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शाह की शाही पॉलिट्रिक्स पर हरियाणवी राजनीति ने लगाया ग्रहण


AMIT SHAH
सिरसा(प्रैसवार्ता)। भारतीय राजनीति में उथल-पुथल मचाकर शाही पॉलिट्रिक्स करने वाले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की चाणक्य राजनीति पर हरियाणवी राजनीति ने ग्रहण लगा दिया है। हरियाणा के तीन दिवसीय प्रवास से अमित शाह को निराशा हाथ लगी है, क्योंकि किसी भी राजसी दिग्गज ने अपनी पार्टी से अलविदाई लेकर भगवा ध्वज नहीं उठाया। मंत्रियों तथा संगठन के पदाधिकारियों को नसीयत देते हुए मिशन 2019 की सफलता का गुरमंत्र देने वाले शाह ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को क्लीन चिट देने के साथ-साथ उनके नेतृत्व में ही चुनाव लडऩे का संकेत देकर उन भाजपाई सांसदों, विधायकों व दिग्गजों की राजनीतिक धकडऩे बढ़ा दी है,जो मुख्यमंत्री से असंतुष्ट है। 90 विधानसभा क्षेत्रों वाले हरियाणा राज्य में 47 पर भगवा ध्वज फहरा रहा है, जबकि अन्य 43 पर भगवा ध्वज फहराने की फिराक में भाजपा है। भाजपा की प्राथमिकता पिहोवा, पुंडरी, सफीदों, जींद, नरवाना, पृथला, तिगाव, पलवल, हथीन, कलानौर, महम, दादरी, लोहारू, बरवाला, उकलाना, रतिया, ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र रहेंगे, जहां भाजपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थेे। शाह के निर्देश और गुरमंत्र बराला प्रकरण की चपेट में आ गया है। प्रदेश की मौजूदा राजनीति में 47 विधानसभा क्षेत्रों में भगवा फहराकर सत्ता तक पहुँचने वाली भाजपा के ज्यादातर विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा की नाव हिचकोले खा रही है। प्रदेश में भाजपाईयों की दंबगई के कई मामले भी सामने आए है, जिससे भाजपा की राजनीतिक छवि प्रभावित हुई है। भाजपा हरियाणा के सेनापति सुभाष बराला स्वयं ही एक मामले में उलझे हुए है। प्रदेश की कांग्रेस की तरह भाजपा में भी आपसी कलह है, जिसे भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता। प्रदेश भाजपा को उम्मीद रही होगी कि शाह के शाही पॉलिट्रिक्स से वह लांभावित होगी, मगर शाह के हरियाणा प्रवास का हरियाणवी राजनीति पर  कोई प्रभाव नहीं हुआ। प्रदेश सरकार संगठन से, जहां शाह को मायूसी मिली है, वहीं शाह का हरियाणा प्रवास भी भाजपा हरियाणा पर कोई विशेष छाप नहीं छोड़ पाया।

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