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राजनीतिक जादूगर राहुल सेतिया समर्थक शीला को मिली चौधर

सिरसा(प्रैसवार्ता)। भाजपाई दिग्गज प्रौ. गणेशी लाल, जगदीश चौपड़ा तथा राहुल सेतिया के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी सिरसा की चौधर (चेयरपर्सन, नगर परिषद) पर विजयी परचम लहराते हुए नाटकीय ढंग से राजनीतिक जादूगर राहुल सेतिया ने अपनों तथा विरोधियों को जोर का झटका धीरे से देते हुए आर्ईना दिखाया है। भाजपाई दिग्गजों की चौधर की जंग में विपक्षी पार्षद एक मंच पर एकत्रित हो गए, जिससे भाजपा में बेचैनी बढ़ गई। विरोधी पार्षदों की हलोपा की तरफ रीना सेठी को चेयरपर्सन तथा कांग्रेस के पार्षद रणधीर सिंह को उपाध्यक्ष बनाए जाने पर सहमति हुई थी, जबकि भाजपा की महिला पार्षद शीला सहगल चेयरपर्सन तथा इनैलो की ममता सैनी के वाईस चेयरमैन बनाया जाना था। भाजपा, इनैलो के वोट लेकर चेयरपर्सन बनाने में कामयाब हो गई, मगर इनैलो की ममता सैनी को बीच मंझदार छोड़कर विपक्ष के रणधीर सिंह को उपाध्यक्ष बनने का अवसर दे दिया। चेयरपर्सन को 33 में से 17 वोट मिले थे, जबकि ममता सैनी 15 क्रॉस वोटिंग के चलते ममता उपाध्यक्ष नहीं बन पाई। मात्र एक मात्र से जीत हासिल करने वाली शीला सहगल वार्ड नंबर 16 से पार्षद है और सर्वाधिक वोटों से विजयी हुई थी। सहगल परिवार राहुल सेतिया कट्टर समर्थक है, जबकि रणधीर सिंह को कांग्रेसी नेता नवीन केडिया समर्थक बताया जा रहा है। नाटकीय ढंग से हुए इस करिश्में से सिरसा की राजनीतिक तस्वीर में बदलाव आ गया है। राहुल सेतिया पूर्व मंत्री स्व. लछमण दास अरोड़ा के दामाद है। स्व. अरोड़ा की राजनीतिक वारिस सुनीता सेतिया ने विधानसभा चुनाव बतौर भाजपा प्रत्याशी सिरसा से लड़ा था, मगर जीत नहीं पाई थी। सिरसा की इस चौधर को भावी विधायिकी के रुप में देखा जाने लगा है। भाजपा खेमे से सुनीता सेतिया मजबूत दावेदार बनकर उभरी है, जबकि प्रो. गणेशी लाल को राष्ट्रीय स्तर का नेता माना जाता है। उन्हें किसी भी समय राष्ट्रीय स्तर की महत्त्वपूर्ण जिम्मेवारी मिल सकती है। जगदीश चौपड़ा भी चुनाव लडऩे वालों के दावेदारों में शामिल है और इससे पहले वह विधानसभा क्षेत्र से अपना चुनावी भाग्य अजमा चुके है। यह अलग बात है कि सफल नहीं हो पाए। चंद दिन पूर्व ही उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय से बदलकर पर्यटन निगम हरियाणा के चेयरमैन की कमान सौंपी गई है। इससे पूर्व चौपड़ा मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार होते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय में काफी दबदबा रखते थे। चौधर की इस जंग से सेतिया परिवार का राजनीतिक कद काफी बढ़ा है, ऐसा राजनीतिक पंडितों का मानना है। निकट भविष्य में राजनीतिक  जादूगर क्या करिश्मा दिखाएंगे, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

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