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भूपेंद्र हुड्डा को राजनीति से आऊट करने की राजनीति शुरू

Bhupinder Hooda-Ashok Tanwar
सिरसा(प्रैसवार्ता)। पिछले अढ़ाई वर्ष से सत्तारूढ़ भाजपा, प्रमुख विपक्षी दल इनैलो तथा अपनों के ही फोक्स पर रहे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को राजनीति से आऊट करने की राजनीति शुरू हो गई हैं, जिसमें कई कांग्रेसी दिग्गज अहम् भूमिका निभा रहे है। एक दशक तक हरियाणा के सीएम रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा का प्रदेश में व्यापक जनाधार है। प्रदेश के 17 कांग्रेसी विधायकों में से 14, इकलौता कांग्रेसी सांसद, तीन दर्जन से ज्यादा पूर्व सांसद व विधायक, दो तिहाई युवा कांग्रेस भूपेंद्र हुड्डा की पक्षधर है, जो पिछले तीन वर्ष से हरियाणवी कांग्रेस की चौधर संभालने वले पूर्व सांसद अशोक तंवर को नेता नहीं मानते औार तंवर की बैठकों से गायब रहते है। भूपेंद्र हुड्डा तथा तंवर के राजनीतिक मतभेद शब्द बाण जंग से निकलकर लट्ठम-ल_ तक पहुंच चुके है। भूपेंद्र हुड्डा के प्रयासों से यदि कोई राजसी दिग्गज कांग्रेसी ध्वज उठाता है, तो कांग्रेस प्रधान तंवर ना मालूम कहकर कांग्रेसी ध्वज उठाने वालों पर टिप्पणी करने से गुरेज नहीं करते। अपने मुख्यमंत्री कार्यालय में अपनों को ही राजनीतिक झटके देने वाले भूपेंद्र हुड्डा अब स्वयं राजनीतिक प्रहारों की चपेट में है। सत्तापक्ष भूपेंद्र हुड्डा को कानूनी शिकंजे में कसने की तैयारी कर रहा है, वहीं इनैलो एक विशेष वर्ग का नेतृत्व संभालने के लिए हुड्डा को राजनीति से क्लीन बोल्ड करना चाहता है। कांग्रेस का तंवर खेमा भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ तथा हुड्डा खेमे ने तंवर के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है, जिससे कांग्रेसीजन प्रभावित हो रहे है। सत्तारूढ़ भाजपा तथा प्रमुख विपक्षी दल इनैलो को हुड्डा का बढ़ा हुआ जनाधार एक राजनीतिक आइना दिखाता है, इसलिए दोनो प्रयासरत् है कि भूपेंद्र हुड्डा की राजनीति को हाशिये पर लाया जाए। ऐसी ही सोच मौजूदा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर के खेमे की है, जो हुड्डा को राजनीतिक झटका देकर अशोक तंवर को चौधरी बनाए रखना चाहते है। भूपेंद्र हुड्डा के कांग्रेस में रहते हुए तंवर की चौधर आसान नहीं कही जा सकती। तंवर ने हरियाणवी राजनीति में पैराशूट से उतर कर दस्तक दी, वहीं भूपेंद्र हुड्डा एक लंबे समय से कांग्रेस चालीसा पढ़ते आ रहे है। तंवर की तीन वर्षीय चौधर भी संगठन में मजबूती और कांग्रेसी परिवार बढ़ाने में विफल रही है। भाजपा तथा इनैलो इन दोनो कांग्रेसी दिग्गजों की आंख मिचौली पर नजर रखे हुए है, जबकि कांग्रेसीजन उलझन में है। हरियाणवी कांग्रेस का मौजूदा हिचकौले खा रहा मानचित्र संकेत देता है कि यदि भूपेंद्र हुड्डा को राजनीतिक प्लेटफॉर्म से आऊट किया जाता है, तो राजनीतिक मानचित्र से हरियाणवी कांग्रेस भी गायब हो सकती है, क्योंकि वर्तमान में हरियाणवी कांग्रेस पर हुड्डा कांग्रेस भारी है। राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें, तो हुड्डा बनाम तंवर की राजनीतिक जंग से कांग्रेसी तंग है। यहीं कारण कहा जा सकता है कि अपनों की बदौलत ही हरियाणवी कांग्रेस का न सिर्फ जनाधार कम हो रहा है, बल्कि कांग्रेसी दिग्गजों के आंकड़े में भी कम आ रही है, जोकि कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं कही जा सकती।

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