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कांग्रेस मुक्त हरियाणा बनाने जा रहे है हरियाणवी कांग्रेस

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सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा की मौजूदा भाजपा सरकार प्रदेश को कांग्रेस मुक्त बनाने के लिए भले ही कोई प्रयास न करें, मगर फिर भी हरियाणा कांग्रेस मुक्त प्रदेश बनने की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। इसमें कांग्रेसी ही महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने तीन वर्ष पूर्व अशोक तंवर को कमान सौंपी थी, जिन्होंने अपने कार्यकाल में संगठन को मजबूती देने के हरसंभव प्रयास किए, मगर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा से राजनीतिक मतभेदों की बदौलत पार्टी का जनाधार तो बढऩा दूर की बात रही, बल्कि  कांग्रेस को एक ऐसे मोड़ पर आ गई, जिससे कांग्रेसीजन ही उलझ कर रह गए। प्रदेश का एक मात्र कांग्रेसी सांसद और 15 कांग्रेसी विधायकों में से 14 विधायक तंवर का नेतृत्व एक लंबे समय से ही स्वीकार नहीं कर रहे और अब उन्होंने तंवर की छुट्टी के लिए बकायदा चेतावनी तक दे डाली। वहीं हुड्डा समर्थकों की इस चेतावनी से तंवर समर्थक भड़क उठे है और उन्होंने प्रदेश में भूपेंद्र हुड्डा के पुतले जलाने का कार्यक्रम शुरू कर दिया है। पैराशूट से हरियाणवी राजनीति में उतरे अशोक तंवर के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से राजनीतिक मतभेद जग जाहिर है। इसी राजनीतिक आँख मिचौली के चलते कांग्रेस को लोकसभा, विधानसभा, स्थानीय निकाय तथा पंचायती चुनाव में करारी हार का मुँह देखना पड़ा। प्रदेश में भूपेंद्र हुड्डा को समांतर कांग्रेस में मौजूदा तथा पूर्व कांग्रेसी सांसदों, विधायकों की भारी फौज है और दो तिहाई युवा कांग्रेसी भी भूपेंद्र हुड्डा का समर्थन करते है। अपने दस वर्ष के मुख्यमंत्री कार्यकाल में हुड्डा ने अपनी अलग राजनैतिक फौज तैयार कर ली थी, जो तंवर के हर मंसूबे को विफल बनाने में सक्रिय रही। हुड्डा समर्थक मौजूदा करीब एक दर्जन विधायकों ने नेतृत्व परिवर्तन का मोर्चा खोलकर शीर्ष नेतृत्व को संकेत दे दिया है कि प्रदेश कांग्रेस मुक्त होने के कगार पर पहुँच गया है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर हरियाणवी कांग्रेस सांसद, विधायक, दिग्गज व पूर्व सांसदों-विधायकों का निरंतर दवाब बढ़ रहा है, जिसके चलते प्रदेश का कांग्रेसी चौधरी बदलना कांग्रेस हाईकमान के लिए एक विवशता नजर आने लगी हैं। भूपेंद्र हुड्डा की दवाब की राजनीति यदि सफल रहती है, तो हुड्डा समर्थक गीता भुक्कल की लॉटरी खुल सकती है, जो दलित समुदाय से ताल्लुक रखती है तथा झज्जर विधानसभा क्षेत्र से विधायक है। इधर तंवर समर्थकों ने हुड्डा के विरोध में मोर्चा खोलकर पार्टी हाईकमान पर दवाब बना शुरू कर दिया है कि तंवर को ही दूसरी बार प्रदेश की कमान सौंपी जाए। भूपेंद्र हुड्डा समर्थकों में सुशील शिन्दे की कमेटी की क्लीन चिट के बावजूद भूपेंद्र हुड्डा इत्यादि पर दिल्ली में एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकद्दमा दर्ज होने पर काफी नाराजगी है। यह मुकद्दमा अशोक तंवर की शिकायत पर अनुसूचित आयोग के निर्देश पर दर्ज हुआ है। भूपेंद्र हुड्डा और अशोक तंवर की राजनीतिक जंग पर यदि हाईकमान ने अंकुश न लगाया, तो हरियाणा के मानचित्र से कांग्रेस की तस्वीर धुंधली नजर आ सकती है।

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