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किसानों की आड़ में राजनीतिक ऑक्सीजन की तलाश में भूपेंद्र हुड्डा

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सिरसा(प्रैसवार्ता)।  हरियाणवी राजनीति में खिसकते अपने जनाधार को बरकरार रखने के लिए पूर्व सीएम हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू कराने की आड़ में किसान नेता बनने के लिए 8 जुलाई को जींद में किसान महापंचायत का बिगुल बजाकर अपने राजनीतिक भविष्य को राजनीतिक ऑक्सीजन देने का कार्ड खेला है। हुड्डा अपने महत्त्वाकांक्षा पर अमलीजामा पहनाए जाने के लिए अपने खेवनहारों के साथ मोर्चा खोलते हुए किसानों पर फोक्स बनाया है, क्योंकि मौजूदा प्रांतीय राजनीति में किसानों का नेतृत्व करने वाला कोई राजसी दिग्गज नहीं है। प्रदेश के किसानों में जाट समुदाय का बाहुल्य है और हुड्डा इससे पूर्व जाट समुदाय के नेतृत्व की कमान संभालने में विफल हो चुके है। किसानों की यह राजनीतिक सीढ़ी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक भविष्य को लेकर क्या दिशा देगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, मगर किसान महापंचायत को ऐतिहासिक बनाने के  लिए हुड्डा समर्थक दिग्गजों ने मोर्चा संभाल लिया है। अपने एक दशक के कार्यकाल में भूपेंद्र हुड्डा ने किसानों को क्या क्या सुविधाएं उपलब्ध करवाई, किसानों को याद है। मौजूदा भाजपाई शासन तथा अपनों से ही खा रहे राजनीतिक झटकों से बेचैन भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किसानों पर अपना फोक्स बनाकर प्रदेशभर में जनसभाएं करके उनकी नब्ज टटोलते हुए उन्हें 8 जुलाई को जींद में होने वाली किसान महापंचायत में बढ़चढ़कर भागीदारी करने की अपील की है। प्रदेश का ज्यादातर किसान इनैलो पक्षीय देखा जा सकता है। राजनीतिक गर्दिश से उभरने के लिए प्रयासरत् भूपेंद्र हुड्डा किसान महापंचायत के माध्यम से सफल होते है या नहीं। इस प्रश्न का उत्तर प्रश्र के गर्भ में है, मगर हुड्डा की फौज द्वारा खोले गए मोर्चे से भूपेंद्र हुड्डा को राजनीतिक संजीवनी मिल सकती है, ऐसा राजनीतिक विशेषज्ञों का अनुमान है। हुड्डा राज्य में समांतर कांग्रेस चला रहे है, ऐसी राजनीतिक परिस्थितियों में किसान महापंचायत की सफलता को हुड्डा समर्थकों ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है।

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