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मनोहर लाल खट्टर होंगे हरियाणा के सीएम

चंडीगढ़(प्रैसवार्ता)। भाजपा ने बेहद चतुराई से विधानसभा चुनाव में गैर जाट कॉर्ड खेल दिया और जाट वोट बैंक को भी जोड़े रखा। यही कारण था कि किसी नेता को मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित किए बिना मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया गया। आज उनके नाम की औपचारिक घोषणा भी हो गई। एमएल खंट्टर को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है और उनके नाम सभी विधायकों ने सहमति जता दी है। अब वे हरियाणा के मुख्यमंत्री बनेंगे। इस बैठक में कैलास विजयवर्गीय, वेंकैया नायडू और दिनेश शर्मा मौजूद थे। पूरे चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने संदेश दिया कि सरकार बनने पर गैर जाट मुख्यमंत्री होगा, लेकिन वरिष्ठ नेताओं ने किसी भी मंच से यह जाहिर नहीं होने दिया। ऐसा होने पर दूसरे दलों को बड़ा मुद्दा हाथ लग जाता। मोदी मैजिक के सहारे चुनावी मैदान में उतरी भाजपा के रणनीतिकारों ने गैर जाट कार्ड खामोशी के साथ खेला। विपक्षी दल इस बात को समझ गए थे कि भाजपा किसी भी नेता को मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित नहीं कर रहे हैं और अंदरखाते मनोहर लाल खट्टर को सीएम के रूप में प्रोजेक्ट किया जा रहा है। ताकि जाटों में यह संकेत नहीं जाए कि भाजपा गैर जाट को मुख्यमंत्री बनाएगी। इस वजह से जाट वोट में बिखराव भी आया। खट्टर से कई हलकों में चुनाव प्रचार कराया गया। तभी यही संदेश गया कि वह गैर जाट मुख्यमंत्री बनाए जाएंगे। इससे गैर जाट सीएम की मुहिम से जुड़ने वाले पूरी तरह से भाजपा की ओर झुक गए। इसका सबसे ज्यादा असर अंबाला, कुरुक्षेत्र, पानीपत, यमुनानगर, करनाल व पंचकुला जिले की विधानसभा सीटों पर सबसे ज्यादा पड़ा। यही कारण रहा कि मोदी की लहर के साथ-साथ गैर जाट का खामोश कार्ड खूब चला और पार्टी ने इन जिलों में 21 सीट पर जीत दर्ज की। रणनीतिकारों की चालाकी यह भी रही कि यदि किसी भी गैर जाट को मुख्यमंत्री के रूप में घोषित किया जाता तो इसका नुकसान पार्टी को होता। लेकिन बिना नाम लिए सीएम के रूप में खट्टर को प्रचारित करने से जाट वोट भी पार्टी के साथ जुड़ा है।

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