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दवाब या हृदय परिवर्तन: भूपेंद्र हुड्डा ने छोड़ा अंतिम राजनीतिक ब्रह्मास्त्र

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सिरसा(प्रैसवार्ता)। पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपनी अनदेखी के चलते कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर दवाब बनाने के लिए अपना अंतिम राजनीतिक ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया है। अपनी इस योजना में विफल रहने पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणवी राजनीति को नया मोड़ दे सकते हैं। किसान, व्यापारी व दलित वर्ग की महापंचायतों के अतिरिक्त कांग्रेसी दिग्गजों की एक लंबी फौज, यूथ कांग्रेस में भारी समर्थन का कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को आईना दिखाकर अपनी राजनीतिक शक्ति  का प्रदर्शन करने उपरांत शीर्ष नेतृत्व की अनदेखी से बेचैन भूपेंद्र हुड्डा ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को खुली चुनौती दी है, कि उनकी अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी। भूपेंद्र हुड्डा के हरियाणा कांग्रेस के मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर से राजनीतिक मतभेद जगजाहिर है, जिन्हें सड़कों पर देखा जा चुका है। केवल इतना ही नहीं, मतभेदों का बढ़ता आंकड़ा मार पिटाई तक भी देखा गया है। हरियाणा के इकलौते कांग्रेसी सांसद के साथ-साथ 17 कांग्रेसी विधायकों में से 13 का समर्थन और करीब दो दर्जन पूर्व सांसद व विधायक का नेतृत्व कर रहे भूपेंद्र हुड्डा पर निरंतर उनके समर्थकों का कांग्रेस से अलविदाई का दवाब बनाया जा रहा है। हुड्डा समर्थक तंवर का नेतृत्व स्वीकार न करने तथा प्रदेशाध्यक्ष बदले की मांग सार्वजनिक तौर पर करते आ रहे है, मगर कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व चुप्पी साधे हुए है। राजनीतिक तौर पर हिचकौले खा रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर भाजपाई डोरे शुरू होने की चर्चा है, क्योंकि भाजपा के पास कोई भी ऐसा जाट चेहरा नहीं है, जो पूरे प्रदेश में जाट वर्ग में विशेष पहचान व जनाधार रखता हो। भूपेंद्र हुड्डा के भगवा ध्वज उठाने के क्यासों से जहां कांग्रेस को भारी झटका लगेगा, वहीं इनैलो भी प्रभावित होगी। इसका फायदा भाजपा को मिलेगा। भूपेंद्र हुड्डा के करीबी कांग्रेसी विधायक जयतीर्थ दहिया के संकेत से कि हुड्डा की मोदी से मुलाकात से राजनीतिक समीकरणों में बदलाव आ सकता है, को लेकर हरियाणवी राजनीति में क्यासों का दौर शुरू हो चुका है। भूपेंद्र हुड्डा शीर्ष नेतृत्व से संगठन में बदलाव के लिए कई बार गुहार लगा चुके है, मगर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर अंतिम दवाब बनाने के लिए ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया है, जोकि कांग्रेस पर भारी पड़ सकता है। भूपेंद्र हुड्डा इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताते रहे,मगर जयतीर्थ के संकेत ने हरियाणवी राजनीति में हडकंप मचा दिया है। इस मुलाकात से कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर भी दवाब हो सकता है या हृदय परिवर्तन की पटकथा लिखी जा सकती है।

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