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लोक निर्माण विभाग सिरसा की विजीलैंस जांच की सिफारिश

बड़े टैंडरों को छोटे टुकड़े में बदलने का मामला
सिरसा(प्रैसवार्ता)। नियमों तथा विभागीय गाईड लाईनों का दुरपयोग करके बजट के विकास कार्य अपने क्षेत्राधिकार में रखने के लिए छोटे-छोटे टुकड़े कर वर्क अलॉट अनिवार्य करना अधिकारियों पर भारी पड़ सकता है, क्योंकि पब्लिक एकाऊंट्स कमेटी हरियाणा के चेयरमैन एवं पंचकुला से विधायक ज्ञानचंद गुप्ता ने विजीलेंस जांच की सिफारिश कर दी है। लोक निर्माण विभाग हरियाणा के तकनीकी सलाहकार विशाल सेठ के अनुसार कुछ विभागीय अधिकारी अपने पद का दुरपयोग करके अपने चहेते ठेकेदार/एजेंसी को फायदा पहुँचाने के लिए पचास हजार रुपए से कम की राशि कोटेशन लगाकर वर्क अलाट कर देते है, जबकि आपात् अथवा विशेष परिस्थितियों में सक्षम अधिकारी से अनुमति लेकर एक दो मामलों में ऐसा किया जा सकता है। सिरसा स्थित मंडल प्रथम तथा द्वितीय में ऐसा गड़बड़ घोटाला लंबे समय से चल रहा है। प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेसी शासन दौरान वर्ष 2012-13 में लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों द्वारा 20 करोड़ रुपए के 56 कामों को 499 टुकड़ों में बांटकर फर्जीवाडा किया गया। हरियाणा सरकार द्वारा ई टैडरिंग लागू किया हुआ है, मगर भ्रष्ट तंत्र से इससे रास्ता निकालते हुए एक प्रोजेक्ट से संबंधित कामों के अलग अलग टैंडर लगाने शुरू कर दिए। नियमानुसार लोक निर्माण विभाग में एक्सीयन को 5 लाख रुपए, सुपरिटेंडिंग इंजीनियर को 25 लाख रुपए तथा मुख्य अभियंता को पांच करोड़ रुपए के कामों में टैंडर अपने स्तर पर करवाने का अधिकार है, जबकि इससे ज्यादा मामलों में टैंडर अलॉटमैंट कमेटी बनी हुई है। सामान्य तौर पर रिपलिटिंग ऑफ वक्र्स नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा करने के लिए अनुमति ली जानी जरूरी है। विभाग के प्रमुख अभियंता द्वारा 18 अगस्त 2015 को दिशा निर्देश जारी किए जा चुके है, जिसका सिरसा मंडल प्रथम तथा द्वितीय पर कोई असर नहीं देखा जा रहा। विभाग के एक सेवानिवृत्त अभियंता द्वारा मामला मुख्यमंत्री हरियाणा, लोक निर्माण मंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारियों के ध्यान में लाने पर विजीलेंस जांच की सिफारिश की गई है।

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