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भूपेंद्र हुड्डा को धीरे-धीरे लपेट में ले रही है खट्टर सरकार

bhupender singh hooda
सिरसा(प्रैसवार्ता)। पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा को ज्यों-ज्यों चुनाव नजदीक आ रहे है, हरियाणा में भाजपा सरकार घेरने के लिए कानूनी शिंकजा कसने में लग गई है। वर्तमान में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ पंचकूला में इंडस्ट्रीयल प्लाट आंवटन 2013 में एफआईआर दर्ज है और विजीलेंस जांच में हुड्डा, एक आईएएस, एक सेवानिवृत्त अधिकारी और 14 प्लॉट धारक दोषी पाए गए है। इसी प्रकार गुरुग्राम के मानेसर जमीन अधिग्रहण मामले में वर्ष 2004 से 2007 के बीच 400 एकड की भूमि खरीद में धांधली, पंचकूला का एजेएल प्लॉट आंवटन मामले में वर्ष 2016 में री-अलाटमैंट में हुड्डा का विजीलेंस जांच में दोषी पाया जाना,आईएएस अधिकारी अशोक खेमका की ओर से गेहूं में करनाल बंट नामक बीमारी की रोकथाम के लिए रैक्सील दफा घोटाला मामले सीबीआई के पास बताए जा रहे है। भूपेंद्र हुड्डा पर तीन मामलों को छानबीन सीबीआई तथा एक की प्रर्वतन निदेशालय की जांच चल रही है। कांग्रेस इन मुकद्दमों को राजनीति से प्रेरित मानकर चल रही है, मगर जिस प्रकार कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है, उसकी चुंगल से बच पाना आसान दिखाई नहीं दे रहा। कांग्रेस सुप्रीमों सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा की कंपनी को दी गई जमीन अलाटमैंट को लेकर गठित धींगड़ा आयोग ने भी भूपेंद्र हुड्डा को लपेटा है, हालांकि हुड्डा ने आयोग के गठन को हाईकोर्ट में चुनौती दी हुई है। भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ कई और मामलों प भी जांच की तैयारी चल रही है, जिसके उपरांत भाजपा व कांग्रेस में टकराव के आसार बन सकते है। भाजपा की नजरें मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर पर है, जो भूपेंद्र हुड्डा पर निरंतर तीखे प्रहार कर रहे है। प्रमुख विपक्षी दल इनैलो पहले ही भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है।

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