर्ज कर लेता है। मेडिकल जांच में ऐसा कुछ नहीं देखा जाता कि जिस शख्स को सजा हुई है क्या वो वही असल शख्स है जिसने अपराध को अंजाम दिया। काबिलेगौर है कि17 अगस्त को डेरा सच्चा सौदा में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम का जन्म दिवस मनाया जा रहा था। इस कार्यक्रम में प्रदेश के शिक्षा मंत्री रामविलास शर्मा अतिथि के रूप में पहुंचे थे। शिक्षा मंत्री ने डेरा प्रमुख के पैरों में गिरकर प्रणाम करते 51 लाख रुपये डेरा को देने की घोषण किया। मीडिया कर्मियों ने डेरा मुखी और रामविलास शर्मा की फोटो अपने कैमरों में कैद की। इस तस्वीर में डेरा मुखी की दाड़ी के बाल और सिर के बाल ज्यादा बड़े नहीं दिख रहे, जबकि सात दिन बाद जब डेरा मुखी सीबीआई कोर्ट द्वारा दोषी करार दिया गया तब उनकी दाड़ी व बाल काफी लंबे दिख रहे हैं। सात दिनों में किसी भी शख्स के बाल इतनी जल्दी बढ़ नहीं सकते। इसको लेकर भी लोगों में काफी चर्चा हो रही है। वहीं शहरवासियों में चल रही चर्चा में लोगों ने ये बोलना शुरू कर दिया है कि सरकार की बातों पर भरोसा नहीं, इसलिए अदालत जेल में कैद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख का डीएनए टेस्ट करवाकर रिपोर्ट को सार्वजनिक करें, ताकि जनता को भरोसा हो सके कि जेल में कैद शख्स डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ही है।
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