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अशोक तंवर को बहादुरी अवार्ड से छलका बीरेंद्र सिंह का राजनीतिक दर्द

Birender Singh
सिरसा(प्रैसवार्ता)। अपने राजनीतिक मतभेदों के चलते पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा से राजनीतिक पटकनी खाकर कांग्रेस से अलविदाई लेकर भाजपा में शामिल होने वाले केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह की स्पष्टवादिता से हरियाणवी राजनीति में कई चर्चाएं शुरू हो गई है। बीरेंद्र सिंह ने मौजूदा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर को बहादुरी अवार्ड देकर अपने राजनीतिक घाव को तरोताजा कर दिया, जो भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दिया है। भूपेंद्र हुड्डा और बीरेंद्र सिंह मामा-भुआ पुत्र भाई है, मगर राजनीति में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बीरेंद्र सिंह को जो राजनीतिक घाव दिए है, अभी भी ताजा देखे जा रहे है। रोहतक संसदीय क्षेत्र में तेजी से गिर रहे जनाधार को देखते हुए भूपेंद्र हुड्डा ने जाट लैंड जींद में दस्तक दी है, जहां वह 8 जुलाई को किसान महापंचायत करने जा रहे है। जींद और आसपास के जाट बाहुल्य क्षेत्रों में बीरेंद्र सिंह का काफी प्रभाव है,जिसमें भूपेंद्र सिंह हुड्डा सेंधमारी की योजना बनाए हुए है। कांग्रेस से अलविदाई के बाद जाटलैंड जींद में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की दस्तक ने बीरेंद्र सिंह की बैचेनी बढ़ा दी है और उन्हें अपना राजनीतिक भविष्य हिचकौले खाता दिखाई देने लगा है। तंवर को प्रमाण पत्र से स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेसी दिग्गजों को राजनीतिक पटकनी देकर कांग्रेस से अलविदाई की तस्वीर बनाने वाले भूपेंद्र सिंह हुड्डा तंवर की राजनीतिक पटकनी से घायल हो गए है, क्योंकि भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सभी प्रयास, शक्ति प्रदर्शन व नेतृत्व परिवर्तन को लेकर दी गई धमकी ने तंवर का बाल भी बांका नहीं किया। तंवर ने जिस प्रकार अपनी कार्यप्रणाली से हरियाणवी कांग्रेस को संजीवनी देकर शीर्ष नेतृत्व को आईना दिखाकर विश्वास दिलाया कि उनकी योग्यता और सक्षमता को कम नहीं आंका जाना चाहिए। बीरेंद्र सिंह ने बहादुरी का खिताब देकर अशोक तंवर के राजनीतिक भविष्य को उज्जवल होने का संकेत दिया है, जो वास्तव में ही कांग्रेसी ध्वज के नीचे कांग्रेसीजनों को एक मंच पर एकत्रित करने में सक्षम है। हरियाणवी कांग्रेस ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा की बदौलत स्वर्गीय भजनलाल पूर्व मुख्यमंत्री, राव इंद्रजीत व बीरेंद्र सिंह केंद्रीय मंत्री सहित कई कांग्रेसी दिग्गजों को कांग्रेस छोडऩे पर मजबूर होना पड़ा, जिस कारण लोकसभा व विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा। चार दशक तक कांग्रेसी ध्वज उठाने वाले बीरेंद्र सिंह जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक झटकों का सामना नहीं कर पाए, तो उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी, मगर डॉ. तंवर ने हरियाणवी कांग्रेस को ऐसी पहचान दी, कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेसी हाशिये पर चले गए। हुड्डा के पास कांग्रेसी दिग्गजों की तो भीड़ बहुत है, मगर इन दिग्गजों के पास भीड़ दिखाई नहीं देती, जिससे कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व वाकिफ हो चुका है। यहीं कारण है कि डॉ. तंवर की कुर्सी को हिलाने के लिए प्रयासरत् कांग्रेसी चेहरे स्वयं हिल रहे है। तंवर की योग्यता, सक्षमता पर बीरेंद्र सिंह का बहादुरी सम्मान पत्र हरियाणवी राजनीति में उथल-पुथल मचा सकता है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता।

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