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राम रहीम की फिल्म एमएसजी की रिलीज से नाराज सेंसर बोर्ड चीफ ने छोड़ी कुर्सी

सिरसा(प्रैसवार्ता)। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम की फिल्म एमएसजी को फिल्म प्रमाणन अपीलीय न्यायाधिकरण यानी एफसीएटी द्वारा हरी झंडी मिलने के बाद सेंसर बोर्ड की अध्यक्षा लीला सैमसन ने इस्तीफा दे दिया है। सैमसन ने कहा है कि सेंसर बोर्ड की ओर से लिखित तौर पर इस फिल्म को रिलीज करने की अनुमति अभी तक नहीं दी गई है। प्रैसवार्ता को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अभी यह साफ नहीं है कि फिल्म सिनेमाघरों में कब रिलीज होगी। इस फिल्म को 16 जनवरी को कई सिनेमाघरों में रिलीज करने की तैयारी थी। इस फिल्म में राम रहीम को भगवान के तौर पर पेश किया गया है और इसी को लेकर सेंसर बोर्ड ने आपत्ति जाहिर की थी। सैमसन से जब यह पूछा गया कि क्या उन्हें मीडिया में आई उन ख़बरों की जानकारी है, जिनमें बताया जा रहा है कि फिल्म को प्रदर्शन के लिए मंजूरी दी जा चुकी है, सैमसन ने कहा कि उन्हें इन बातों की जानकारी तो है, लेकिन अब तक लिखित में कोई बात सामने नहीं आई है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने निर्णय के बारे में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को बता दिया है।  बता दें कि सेंसर बोर्ड ने 'मैसेंजर आफ गॉडÓ को रिलीज किए जाने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद राम रहीम की फिल्म को फिल्म सर्टिफिकेशन अपीलीय ट्रिब्यूनल (एफसीएटी) के पास क्लियरेंस के लिए भेज दिया गया। जहां इसे कुछ कट के साथ रिलीज की अनुमति मिल गई। ट्रिब्यूनल के सदस्य हरीश मल्होत्रा के मुताबिक, ट्रिब्यूनल को दो शब्दों को लेकर आपत्ति है, वे शब्द हटा दिए जाएंगे। माना जा रहा है कि सैमसन इन्हीं बातों से नाराज हैं। फिल्म को रिलीज की अनुमति मिलने पर सैमसन ने कहा कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन का मजाक उड़ाया गया है।  लीला सैमसन ने इस्तीफे के बारे में बताते हुए अपने कामकाज में दखल और भ्रष्टाचार की बातें कही हैं। माना जा रहा है कि उनका इशारा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जुड़े अफसरों की तरफ है। लीला के अनुसार, उन्हें एक ऐसे संगठन का मैनेजमेंट करना पड़ा है जिसके बोर्ड की नौ महीने से ज्यादा समय से बैठक नहीं हुई, क्योंकि मंत्रालय के पास सदस्यों की बैठक को अनुमति देने के लिए फंड नहीं है। उन्होंने कहा कि सेंसर बोर्ड के सभी सदस्यों और अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन नई सरकार ने नया बोर्ड और अध्यक्ष नियुक्त नहीं किया है। सेंसर बोर्ड की एक अन्य सदस्य नंदिनी सरदेसाई ने भी लीला सैमसन के उन आरोपों का समर्थन किया, जिनमें सैमसन ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का नाम लिए बिना इशारों में उससे जुड़े अफसरों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। सरदेसाई ने कहा कि हम सबने फिल्म देखी। हम सभी का सामूहिक फैसला था कि फिल्म जनता के देखने लायक नहीं है। आम तौर पर ट्रिब्यूनल 15 से 30 दिन में फिल्म की रिलीज पर फैसला लेता है, लेकिन एमएसजी को 24 घंटे में अनुमति मिल गई।

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