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इनैलो के जनता परिवार में शामिल होने को लेकर चढ़ा सियासी पारा

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा के प्रमुख विपक्षी दल इनैलो द्वारा जनता परिवार में शामिल होने की घोषणा के साथ ही हरियाणवी राजनीति में भूचाल आ गया है, क्योंकि इनैलो की इस पैंतरेबाजी से हाशिए पर जा रही इनैलो की फौज को संजीवनी मिल सकती है। इनैलो सुप्रीमों ओम प्रकाश चौटाला तथा इनैलो के युवा कमांडर अजय चौटाला को दस-दस वर्ष की कैद होने उपरांत पार्टी की कमान अभय चौटाला के हाथ में आ गई थी, जो वर्तमान में हरियाणा विधानसभा में विपक्षी दल इनैलो के नेता है। इनैलो की इस घोषणा से सत्तारूढ़ भाजपा व कांग्रेस के कान खड़े हो गए है, जिन्हें उम्मीद थी कि इनैलो अब हाशिये की ओर बढ़ रही है। लोकसभा चुनाव में इनैलो को दस में से मात्र दो संसदीय क्षेत्र हिसार तथा सिरसा से ही विजयी परचम लहराने का मौका मिला, जबकि विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर हुई बगावत के चलते कई दिग्गजों ने पार्टी से अलविदाई ले ली और कई राजनीतिक चुप्पी साधे रहे। परिणामस्वरूप इनैलो विधायकों का आंकड़ा 31 से घटकर 20 पर ही सिमट कर रह गया और भाजपा स्पष्ट बहुमत लेकर सत्ता में आ गई। इनैलो के जनता दल में शामिल होने के पीछे एक सियासी चाल देखी जा रही है, क्योंकि इनैलो को हाशिये की तरफ बढ़ रही स्थिति व घट रहे जनाधार को रोकने के लिए यह खेल खेलना जरूरी हो गया था। ओम प्रकाश चौटाला तथा अजय चौटाला ने अपने शासनकाल में पार्टी को मजबूती देकर एक प्रभावी नेटवर्र्क तैयार किया था, मगर तीसरी बार भी सत्ता से दूर रहने के चलते संगठन गडबड़ा गया। गड़बड़ाते संगठन को पुन: वापिसी पर लाने के लिए इनैलो ने जनता परिवार में शामिल होने का पैंतरा फैंका है। दरअसल इनैलो जनता परिवार में लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल, जेडीयू के नीतिश कुमार, समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव सहित अन्य दलों के जनता परिवार में शामिल होने की संभावना को देखते हुए नए समीकरण तलाश करने की तैयारी में है। भाजपा को घेरने के लिए जनता  परिवार पूरे देश में भाजपा विरोधी दलों को एक मंच पर लाने में जुट गया है।  इनैलो के जनता परिवार में शामिल होने की घोषणा के साथ ही इनैलो विरोधी राजसी दिग्गज मैदान में उतर आए है। स्वास्थ्य मंत्री हरियाणा एवं भाजपाई दिग्गज अनिल विज का कहना है कि जनता परिवार में जनता द्वारा नकारे लोग शामिल हो रहे है, जिन्हें अब जनता मुंह नहीं लगाएगी, जबकि कांग्रेसी सांसद दीपेंद्र हुड्डा फरमाते है कि इनैलो का कोई जनाधार नहीं है, इसलिए इनैलो के किसी भी दल में शामिल होने का हरियाणवी राजनीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। राजनीति विशेषज्ञों की सोच है कि जनता परिवार में शामिल होने वाले प्रभावी दिग्गजों के प्रभाव का फायदा उठाने के लिए इनैलो ने यह चाल चली है। देश का राजनीतिक मानचित्र इस बात की गवाही देता है कि स्व. चौ. देवीलाल ने जनता दल के गठन में अहम् भूमिका निभाते हुए कई राज्यों के प्रभावशाली दिग्गजों को साथ मिलाकर केंद्र में सरकार बनाई थी, जिसके बाद में बिखराव आ गया है और जनता दल अलग-अलग सियासी दलों में बंट गया था। देवीलाल ने हरियाणा में इनैलो का गठन कर प्रदेश की राजनीति में अपना सिक्का जमाया था और उनके निधन उपरांत पार्टी की कमान ओम प्रकाश चौटाला के हाथ में चली गई थी, जिन्होंने संगठन को काफी मजबूती दी, मगर उन्हें दस वर्ष की कैद होने उपरांत इनैलो की कमान अभय चौटाला के हाथों में आ गई है और इसी के साथ इनैलो में बगावत ने जन्म ले लिया है, जिसकी बदौलत इनैलो की विधायक संख्या 31 से घटकर 20 रह गई है और जनाधार में काफी गिरावट आई है। इनैलो के जनता परिवार में शामिल होने की घोषणा से राज्य की राजनीति के समीकरणों में बदलाव आने के आसार बनने लगे है, क्योंकि इनैलो के इस पैंतरे से इनैलो में बगावत और बिखराव न केवल रूक पाएगा, बल्कि इनैलो को संजीवनी मिलेगी।

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