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अस्तित्व बरकरार तथा डेरा प्रेमियों को जोड़ रखना एक चुनौती

सिरसा(प्रैसवार्ता)। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सीबीआई कोर्ट की ओर से यौन शोषण मामले में दोषी करार देने व 20 साल की सजा सुनाए जाने के बाद हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों में हुई हिंसा से अस्त व्यस्त जिंदगी अब धीरे धीरे पटरी पर आने लगी है। प्रदेश के राजसी दिग्गज और प्रदेशवासियों की नजरें इस बात पर फोक्स होकर रह गई है कि हर चुनाव में राजनीतिक समीकरणों को उल्ट पुल्ट करने का राग अलापने वाले डेरा सच्चा सौदा के राजनीतिक प्रकोष्ठ का क्या होगा? हरियाणवी राजनीति में गहरी रूचि रखने वाले राजनीतिक पंडि़तों के अनुसार डेरा सच्चा सौदा के समक्ष अचानक आए इस संकट के चलते सबसे बड़ी चुनौती डेरा की गद्दी के अगले उत्तराधिकारी की होगी, जिसे डेरा प्रबंधन व डेरा प्रेमी दिल से स्वीकार करें। मौजूदा परिस्थितियों में डेरा सच्चा सौदा का अस्तित्व बरकरार रखना व डेरा प्रेमियों को जोड़े रखना एक अग्रि परीक्षा से कम नहीं आंका जा सकता। डेरा सच्चा सौदा की गतिविधियां पहले की तरह कितने समय में सामान्य होगी, इस प्रश्र का उत्तर तो प्रश्र के गर्भ में है, मगर डेरा सच्चा सौदा के बड़े वोट बैंक को देखते हुए राजसी दिग्गजों ने इस प्रकरण पर टिप्पणी करने से स्वयं को दूर रखना शुरू कर दिया है।

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