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हरियाणवी राजनीति को जातीय रंग में रंगने के प्रयास शुरू

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सिरसा(प्रैसवार्ता)। जाट बनाम गैर जाट की राजनीति की चपेट में आई हरियाणवी राजनीति को जातीय रंग में रंगने के प्रयास शुरू हो गए है। भाजपाई सांसद राजकुमार सैनी स्वयं को पिछड़ा वर्ग का तथा कांग्रेस के मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर दलित समाज का चौधरी बनने का स्वपन बनाए हुए है। इससे पूर्व हरियाणवी राजनीति में जातीय रंगत चुनावी समर में उतरे जन प्रतिनिधियों पर ही सवार रहती थी, मगर अब लगभग सभी वर्गों में अपना अपना राजनीतिक मंच तैयार करने की होड़ लग गई है। पंजाबी समुदाय हो वैश्य समाज हो, पिछड़ा वर्ग हो दलित वर्ग, जाट समुदाय हो या गुर्जर समाज, सभी में राजनीतिक जागरूकता बढ़ी है। इसी प्रकार प्रदेश की महिलाओं का भी राजनीति में तीव्र गति से रूझान बढ़ता देखा जा सकता है, मगर इस रूझान में फिलहाल जातीय रंगत की छाया नहीं पड़ी है। हरियाणा का मुख्यमंत्री पंजाबी समुदाय से हैं, मगर इस समाज के लोगों की नाराजगी स्पष्ट देखी जा सकती है, जबकि वैश्य समाज में नेतृत्व की जंग चल रही है। हरियाणा गठन उपरांत करीब एक दर्जन क्षेत्रीय दल प्रदेश में बने, मगर इनैलो को छोड़कर किसी ने भी पूरे प्रदेश में उपस्थिति दर्ज नहीं करवाई। इनैलो सुप्रीमों एवं पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के हाथ में इनैलो कमान आते ही हरियाणवी राजनीति की दिशा और दशा बदल गई, क्योंकि इनैलो ने प्रदेश में पंजाबी सम्मेलन, अग्रवाल सम्मेलन, धानक सम्मेलन, बाल्मीकि सम्मेलन, सैनी सम्मेलन, कुम्हार सम्मेलन, गुर्जर सम्मेलन, बाजीगर-बंजारा इत्यादि लगभग सभी वर्गों को सम्मेलनों के माध्यम से इनैलो के ध्वज के नीचे एकत्रित करने का सफल प्रयास किया। शायद यहीं कारण होगा कि इनैलो में सभी वर्गों के राजसी दिग्गजों का जमावड़ा हैं। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजन लाल अपने बिश्नोई समुदाय पर इस कद्र मेहरबान रहे कि अन्य राज्यों से भी बिश्रोई समुदाय को हरियाणा सरकार की सरकारी नियुक्तियों में तव्वजों दी। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बंसीलाल एक प्रशासक के रूप में विशेष पहचान छोड़ गए है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने एक दशक के मुख्यमंत्री काल में एक विशेष वर्ग पर ही अपना फोक्स रखा। हरियाणा की मौजूदा खट्टर सरकार, भले ही पंजाबी वर्ग को प्रतिनिधित्व की डुगडुगी बजा रही थी, मगर सबसे ज्यादा नाराजगी पंजाबी वर्ग में ही देखी जा सकती है। भाजपाई सांसद राजकुमार सैनी पिछड़ा वर्ग की फौज तैयार कर रहे है, तो कांग्रेसी प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर दलित वर्ग को एक मंच पर लाने की फिराक में है। जातीय रंगत को लेकर हरियाणा में शुरू हुई राजनीति भाईचारे में खट्टास पैदा करने की शुरूआत के रूप में देखी जाने लगी है, जिसे आपसी भाईचारे को बनाए रखने के लिए फायदेमंद नहीं कहा जा सकता।





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