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किसान महापंचायत में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक तीर से किए कई निशाने, मगर सभी चूके

सिरसा(प्रैसवार्ता)। राजनीतिक परिवर्तन के लिए हरियाणवी राजनीति में विशेष पहचान रखने वाले बांगर धरती के जाट बाहुल्य क्षेत्र जींद में पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 8 जुलाई को किसान महापंचायत का आयोजन कर कई राजनीतिक तीर छोड़े, मगर निशाने पर कोई नहीं लगा। जींद जिला इनैलो के गढ़ के रूप में देखा जाता है, जबकि केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह का इस जाट लैंड में अच्छा प्रभाव है। हुड्डा की इस राजनीतिक पटकनी से घायल होकर बीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस छोड़कर भाजपाई ध्वज थामा था और इनैलो निरंतर भूपेंद्र सिंह हुड्डा के विरोध मेंं खडी देखी गई। भूपेंद्र हुड्डा ने जींद पर अपना फोक्स बनाकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के साथ साथ इनैलो तथा बीरेंद्र सिंह के समर्थकों के बीच सेंधमारी का प्रयास किसान महापंचायत के माध्यम से किया, लेकिन इस क्षेत्र में किसानों ने कोई विशेष रूचि नहीं दिखाई। प्रदेशभर से कुछ भीड़ जरूर जींद जुटी, जिन्हें भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कांग्रेसी दिग्गजों द्वारा लाया गया था। राजनीतिक क्षेत्रों में चर्चा है कि रोहतक संसदीय क्षेत्र में खिसकते जनाधार को लेकर चिंतित भूपेंद्र सिंह हुड्डा निकट भविष्य में सोनीपत संसदीय क्षेत्र में चुनावी समर में दस्तक दे सकते है। प्रदेश में समांतर कांग्रेस चला रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कांग्रेस के मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर से राजनीतिक मतभेद जग जाहिर है और तंवर की रोहतक संसदीय क्षेत्र में सक्रियता से भूपेंद्र हुड्डा काफी चिंतित देखे जा रहे है। सत्तारूढ़ भाजपाई शासन द्वारा भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ अनियमितताओं की पिटारी तथा अपनों के ही विरोध से जूझ रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किसानों के नाम पर राजनीतिक संजीवनी ढूंढने के लिए डुगडुगी बजाई थी, मगर जिसमें उनके राजनीतिक ख्वाब पूरे होते दिखाई नहीं देते।


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