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12 जून को सिरसा में दहाडेंगे भूपेंद्र सिंह हुड्डा

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा मौजूदा खट्टर सरकार के खिलाफ 12 जून में मोर्चा खोलने की शुरूआत करने जा रहे है। भूपेंद्र हुड्डा द्वारा इस अवसर पर आयोजित सम्मेलन को सफल बनाने के लिए पूर्व सांसद रणजीत सिंह, पूर्व विधायक भरत सिंह तथा डॉ. के.वी सिंह ने संयुक्त रूप से कमान संभाल ली है। डॉ. सिंह ने कई बार विधानसभा चुनाव में अपना राजनीतिक भाग्य अजमाया है, मगर सफल नहीं हुए। रणजीत सिंह विधानसभा क्षेत्र रानियां से चुनाव लड़ चुके है, वहीं भरत सिंह बैनीवाल दड़बा कलां ऐलनाबाद से विधायक रह चुके है। इन तीनों दिग्गजों का अपने अपने विधानसभा क्षेत्र में अच्छी पहचान व प्रभाव है, जो भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यक्रम को सहायक सिद्ध कर सकते है। भूपेंद्र हुड्डा ने सरकार विरोधी मोर्च की शुरूआत सिरसा से ही क्यों शुरू करने का निर्णय लिया है, को लेकर क्यासों का दौर शुरू हो चुका है। संसदीय क्षेत्र सिरसा से मौजूदा राज्यसभा सदस्या सुश्री शैलजा व हरियाणा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर सांसद रह चुके है, जिनके भूपेंद्र हुड्डा से राजनीतिक मतभेद जगजाहिर है। इनैलो के गढ़ कहे जाने वाले संसदीय क्षेत्र सिरसा से इनैलो के चरणजीत सिंह रोड़ी सांसद है और इस संसदीय क्षेत्र में 8 पर इनैलो का कब्जा है। इनैलो लगातार भूपेंद्र हुड्डा पर तीखे प्रहार कर रही है, हालांकि हुड्डा ने इनैलो को राज्यसभा सीट के लिए मदद का भी दाव खेला था, जिसे इनैलो नेता अभय चौटाला ने बैक टू पैवेलियन कर दिया था।  तंवर, सुश्री शैलजा तथा इनैलो के राजनीतिक प्रहारों से खफा भूपेंद्र हुड्डा ने सरकार के खिलाफ मोर्चे को लेकर सिरसा का चयन किया है। सूत्रों की मानें, तो भूपेंद्र हुड्डा अपनी राजनीतिक जमीन की तलाश में जुट गए है, ताकि अपनों, विपक्ष तथा सरकार के राजनीतिक प्रहारों का सामना करने की रणनीति बनाई जा सके। जिला सिरसा में अशोक तंवर, सुश्री शैलजा, कुलदीप बिश्रोई का राजनीतिक प्रभाव काफी अच्छा है। देखना तो यह रहेगा कि भूपेंद्र हुड्डा अपनी सिरसा से सरकार विरोधी शुरूआत में कितने सफल हो पाते है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सफलता रणजीत सिंह, केवी सिंह व भरत सिंह बैनीवाल पर निर्भर है। सिरसा में होने वाले भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यक्रम को लेकर ज्यादातर कांग्रेसी जन सकते में है, जिन्हें अशोक तंवर या सुश्री शैलजा का समर्थक माना जाता है। भूपेंद्र हुड्डा ने सिरसा से सरकार विरोधी मोर्चे की शुरूआत से लेकर एक तीर से कई निशाने लगाने की योजना बनाई है। भूपेंद्र हुड्डा के इस राजनीतिक तीर से सरकार घायल हो या नहीं, मगर अशोक तंवर, सुश्री शैलजा व समर्थकों के साथ साथ इनैलो के सैनिक भी घायल हो सकते है, की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। काबिलेगौर है कि भाजपा की सरकार ने भूपेंद्र हुड्डा पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए कई मामलों की जांच शुरू करवा रखी है, तो दूसरी ओर कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व भी हुड्डा को कोई तव्वजों नहीं दे रहा। प्रमुख विपक्षी दल इनैलो ने हुड्डा पर ताबड़तोड़ प्रहार शुरू कर रखें है। ऐसी राजनीतिक परिस्थिति में भूपेंद्र हुड्डा का अपनों, इनैलो तथा भाजपाई शासन का सामना करना एक चुनौती मानी जा सकती है।

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