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मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की तर्ज पर अब गोपाल कांडा!

सिरसा(प्रैसवार्ता)।  क्या आम आदमी पार्टी (आप) सुप्रीमों अरविन्द केजरीवाल की तर्ज पर चलते हुए हरियाणा लोकहित पार्टी सुप्रीमों गोपाल कांडा हरियाणवी राजनीति का मानचित्र बदलने की तैयारी कर रहे है? ऐसी राजनीतिक क्षेत्रों में चर्चाएं चल रही है। केजरीवाल को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद पर सुशोभित करने के लिए वैश्य समाज के मतदाताओं ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी प्रकार गोपाल कांडा को हरियाणा के चार दर्जन से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों मे वैश्य समाज के मतदाताओं को चुनावी सहयोग की उम्मीद है, जबकि  करीब एक दर्जन विधानसभा क्षेत्रों में वैश्य समाज की निर्णायक भूमिका कही जा सकती है। हरियाणा के राजनीतिक इतिहास को देखने से पता चलता है कि करीब डेढ़ दर्जन वैश्य समाज से विधायक रहे है, जो अब कुशल नेतृत्व न मिलने के कारण निरंतर राजनीतिक रूप से पिछड़ रहे है। हरियाणा में वैसे तो कई राजनीतिक पार्टियां है, मगर मुख्य रूप से भाजपा के अतिरिक्त इनैलो, कांग्रेस व हलोपा है।
हलोपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में 73 प्रत्याशी चुनावी समर में उतारकर अपनी विशेष पहचान बनाते हुए उपस्थिति दर्ज करवाई थी। प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति में कांग्रेस को आपसी लट्ठ-लठ्ठ से फुर्सत नहीं, तो इनैलो का जनाधार भी कम हुआ है। सत्तारूढ़ भाजपा जनभावनाओं की उम्मीदों पर खरा उतरने में पूर्णतया असफल रही है। तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों के हिचकोले से चिंतित प्रदेशवासियों का फोक्स हरियाणा लोकहित पार्टी की तरफ देखा जाने लगा है। प्रदेशवासियों की राजनीतिक नब्ज पहचानते हुए कांग्रेस ने हलोपा सुप्रीमों गोपाल कांडा पर डोरे डालने शुरू कर दिए है, जिसकी मिसाल नगर परिषद सिरसा के चुनाव से मिलती है, जहां घोर राजनीतिक विरोधी रहे कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर व हलोपा सुप्रीमों गोपाल कांडा में प्रेम देखा गया। हरियाणा का वैश्य समाज भी अपना राजनीतिक वर्चस्व बहाल करने के लिए ऐसे दिग्गज की तलाश में है, जो उन्हें खोई हुई राजनीतिक शक्ति दिलवा सके। वैश्य समाज की सोच पर खरा उतरने में हलोपा सुप्रीमों गोपाल कांडा को सक्षम माना जा सकता है। 
प्रदेश में हरियाणा लोकहित पार्टी का गठन करके गोपाल कांडा ने राज्य के सभी वर्गों के बीच अपनी लोकप्रियता की एक विशेष छाप छोड़ी है, जिसे हलोपा अब भी कैश कर सकती है। राजनीतिक क्षेत्रों में यह चर्चा तेजी पकड़ रही है कि हलोपा भविष्य में होने वाले विधानसभा चुनाव  में प्रदेश को नई राजनीतिक दिशा देने में सक्षम है, ऐसी हरियाणवी मतदाताओं की सोच बनती जा रही है।

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