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नोटबंदी: नरेंद्र मोदी ने एक तीर से साधे कई निशाने

सिरसा(प्रैसवार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी सर्जिकल स्ट्रोक से पाकिस्तान, पाक प्रयोजित उग्रवाद, कश्मीर में अलगाववाद, उग्रवाद, माओवाद व भ्रष्टाचारी चारो खाने चित्त हो गए है और उनकी फडफडाहट बढ़ गई है। पूरा देश उग्रवाद, अलगाववाद व माओवाद के साथ साथ भ्रष्ट तंत्र से परेशान था, मगर मोदी की नोटबंदी घोषणा से पूरे देश में खुशी का माहौल है। कालेधन के सौदागरों, रिश्वतखोर अफसरशाही, राजसी दिग्गजों और राजनीतिक दलों को गहरा झटका लगा है। मोदी के इस सर्जिकल स्ट्रोक से घायल राजसी दिग्गजों की बेचैनी बढ़ गई है, क्योंकि वह देश विरोधी शक्तियों को सरंक्षण देकर शासन की सीढ़ी चढ़ जाते थे। ज्यादातर राजसी दिग्गजों की फडफ़डाहट उन राज्यों में देखी जा रही है, जहां निकट भविष्य में चुनाव होने वाले है। कालाधन चुनावों में इस्तेमाल कर सत्ता तक पहुँचने का ख्वाब देखने वाले राजसी दिग्गजों के ख्वाब पर ग्रहण लग गया है। इतिहास साक्षी है कि पुराने राजा-महाराजाओं की रियासत स्व. इंद्रा गांधी ने खत्म कर दी थी, मगर पुत्र, पुत्री व रिश्तेदारों की सांसद व विधायक  बनने की राजसी दिग्गजों की परंपरा तेजी से बढऩे लगी और कार्यकर्ता दरी बिछाने व नारे लगाने तक ही सीमित होकर रह गए। चुनाव में विजयी परचम लहराने वाले व्यक्ति को कुबेर के खजानों की चाबी मिल जाती है और वह धन्ना रईसों की कतार में शामिल हो जाता है। विजयी प्रतिनिधि के पास काले धन की भरमार हो जाती है। प्रधानमंत्री के इस सर्जिकल स्ट्रोक से घायल राजसी दिग्गज फडफ़डा रहे है। सच्चा राष्ट्र भक्त   नोट बंदी के इस निर्णय को उचित मानकर चल रहा है। मोदी निकट भविष्य में देशहित के लिए क्या क्या योजनाओं को अमलीजामा पहनाते है, पर देश की नजरें लगी हुई है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
सोशल नेटवर्किंग साईट्स फेसबुक, ट्विटर व व्हाट्सएप्प पर इन दिनों बहस छिड़ी हुई है। नोटबंदी को लेकर तरह-तरह के सवाल-जवाबों से घिरी सोशल मीडिया पर भारत बंद चर्चा का मुद्दा बना हुआ है। नोटबंदी से असहमत लोग लोगों से 28 नवंबर को भारत बंद का आह्वान कर रहे है, जबकि मोदी के पक्षधर एवं नोट बंदी के निर्णय का स्वागत करने वाले लोग इसका मुंह तोड़ जवाब देने में लगे हुए है।

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