प्रैसवार्ता न्यूज: सिरसा, 23 अक्टूबर। श्री श्याम प्रेम मंडल के तत्वावधान में गौशाला रोड की गली नंबर 1 में पहला श्याम महोत्सव एवं जागरण करवाया गया, जिसमें स्थानीय कलाकार एवं गायक राजेश गोयल (रिंकू) ने गणेश वंदना एवं सुंदर-सुंदर भजनों से पूरे पंडाल को श्याममयी कर दिया। दिल्ली से आई सुरीली गायिका एवं श्याम लाड़ली टिवंकल शर्मा की श्याम भक्ति पर सभी श्याम भक्त झूम उठे। साहिल आर्ट ग्रूप फाजिल्का ने कृष्ण-राधा व हनुमान की मनमोहक झांकियां प्रस्तुत की। आयोजक एवं गायक युधिष्टिर सैनी ने भी सुंदर सी प्रस्तुति दी। श्री श्याम प्रेम मंडल की ओर से श्री सालासर धाम से महोत्सव में आए श्री बाला जी परिवार का भव्य स्वागत किया गया, जबकि वार्ड नंबर 21 के पार्षद रोहताश वर्मा ने इस महोत्सव में उपस्थिति दर्ज करवाते हुए श्री श्याम बाबा का आशीर्वाद लिया और ज्योत प्रज्जवलित की। इस अवसर पर उन्होंने श्याम महिमा के बारे में बताते हुए कहा कि बाबा श्याम हारे के सहारे हैं। मनुष्य के कष्ट के समय जब चारों ओर से दरवाजे बंद हो जाएं और सच्चे मन से उनको पुकारें तो वे भक्तों के कष्ट हरते हैं। श्याम बाबा के दर पर आए हर व्यक्ति की मुराद पूरी होती है, इसलिए उन्हें हारे के सहारे भी कहा जाता हैं। मंडल की ओर से आए हुए अतिथियों को श्री श्याम नाम का प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया व आभार व्यक्त किया। महोत्सव में सावरे के दिवाने ग्रुप की ओर से मसाला चाय व बिस्कुट, जबकि गुरुकृपा सेवा समिति की ओर से चरण पादुका की सेवा की गई। इस अवसर पर रामकृष्ण वर्मा, आकाश चाचाण, अंकित गर्ग, विनोद सैनी, महेंद्र बिश्नोई, सुशील सैनी, विक्रम सैनी, राकेश गोयल, योगेश शर्मा, मोहित बांसल, कपिल गोयल, अंकित गोयल सहित काफी संख्या में श्याम भक्तों ने उपस्थिति दर्ज करवाई।
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डेरा सच्चा सौदा चेयरपर्सन विपासना इन्सां की अपील
सिरसा(प्रैसवार्ता)। डेरा सच्चा सौदा में छानबीन के मद्देनजर डेरा चेयरपर्सन विपासना इन्सां ने शांति की अपील की है। प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार विपासना इन्सां ने अपनी अपील में कहा है कि डेरा सच्चा सौदा में क़ानूनी प्रक्रिया चल रही है, जिसके तहत डेरा सच्चा सौदा कैंपस में छानबीन की जाएगी। डेरा सच्चा सौदा हमेशा क़ानून का पालन करता रहा है। आप सभी से अपील है कि इस प्रक्रिया में क़ानून का साथ दे व शांति बनाए रखे।औरत का पीर: विषय गंभीर?
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धर्म एवं अध्यात्म की दुनिया के एक और तथाकथित 'सौदागर' गुरमीत सिंह के चेहरे से अब उसकी हकीकत का नकाब पूरी तरह से हट चुका है। 2002 में अपने ही डेरे की साध्वियों के बलात्कार का आरोपी अब बलात्कार का सज़ायाफ्ता मुजरिम बन चुका है। सर्वविदित है कि अपनी ही शिष्या साध्वियों के बलात्कार के मामले में डेरा सच्चा सौदा के नाम से पुकारे जाने वाले हरियाणा के सिरसा स्थित एक डेरा मुख्यालय के प्रमुख स्वयंभू गॉडमैन गुरमीत सिंह को पंचकुला स्थित सीबीआई अदालत ने अनेक गवाहों व तथ्यों के आधार पर बीस वर्ष का सश्रम कारावास तथा तीस लाख रूपये जुर्माना अदा करने की सज़ा सुनाई है। देश के मीडिया जगत में इस शर्मनाक कांड की ज़बरदस्त चर्चा की जा रही है। इस बलात्कारी, ढोंगी, अध्यात्मवादी गुरमीत सिंह को जेल भेजे जाने के बाद इस आश्रम से संबंधित और भी अनेक ऐसे सनसनीखेज़ कारनामों की खबरें सुनाई दे रही हैं, जिन पर कानों को विश्वास ही नहीं हो रहा। हमारे देश में स्वयं को विशिष्ट बताने वाले विभिन्न सम्मानित क्षेत्रों के अनेकानेक लोग महिलाओं के साथ बलात्कार करने, बहला-फुसला कर अपनी हवस मिटाने, लालच देकर या सब्ज़बाग दिखाकर महिलाओं की अस्मत से खेलने का प्रयास करते रहे हैं। राह चलते लड़कियों का अपहरण कर ले जाने,उनके साथ सामूहिक बलात्कार करने तथा बलात्कार के बाद हत्या कर देने जैसे मामले तो आए दिन सामने आते ही रहते हैं। परंतु यही विषय सबसे अधिक चिंताजनक तथा शर्मसार कर देने वाला उस समय हो जाता है जबकि महिला उत्पीडऩ या उसके शरीर के साथ सेक्स या खिलावाड़ करने का काम किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाए जिसे वह स्त्री व उसका परिवार न केवल पिता या अभिभावक के रूप में देखता हो बल्कि उसमें उस भक्त परिवार को परम पिता परमात्मा या ईश्वर की छवि तक दिखाई देती हो? इससे पहले आसाराम नामक एक पाखंडी बलात्कारी बाबा के साथ भी इसी प्रकार का मामला सुनाई दिया था। आज तक आसाराम तथा उसका पुत्र नारायण साईं जोकि संयुक्त रूप से अपने आश्रमों को अपने लिए व्यभिचार, अय्याशी तथा बलात्कार का अड्डा बनाए हुए थे आज भी जेल में सड़ रहे हैं।
आसाराम हो, उसका पुत्र नारायण साईं, दक्षिण भारत का पाखंडी संत नित्यानंद, साक्षी महाराज जैसा राजनीतिज्ञ एवं स्वयंभू संत, एक और राजनीतिज्ञ चिन्मयानंद या फिर अब गुरमीत सिंह डेरा संचालक या फिर आए दिन समाचार पत्रों में अपने कुकर्मों की वजह से सुर्खियां बटोरने वाले दूसरे अनेक दुष्कर्मी डेरा संचालक, संत-महंत, पुजारी, मौलवी, रागी या पादरी, सवाल यह है कि इस धर्म एवं अध्यात्म की दुनिया से जुड़े ऐसे लोगों के संपर्क में कोई कन्या या स्त्री इतनी आसानी से कैसे आ जाती है कि वे उसकी इस्मत व आबरू को तार-तार कर दें? दरअसल किसी महिला की इज्ज्ज़त से खेलने के दोषी केवल यही पाखंडी अध्यात्मवादी लोग ही नहीं हैं बल्कि इस पूरे प्रकरण में वह परिवार खासतौर पर उस परिवार की महिलाएं भी बराबर की ही सांझीदार हैं जो ऐसे पाखंडी दुष्चरित्र बाबाओं के जाल में खुद भी फंसते हैं तथा अपने बच्चों को भी उसी नरक में धकेल देते हैं? हमारे देश में यह कहावत बहुत मशहूर है कि औरत का पीर कभी भूखा नहीं मर सकता। यह कहावत अपने-आप में अनेक अर्थों को समेटे हुए है। अपने दैनिक कार्यों, रोज़गार, व्यवसाय, नौकरी तथा परिश्रम में व्यस्त रहने वाले किसी पुरुष के पास दरअसल इतना समय ही नहीं बचता कि वह किसी धर्म व अध्यात्म की रहस्यमयी दुनिया में जाकर अपना अधिक से अधिक समय बिता सके। परंतु प्राय: घर-गृहस्थी संभालने वाली महिलाएं ही बाबाओं,डेरों या अध्यात्म व धर्म की दुकानदारी चलाने वाले बाबाओं या ज्योतिषियों अथवा पुजारियों के चक्कर लगाती रहती हैं। इनमें अधिकांशत: महिलाएं ऐसे धर्माधिकारियों पर पूरा भरोसा करती हैं यहां तक कि इनके संपर्क में आने के बाद तथा इनके बताए हुए रास्तों पर चलने के बाद उन्हें यह भी विश्वास रहता है कि उनके घर-परिवार में धनवर्षा होगी तथा उनके पति का काम-धंधा या व्यवसाय खूब चलेगा। जहां तक डेरा सच्चा सौदा का सवाल है तो इस आश्रम से जुडऩे वाले अधिकांश परिवार तो इसी लालच से इससे जुड़े थे कि यह एक ऐसा स्थान है जहां का डेरा प्रमुख अपने भक्तों की शराब व नशे की लत छुड़वा देता है। यही पहचान पंजाब में राधा स्वामी नामक एक डेरे ने भी बनाई है। यहां भी अपने भक्तों को शराब व नशे के सेवन के लिए मना किया जाता है। और वास्तव में ऐसा देखा भी गया है कि इन डेरों से जुडऩे वाले अधिकांश लोगों ने नशीली चीज़ों के सेवन को त्याग दिया है। ज़ाहिर है किसी पुरुष द्वारा अपनी नशे की आदत को छोडऩे के उपरांत उसके परिवार में खुशहाली का वातावरण नज़र आता है। खासतौर पर उसकी पत्नी जो अपने पति की नशे की लत से सबसे अधिक प्रभावित व पीडि़त होती है वह ऐसे आश्रमों के प्रमुखों की बेहद शुक्र$गज़ार होती है और इसी लिए वह एक तरी$के से अपने पूरे परिवार के साथ श्रद्धा व सम्मान पूर्वक अपने 'गुरू' के समक्ष अध्यात्मिक रूप से समपर्ण कर देती है और यहीं से गेंद अब उस बाबा या गुरु के पाले में चली जाती है। यदि सौभाग्यवश वह गुरु वास्तव में धर्म व अध्यात्म की लाज बचाना चाहता है और स्वयं भी ईश्वर से डरता है और खुद सच्चे रास्ते पर चलते हुए दूसरों को भी सही राह पर चलने की शिक्षा देता है तो निश्चित रूप से वह अपने भक्तों को भी न केवल सही राह दिखाएगा बल्कि उनके मान-सम्मान व इज़्ज़त-आबरू की रक्षा भी करेगा और यदि कोई व्यक्ति केवल गुरु,धर्मगुरु या किसी डेरे के गद्दीनशीन का चोला मात्र धारण किए हुए है और उसके भीतर एक राक्षसी प्रवृति पल रही है तो ऐसे व्यक्ति के संपर्क में किसी परिवार के आने का अर्थ केवल अनर्थ ही समझा जाना चाहिए। ठीक उसी तरह जैसेकि आसाराम से लेकर गुरमीत सिंह तक के पाखंडी व बलात्कारी स्वयंभू धर्मगुरुओं में देखा जा रहा है। वैसे भी हमारे देश में दुर्भाग्यवश महिला उत्पीडऩ तथा सेक्स जैसे विषय को लेकर समाज में बहुत चिंताजनक स्थिति देखी जा रही है। न केवल जि़म्मेदार लोगों द्वारा या गुंडों-बदमाशों, मवालियों या आवारा किस्म के लोगों द्वारा सैक्स या बलात्कार अथवा सामूहिक बलात्कार की घटनाएं किसी न किसी बहाने अंजाम दी जाती हैं बल्कि अनेक सर्वेक्षणों से यह भी पता चला है कि किसी भी कन्या को उसके युवावस्था में कदम रखते ही सबसे बड़ा खतरा उसके अपने परिवार के लोगों और सगे-संबंधियों से ही रहता है। आए दिन ऐसी खबरें भी अखबारों में प्रकाशित होती रहती हैं। पिता, भाई, चाचा, मामा, जीजा जैसे अनेक करीबी रिश्ते दागदार होते देखे गए हैं। ऐसे में यदि आम लोग खासतौर पर आस्था व श्रद्धावान महिलाएं यदि यह सोचें की उनकी या उनकी बहू-बेटी की इज़्ज़त किसी स्वयंभू धर्माधिकारी की संगत में या उसके संपर्क में आकर सुरक्षित रह सकती है तो इस बात की कोई गारंटी नहीं। आज के युग में जबकि कलयुग अपने चरम पर पहुंच चुका है, भारतीय संस्कृति तथा देश के मान-सम्मान की रक्षा करने की जि़म्मेदारी,अपने व अपने परिवार की इज़्ज़त आबरू बचाए रखने का जि़म्मा सबसे अधिक भारतीय महिलाओं पर ही है। लिहाज़ा औरतों को किसी पर भी आंखें मूंदकर विश्वास करने की ज़रूरत नहीं है। इस युग में उनकी चौकसी,उनकी जागरूकता तथा सजगता ही उनके परिवार व बहू-बेटियों की इज़्ज़त सुरक्षित रख सकती है। (निर्मल रानी)
डॉ. एमएसजी को दिया जाट गौरव सम्मान
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सिरसा(प्रैसवार्ता)। डॉ. एमएसजी के 50वें गोल्डन जुबली बर्थ डे के अवसर पर आयोजित समारोह में ऑल इंडिया सर्व जाट खाप पंचायत के प्रधान नफे सिंह नैन, गठवाला खाप के मलिक खाप के प्रधान बलजीत सिंह मलिक, नैन खाप के उपप्रधान भगत सिंह, ढांडा खाप के प्रधान कुलदीप ढांडा, प्रवक्ता मेहर सिंह नैन व अन्य गणमान्य भी संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां को जन्मदिन की बधाई देने पहुंचे। प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार उपरोक्त व्यक्तियों ने संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां को जाट गौरव सम्मान से सम्मानित करते हुए पगड़ी पहनाई तथा चांदी का हल भेंट किया।
'एमएसजी नौ बर नौ कार्निवल(मेला)' का आगाज, संत डॉ. गुरमीत ने किया शुभारंभ
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सिरसा(प्रैसवार्ता)। संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के 50वें गोल्डन जुबली बर्थ डे के अवसर पर शाह सतनाम जी धाम में 'एमएसजी नौ बर नौ कार्निवल(मेला)' का आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां ने अपने कर कमलों से रिबन जोड़कर किया। प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार सप्ताह भर चलने वाला यह मेला करीब दस एकड़ में लगाया गया है, जिसमें भारत की लुप्तप्राय होती मेले की विरासत के साथ साथ लघु भारत देखा जा सकता है। उद्घाटन के पश्चात मेले को देखने के लिए लोगों का हजूम उमड़ पड़ा और हर किसी ने मेले की तारीफ की। मीडिया से रूबरू होते हुए संत डॉ. गुरमीत ने कहा कि 'एमएसजी नौ बर नौ कार्निवल(मेला)' देखकर उन्हें अपना बचपन याद आ गया तथा वे भी खेलने लग गए। गांव में छोटे छोटे मेले लगते थे, जिनमें लोग मनोरंजन के साथ साथ घरेलू आवश्यकता की चीजें भी खरीद कर लेकर आते थे। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति बहुत महान है तथा मेला संस्कृति का बहुत बड़ा हिस्सा है, जो लुप्तप्राय: हो रही है। मेला देखकर लोग भारतीय संस्कृति से रूबरू होंगे।
हर इंसान को राम नाम से जोडऩा चाहता हूं: संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां
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सिरसा(प्रैसवार्ता)। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां के 50वें जन्मदिन मौके पर डेरा प्रेमियों की ओर से विश्वभर में पौधारोपण अभियान चलाया गया, जिसकी शुरूआत डेरा प्रमुख ने स्वयं पौधा लगाकर की। इस अवसर पर हरियाणा के पर्यावरण एवं उद्योगमंत्री विपुल गोयल, अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम आयोग की अध्यक्ष सुनीता दुग्गल विशेष तौर पर उपस्थित हुए। प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार डेरा प्रमुख ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि दिन रात उनकी यही सोच है कि पूरे समाज का भला कैसे करें। इंसानियत के भले के लिए ईश्वर ने एक इंसान बनाया, और उसमें इतने टैलेंट भर दिए और ये बता दिया कि मैं इंसान से क्या क्या करवा सकता हूं। हर इंसान ऐसा कर सकता है, अगर वो मेहनत करें। उन्होंने कहा कि मानवता भलाई के कार्यों को गति दें, अधिक से अधिक लोगों को राम नाम से जोड़ें और उनकी बुराइयां छुड़वाएं यहीं उनके जीवन का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि डेरा सच्चा सौदा में खेल गांव बनाया गया है, जहां से इस इलाके के तथा पूरे भारत से खिलाडिय़ों को लाया जाएगा और उन्हें ओलंपिक के लिए तैयार किया जाएगा। यहां के खिलाड़ी एशिया, वल्र्ड कप लेकर आ चुके हैं और अब कोशिश है कि ओलंपिक में भी मैडल अवश्य आए।
लाखों पौधे लगाकर मनाया जाएगा डॉ. एमएसजी का अवतार दिवस
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आकर्षण का केन्द्र होगा एमएसजी भंडारा
संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां के पावन अवतार दिवस के अवसर पर 10 से 16 अगस्त तक आयोजित होने वाले 'एमएसजी भंडारे' की तैयारियां जोरों-शोरों से शुरु हो गई हैं। इस अवसर पर सात दिवसीय ग्रांड इवेंट्स आयोजित किए जाएंगे, जिसमें सामाजिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का अनूठा संगम देखने को मलेगा। 10 अगस्त से शाह सतनाम जी धाम में रोजाना सायं 7 बजे से रात्रि 12 बजे तक यह भव्य कार्यक्रम चलेंगे। इससे पूर्व प्रतिदिन पूज्य गुरु जी सायं 5:30 बजे गुरुमंत्र (नामशब्द) भी प्रदान करेंगे। अध्यात्म व फिल्मों के माध्यम से विश्व भर में धूम मचाने वाले डॉ. एमएसजी के 50 वें अवतार दिवस को उनके प्रशंसक एमएसजी भंडारे के रूप में धूमधाम से मनाने जा रहे हैं। शाह सतनाम जी धाम एक बार फिर से 'अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक विश्व बंधुत्व समारोह' का साक्षी बनने जा रहा है, जो इस बार सप्ताह भर चलेगा, जिसमें कलाकार नाटक, संगीत, स्टंट, कॉमेडी, डांस, सेंड आर्ट, जादूगरी इत्यादि कलाओं का प्रदर्शन करेंगे। इनके अलावा पूज्य गुरुजी द्वारा इजाद किए गए देसी गेम्स को देखने का भी अवसर मिलेगा।
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