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बादल के क्षेत्र की लड़की बनी ग्राम चौटाला की चौधराईन

सिरसा(प्रैसवार्ता)। इनैलो के संस्थापक स्व. चौधरी देवीलाल, इनैलो सुप्रीमों ओम प्रकाश चौटाला के ग्राम चौटाला, जिसे राजनीतिज्ञों की नर्सरी भी कहा जाता है, में पहली बार महिला सरपंच बनी निर्मला देवी ने 4646 वोट लेकर अपनी विरोधी इनैलो समर्पित सावित्री को 2121 वोटों से पराजित किया है। सावित्री को 2525 वोट मिलें है। वोटों का आंकड़ा एक संयोग कहा जा सकता है। तीन बेटियों की मां अपनी धुन की पक्की बताई जाती है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के स्थायी विधानसभा क्षेत्र लंबी का इस लड़की का विवाह चौटाला निवासी रणजीत सिंह से हुआ था, जिसका दीपावली से कुछ दिन पूर्व निधन हो गया था। जीवनसाथी का साथ छूट जाने पर टूट चुकी निर्मला ने अपने पति की इच्छा पूरी करने के लिए चुनाव की राह पकड़  ली। दरअसल पंचायती चुनाव घोषित होने पर रणजीत सिंह ने निर्मला से मजाक में कहा था कि सरपंच बनना है, तो नामांकन पत्र भर दें और उसने अपना नामांकन पत्र भी दाखिल कर दिया था, मगर मामला अदालत में चला गया था, जिस कारण चुनाव लेट हो गए थे। निर्मला ने एक एक मतदाता तक पहुचंकर अपनी इच्छा व्यक्त की, तो मतदाताओं ने भी उन्हें विश्वास दिलाया और मतदाताओं के विश्वास ने निर्मला का हौंसला बढ़ाया। निर्मला सरपंच उस ग्राम से बन गई, जिसे इनैलो सुप्रीमों चौटाला के नाम से विश्व भर में जाना जाता है। निर्मला की इस विजयी पताका के पूरे हरियाणा व पंजाब में चर्चे है। काबिलेगौर है कि ग्राम चौटाला देश को एक उप प्रधानमंत्री, दो मुख्यमंत्री, पांच सांसद और तेरह विधायक दे चुका है। ऐसा कोई विधानसभा का कार्यकाल नहीं रहा, जहां चौटाला से कोई विधायक न पहुंचा हो। छोटी सरकार के चुनाव में सबकी नजरें चौटाला पर ही थी। चौटाला बादल की दोस्ती तो जग जाहिर है, मगर बादल के इस क्षेत्र की लड़की ने चौटाला के गढ़ में विजयी परचम लहराकर चौटाला समर्थित प्रत्याशी की चूलें हिला कर रख दी है।

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