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भारत में सबसे सुरक्षित लैसिक की अभूतपूर्व शुरूआत: डॉ. आदित्य इन्सां

सिरसा(प्रैसवार्ता)। मानवता भलाई के कार्यों में एक विशेष पहचान बना चुका डेरा सच्चा सौदा सिरसा के गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम इन्सां के मार्गदर्शन में चल रहे शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल ने चिकित्सीय जगत में नए आयाम स्थापित किए है। बेहद लंबे रिसर्च के बाद अस्पताल के शोधकर्ताओं ने यूरोप के मुकाबले भारत में कई गुणा अधिक फैली आंखों की गंभीर बीमारी केरैटोकोनस का सिर्फ दो आधुनिकतम तकनीकों के माध्यम से सफल व सबसे सस्ता इलाज ढूंढ़ निकाला है जो कि मेडिकल जगत में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। इस सिलसिले में बुधवार की सुबह डेरा सच्चा सौदा स्थित फूड पार्टी रेस्टोरेंट में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ व पुतली रोगों के माहिर डॉ. आदित्य इन्सां व डॉ. मोनिका इन्सां ने कहा कि संत गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां की ओर से स्थापित उत्कृष्ट आई बैंक व उनके द्वारा  शोध के लिए दी गई सुविधाएं व निरंतर व्यक्तिगत मार्गदर्शन ही सफलता का कारण बना। संत डॉ. गुरमीत ने अपनी फिल्मों से अर्जित आय द्वारा अस्पताल में रिसर्च विभाग को स्थापित किया जिस वजह से उनकी टीम लक्ष्य बनाकर चलने में सफल रही। अलग-अलग शोध से यह निष्कर्ष निकल है कि भारत में विकसित देशों के मुकाबले पुतली में कमजोरी व केरैटोकोनस नामक रोग २० गुना से लेकर हजारों गुना तक ज्यादा पाई जाती है। लैसिक से पहले की जाने वाली जांचों में इन रोगों के लक्षण पूरी तरह से पकड़ में नहीं आते जिस वजह से ऐसे मरीजों का भी लैसिक द्वारा चश्मा उतारने का ऑप्रेशन हो जाता है जो कि लैसिक सर्जरी झेल नहीं पाते व उन्हें बाद में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। 

परफेक्ट तरीका अभी इजाद ही नहीं
पत्रकारों के साथ बातचीत में डॉ. आदित्य इन्सां ने कहा कि दरअसल आंख की पुतली की बायो मैकेनिकल क्षमता या ताकत को जांचने का कोई परफेक्ट तरीका अभी इजाद ही नहीं हुआ है। इस वजह से लैसिक सही होने के बावजूद किसी-किसी मरीज को दोबारा नंबर आने की या पुतली की चोंच बनना अर्थात केरैटोकोनस  होने का रिस्क रहता है। लेकिन हाई पॉवर क्रॉसलिंक के साथ अगर लैसिक किया जाए तो ये रिस्क न के बराबर हो जाता है। किसी भी तरह के बिगड़े हुए लैसिक या केरैटोकोनस के मरीज का शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल में नवीनतम विश्व स्तरीय तकनीक के साथ इलाज किया जाता है जिनमें से कुछ भारत में पहली बार लाए हैं। 

अब विश्व के चुनिंदा  देशों के बराबर पहुंचा भारत
डॉ. आदित्य इन्सां नेे कहा कि रिफरैक्टिव व टोरिक क्रॉसलिंकिंग के जरिए अब हाई सिलेंडर नंबर व शुरूआती केरैटोकोनस में बिना लेजर के नंबर कम किया जा सकता है। एंटीरियर लैमेलर केरेटोप्लास्टी नामक तकनीक द्वारा केरैटोकोनस रोगियों को कांटैक्ट लैंस से होने वाली मुश्किलों से छुटकारा दिलाया जा सकता है। कोर्निया में इनटैक्स व फेरारा नाम के महंगे प्लास्टिक उपकरण, महंगे कांटैक्ट लैंस और केरैटोकोनस रोग के लगातार बढऩे आदि सबसे बचा जा सकता है। इसमें खान-पान व जीवनशैली में बदलाव के साथ-साथ कुछ ऐसी तकनीकेंं  भी हैं जो कि यूरोप में सफलतापूर्वक इस्तेमाल की जा रही हैं लेकिन व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा के चलते उन तकनीकों की जानकारी रोगियों तक नहीं पहुंच रही है। नीदरलैंड में डॉ. मेलेस,जर्मनी में डॉ. क्रुमेक व ग्रीस के डॉ. केनैलोपोलस, इटली में डॉ. स्पाडिया आदि चंद ही डॉक्टर इन उत्कृष्ट तकनीकों में महारत हासिल कर पाए हैं। डॉ. आदित्य इन्सां ने कहा कि हम इसलिए कामयाब हुए क्योंकि हम इन सबकी तकनीकों का सम्मिश्रण करके आगे बढ रहे हैं। 

बहुत कम खर्च में विश्व स्तरीय इलाज
याद रहे कि शाह सतनाम जी स्पेशलिटी स्थित आई बैंक भारत के अग्रणी आई बैंकों में से एक है जहां पर हर साल हजारों पुतली रोगियों का इलाज  सफलतापूर्वक किया जाता है। इस पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने ऑप्रेशन की तकनीक व रोगियों के आंखों के चित्र भी मीडिया के साथ शेयर किए व बताया कि ये सारे विश्व स्तरीय इलाज शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल में अन्य जगह के मुकाबले बहुत कम खर्च में उपलब्ध हैं। 

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