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सिरसा(प्रैसवार्ता)। करीब पौने तीन वर्ष के कार्यकाल में भाजपा सरकार ने अपने विरूद्ध मोर्चा खोलने के कई अवसर विपक्ष को दिए, मगर विपक्ष अपनी भूमिका निभाने में फिसड्डी रहा। इनैलो ने एसवाईएल मामले में जरूर सक्रियता दिखाई है, जबकि कांग्रेस आपसी कलह से जूझ रही है। प्रदेश में कांग्रेस की कमान पूर्व सांसद अशोक तंवर के हाथ में है, मगर पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा समांतर कांग्रेस चलाए हुए है। तंवर और भूपेंद्र हुड्डा एक ही मुद्दे पर फोक्स बनाए हुए है कि एक दूसरे को राजनीतिक पटकनी कैसे दी जाए। राज्य में बिजली, पेयजल, कानून व्यवस्था जैसे कई मुद्दे उठे थे,जिसे विपक्ष ने देखकर भी अनदेखा करके विपक्षी भूमिका पर प्रश्र चिन्ह लगा दिया और सरकार हर मुद्दे को दफन करने में सफल रही। सत्तारूढ़ भाजपाई सरकार में कई भाजपा सांसद, विधायक व दिग्गज जरूर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते देखे गए। भूपेंद्र हुड्डा कई बार सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की घोषणा कर चुके है। इस घोषणा पर कब अमलीजामा पहनाया जाएगा, इसका जवाब प्रश्न के गर्भ में है। इसी प्रकार अशोक तंवर भी राज्य स्तरीय अंदोलन छोडऩे का राग अलाप चुके है, मगर इसकी भी अभी कोई तिथि निर्धारित नहीं हुई है। विपक्षी भूमिका के फिसड्डी होने की वजह से प्रदेशवासियों का जहां, विपक्षी पार्टियों से विश्वास उठता जा रहा है, वहीं नए राजनीतिक मंच का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है।

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