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भूपेंद्र हुड्डा बना सकते है नया राजनीतिक दल, गोपाल कांडा भी है संपर्क में

सिरसा(प्रैसवार्ता)।  कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की निरंतर अनदेखी से खफा पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा नया राजनीतिक दल बनाने की तैयारी करते नजर आ रहे है और चर्चा है कि उनकी टीम पूर्व गृह राज्यमंत्री गोपाल कांडा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा तथा पूर्व सांसद सुशील इंदौरा से संपर्क बना रही है। भूपेंद्र हुड्डा विरोधी की सक्रियता के चलते न सिर्फ भूपेंद्र हुड्डा कांग्रेस की किचन कैबिनेट से दूर हो चुके है, बल्कि निरंतर राजनीतिक हाशिए की ओर बढ़ रहे है। भूपेंद्र हुड्डा के गढ़ कहे जाने वाले रोहतक तथा झज्जर में उनके गिरते ग्राफ और अपनों की अलविदाई से चिंतित पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा ने प्रदेशवासियों की नब्ज भी टिटोलनी के साथ साथ एक विशेष वर्ग का चौधरी बनने के लिए जींद से अपनी डुगडुगी बजाई, जिसे बैक गेयर लग गया था। अपनों की अनदेखी तथा बेगानों के ताबडतोड़ प्रहारों की चपेट में उलझ कर रह गए भूपेंद्र हुड्डा के पास अपनी नई राजनीतिक दुकान खोलने के अतिरिक्त कोई चारा शेष नहीं बचा  है और उन पर उनके समर्थकों का भी दवाब बढ़  रहा है कि वह कांग्रेसी घुटन से मुक्ति प्राप्त कर लें, क्योंकि उन्हें भी हुड्डा के साथ कांग्रेसी घुटन बर्दाश्त करनी पड़ रही है। अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में भूपेंद्र हुड्डा ने  सोनियां गांधी तथा राहुल गांधी के करीबी होने का फायदा उठाकर कई कांग्रेसी दिग्गजों को पार्टी छोडऩे पर मजबूर कर किया, जिसका खामियाजा कांग्रेस को लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ा। भूपेंद्र हुड्डा की कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को की गई शिकायत शिकायतकर्ता पर ही भारी पड़ी। सत्ता से वंचित होते हुए भूपेंद्र हुड्डा की राजनीतिक गिनती उल्टी शुरू हो गई। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ट्यून बदल गई और उसे कांग्रेस सुप्रीमों तथा जुनियर सुप्रीमों से मिलने तक का समय नहीं मिला। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि प्रदेश में हुई कांग्रेसी दुर्गति का जिन्न भूपेंद्र हुड्डा का पीछा नहीं छोड़ रहा। अपने निरंतर राजनीतिक हिचकौले खा रहे राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित भूपेंद्र सिंह हुड्डा को उस समय गहरी राजनीतिक चोट लगी, जब उनके राजनीतिक सलाहकार प्रो. वीरेंद्र सिंह पर जाट आंदोलन को भड़काने का आरोप लग गया और प्रशासन ने उसके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज कर गिरफ्तारी के वारंट हासिल कर लिए। प्रो. वीरेंद्र सिंह का इस संबंध में ऑडियो वायरल होते  ही कांग्रेस प्रधान अशोक तंवर ने उसे नोटिस जारी कर दिया। राजनीतिक जख्म सहरा रहे भूपेंद्र हुड्डा को उम्मीद थी कि जाट आरक्षण आंदोलन में हुए हिसंक प्रदर्शन को लेकर जंतर-मंतर पर धरने पर बैठने से उसे राहुल गांधी का भी सहयोग मिल सकता है, मगर ऐसा नहीं हुआ। सूत्रों के मुताबिक पूर्व मंत्री हरियाणा रणदीप सिंह सुरजेवाला को कांग्रेस का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाए जाने से भूपेंद्र हुड्डा की राहुल गांधी से दूरी निरंतर बढ़ती रही। राहुल गांधी के विश्वास मात्र अशोक तंवर का पहले ही भूपेंद्र हुड्डा से छत्तीस का आंकड़ा है। तंवर और सुरजेवाला को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व द्वारा दी जा रही तव्वजों को भूपेंद्र हुड्डा खेमा एक संभावित राजनीतिक मानकर चल रहा है। दरअसल भूपेंद्र हुड्डा अपने राजनीतिक वारिस के रूप में अपने सांसद पुत्र दीपेंद्र हुड्डा को हरियाणवी राजनीति में उभारना चाहते है, मगर सुरजेवाला व तंवर की बढ़ती लोकप्रियता भुपेंद्र हुड्डा के स्वपनों पर ग्रहण लगाए हुए है। कांग्रेस में भूपेंद्र हुड्डा का राजनीतिक भविष्य काफी धुंधला नजर आने लगा है, जिससे भूपेंद्र हुड्डा वाकिफ है। भूपेंद्र हुड्डा ने स्वयं कांग्रेस में रहने का फैसला लेकर अपने समर्थकों को नई राजनीतिक पार्टी की तैयारी करने का संकेत दिया है और प्रदेश के राजनीतिक मानचित्र पर किसी भी समय एक नई राजनीतिक दुकान दिखाई दे सकती है।

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